Bihar: गया का पटवा टोली बना ‘इंजीनियरों का गढ़’; गरीबी भी नहीं रोक पाई सफलता का रास्ता, जानें क्या है मामला?
Bihar: गया जिले के मानपुर की पहचान कभी सिर्फ बुनकरों की नगरी के रूप में होती थी, लेकिन अब यही इलाका शिक्षा की नई इबारत लिख रहा है, जहां सीमित संसाधनों के बीच छात्रों ने मेहनत और मार्गदर्शन के दम पर राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में अपनी जगह बनाई है।
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विस्तार
गया जिले का मानपुर, जिसे बुनकर नगरी के नाम से जाना जाता है, आज शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहचान बना रहा है। पारंपरिक रूप से कपड़ा बुनाई के पेशे से जुड़े इस क्षेत्र में अब शिक्षा की अलख ने सामाजिक बदलाव की मजबूत नींव रख दी है। इसका ताजा उदाहरण आईआईटी-जेईई मेन्स (सेशन-2) 2026 के परिणाम हैं, जिसमें “वृक्ष बी द चेंज” निशुल्क पाठशाला से जुड़े 41 छात्रों में से 31 छात्रों ने सफलता हासिल कर इतिहास रच दिया है।
संस्थापक की मेहनत और समर्पण से मिली सफलता
समाजसेवी के प्रयासों से बढ़ी शिक्षा की जागरूकता
इतिहास से मिली प्रेरणा, लगातार बढ़ रही सफलता
अगर इतिहास पर नजर डालें तो 1980-85 के दशक में यहां शिक्षा के प्रति जागरूकता की शुरुआत हुई थी। इसके बाद 1995-96 में जितेंद्र कुमार ने आईआईटी में सफलता हासिल कर पूरे समुदाय के लिए एक नई राह दिखाई। अब उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए यहां के छात्र इंजीनियरिंग, मेडिकल, रेलवे और प्रशासनिक सेवाओं में अपनी जगह बना रहे हैं।
अनुशासन और मार्गदर्शन से मिली कामयाबी
छात्रों का कहना है कि उनकी सफलता के पीछे नियमित पढ़ाई, अनुशासन और सही मार्गदर्शन सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। इस पाठशाला की एक खास बात यह है कि यहां किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता और ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पढ़ाई कराई जाती है, ताकि हर वर्ग के छात्र इसका लाभ उठा सकें।
समाज में बदलाव की प्रेरक कहानी
मानपुर की यह कहानी केवल परीक्षा में सफलता की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सोच में आए बदलाव की प्रेरक गाथा है, जो यह साबित करती है कि सही दिशा और अवसर मिलने पर कोई भी समुदाय नई ऊंचाइयों को छू सकता है।
निशुल्क पाठशाला से मिली सफलता की उड़ान
छात्रा विधा रानी ने अपनी सफलता का श्रेय “वृक्ष बी द चेंज” निशुल्क पाठशाला को दिया है। उन्होंने बताया कि यहां नियमित और अनुशासित माहौल में पढ़ाई कराई जाती है। छात्र सुबह से पाठशाला पहुंचते हैं और शाम छह बजे तक लगातार अध्ययन करते हैं, जिससे पढ़ाई की मजबूत नींव तैयार होती है।
विधा रानी ने कहा कि इस पाठशाला की सबसे खास बात यह है कि यहां ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाती है। खासकर मुंबई आईआईटी के सीनियर छात्रों द्वारा ऑनलाइन पढ़ाई कराना उनके लिए काफी लाभदायक साबित हुआ। उनके मार्गदर्शन से कठिन विषयों को समझना आसान हुआ और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद मिली।
उन्होंने बताया कि यहां किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राएं भी बिना किसी दबाव के अपनी पढ़ाई जारी रख पाते हैं। विधा रानी ने कहा कि लगातार मेहनत, सही दिशा और शिक्षकों के सहयोग से ही उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है।
निशुल्क पाठशाला से सौरभ को 95 पर्सेंटाइल
छात्र सौरभ कुमार ने बताया कि उन्होंने पिछले दो वर्षों से “वृक्ष बी द चेंज” निशुल्क पाठशाला में पढ़ाई की, जिसका परिणाम आज जेईई मेन्स में 95 पर्सेंटाइल के रूप में सामने आया है। उन्होंने कहा कि यहां बेहतर शैक्षणिक माहौल और मार्गदर्शन ने उनकी तैयारी को मजबूत बनाया।
सौरभ ने बताया कि पाठशाला में पढ़ाई की सुविधाएं काफी अच्छी हैं और शिक्षकों का सहयोग हर कदम पर मिलता है। अब वे जेईई एडवांस की तैयारी में जुट गए हैं और आगे बेहतर प्रदर्शन करने का लक्ष्य रखे हुए हैं।
पटवा टोली बना इंजीनियरों का गढ़
पाठशाला के संस्थापक चंद्रकांत पाटेश्वरी ने बताया कि इस वर्ष 31 छात्रों ने जेईई मेन्स (सेशन-2) में सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि जो छात्र महंगे कोचिंग संस्थानों का खर्च नहीं उठा सकते, उनके लिए यह निशुल्क पाठशाला एक बड़ा सहारा बनकर उभरी है।
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उन्होंने जानकारी दी कि अब तक इस पहल के जरिए सौ से अधिक छात्र इंजीनियर बन चुके हैं, जिनमें से कई विदेशों में भी नौकरी कर रहे हैं। यही वजह है कि मानपुर का पटवा टोली आज “इंजीनियरों का गढ़” के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुका है।
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