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Bihar: अपराध के आंकड़ों ने विधान परिषद् में सुशासन की पोल; सरकार ने बताया- क्यों बढ़े आंकड़े?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आदित्य आनंद Updated Thu, 12 Feb 2026 03:45 PM IST
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सार

Bihar News : बिहार में 2005 के बाद से अपराध पर नियंत्रण का दावा किया जा रहा है। मौजूदा सत्ताधारी दल 2004 तक के बिहार में जंगल राज की बात करते हैं। लेकिन, गुरुवार को विधान परिषद में राजद से सदस्य के पूछे सवाल ने सरकार को घेर दिया।

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विधानसभा पहुंचे सीएम नीतीश कुमार, वित्त मंत्री सम्राट चौधरी, मंत्री विजय चौधरी, श्रवण कुमार व अन्य। (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बिहार विधान परिषद के बजट सत्र में अपराध के बढ़ते आंकड़ों को लेकर राजद एमएलसी अब्दुल बारी सिद्दकी की ओर सेपूछे गए प्रश्न पर सरकार ने विस्तृत जवाब दिया। गृह विभाग के मंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार ने स्वीकार किया कि वर्ष 2004 की तुलना में वर्ष 2024 में संज्ञेय अपराध, चोरी और अपहरण के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि सरकार की ओर से सरकार ने दावा किया कि बिहार पुलिस अपराध नियंत्रण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। छोटी से छोटी आपराधिक घटना पर वरीय अधिकारी संज्ञान लेते हुए लगातार अनुसंधान कर रहे हैं। अधिकांश मामलों में सफल उद्भेदन भी किया जा रहा है। पुलिस मुख्यालय स्तर से अनुसंधान और अपराध नियंत्रण के लिए कई आदेश जारी किए गए हैं, जिनका अनुपालन सुनिश्चित कराया जा रहा है। सरकार ने कहा कि अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
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सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2004 में राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों में संज्ञेय अपराध के 1,17,273 मामले दर्ज थे, जबकि वर्ष 2024 में राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो, बिहार के अनुसार यह संख्या बढ़कर 3,52,130 हो गई। अपराध दर भी प्रति लाख आबादी पर 132.8 से बढ़कर 272.5 हो गई है। वर्ष 2004 में चोरी के 11,113 मामले दर्ज हुए थे, जो 2024 में बढ़कर 47,548 हो गए। अपहरण के मामले भी 3,413 से बढ़कर 19,768 तक पहुंच गए। अपहरण की अपराध दर 3.9 से बढ़कर 15.3 प्रति लाख आबादी हो गई है।

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शादी और प्रेम प्रसंग प्रमुख कारण

विपक्ष के सवाल का जवाब देते हुए नीतीश सरकार ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2024 में अपहरण के कुल 19,768 मामलों में सबसे अधिक 8,027 मामले शादी के उद्देश्य से अपहरण के रहे। वहीं, प्रेम प्रसंग के कारण घर से भागने के 6,035 मामले दर्ज हुए। हत्या के लिए अपहरण के 106, फिरौती के लिए 52 और अन्य अपहरण के 5,548 मामले सामने आए। अपहरण के मामलों में वृद्धि का मुख्य कारण शादी की नीयत से अपहरण और प्रेम प्रसंग में घर से भागने की घटनाएं हैं। हत्या और फिरौती जैसे गंभीर मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम (कुल 158) बताई गई है।


अब ऑनलाइन भी दर्ज हो रही शिकायत

एनडीए सरकार की ओर कहा कि वर्तमान में थानों तक आमजन की पहुंच बढ़ी है और कोई भी व्यक्ति निर्भीक होकर प्राथमिकी दर्ज करा सकता है। e-FIR, Zero FIR, CFMC और NCRP जैसे पोर्टल शुरू होने के बाद ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा भी उपलब्ध है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत यदि कोई व्यक्ति 24 घंटे से अधिक समय तक लापता रहता है तो ‘मिसिंग’ केस दर्ज करना अनिवार्य है। इन कारणों से भी दर्ज मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है।


 

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