Bihar: पति की हत्या मामले में पत्नी को आजीवन कारावास, अदालत का सख्त फैसला; दो मासूम बच्चों के भविष्य पर चिंता
बेतिया के धनहा थाना क्षेत्र में पति की चाकू मारकर हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी पत्नी नेहा उर्फ नूरजहां को आजीवन सश्रम कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। स्पीडी ट्रायल में सुनाए गए फैसले में मृत्यु पूर्व बयान को अहम साक्ष्य माना गया।
विस्तार
बेतिया में पति की चाकू मारकर हत्या करने के मामले में अदालत ने आरोपी पत्नी नेहा उर्फ नूरजहां को दोषी ठहराते हुए आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने उस पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। यह फैसला जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) मानवेंद्र मिश्रा की अदालत ने सुनाया। मामला धनहा थाना कांड संख्या 204/2025 से संबंधित है।
घटना की पृष्ठभूमि
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 23 जून 2025 की रात करीब डेढ़ से दो बजे के बीच घरेलू विवाद के दौरान नेहा ने अपने पति मनोज पर चाकू से कई वार किए। गंभीर रूप से घायल मनोज को परिजन अस्पताल ले गए, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
मामले में सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य मृतक का मृत्यु पूर्व बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) रहा, जिसमें मनोज ने अपनी पत्नी द्वारा हमला किए जाने की बात कही थी। अदालत ने इस बयान को अहम साक्ष्य मानते हुए दोष सिद्ध किया। मृतक की मां ने भी अदालत में गवाही दी कि उनका बेटा खून से लथपथ अवस्था में दरवाजे पर मदद मांग रहा था। इस गवाही ने अभियोजन पक्ष के मामले को मजबूती प्रदान की।
स्पीडी ट्रायल में सुनाया गया फैसला
मामले की सुनवाई स्पीडी ट्रायल के तहत की गई। लगभग 30 दिनों के भीतर आठ गवाहों की गवाही पूरी की गई। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक जितेंद्र भारती ने प्रभावी पैरवी की। सभी साक्ष्यों और गवाहियों पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सख्त सजा सुनाई।
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बच्चों पर पड़ा असर
इस घटना से न केवल एक परिवार उजड़ गया, बल्कि दंपति के दो छोटे बच्चों का भविष्य भी प्रभावित हुआ है। पिता की मृत्यु और मां के कारावास के बाद दोनों बच्चे अभिभावक विहीन हो गए हैं। जिला प्रशासन ने मानवीय पहल करते हुए दोनों बच्चों को बालिग होने तक चार-चार हजार रुपये प्रतिमाह आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। अदालत के इस फैसले को कानून के प्रति सख्ती और न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि क्षणिक आवेश किस प्रकार पूरे परिवार की जिंदगी को प्रभावित कर सकता है तथा रिश्तों में संवाद और धैर्य की आवश्यकता को रेखांकित करता है।