ट्रेड यूनियनों ने आज राष्ट्रव्यापी बंद का आह्वान किया। देशभर में ट्रेड यूनियन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने विभिन्न स्थानों पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने रद्द किए गए दर्जनों श्रम कानूनों को पुनर्बहाल करने की मांग उठाई। यूनियन नेताओं का कहना है कि नए श्रम कानून किसानों और मजदूरों के हितों के खिलाफ हैं और भविष्य में इससे उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
राष्ट्रव्यापी हड़ताल का असर कई जगहों पर मिला-जुला देखने को मिला। मोकामा में बाटा मोड़ पर वाम दलों के नेताओं और ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं ने एनएच-80 और एनएच-31 को कुछ घंटों के लिए जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान केंद्र सरकार से रद्द किए गए कानूनों को वापस लेने की मांग की गई।
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ट्रेड यूनियन नेता राजू प्रसाद ने कहा कि केंद्र सरकार ने करीब 40 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार श्रम संहिताएं लागू की हैं, जो मजदूर विरोधी हैं। उनका आरोप है कि इन कानूनों के तहत मजदूरों की कार्यावधि आठ घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे करने की तैयारी है। साथ ही, बिना ट्रेड यूनियन या मजदूरों से संवाद किए छंटनी का रास्ता भी आसान बनाया जा रहा है।
वहीं, सरपंच नागेंद्र कुमार पप्पू ने कहा कि मजदूर यूनियनों और वामपंथी संगठनों के आह्वान पर भारत बंद का समर्थन किया गया है। उनका आरोप है कि नए श्रम कानूनों के जरिए मजदूरों के अधिकारों का हनन हो रहा है और किसानों के मुद्दों को भी उलझाकर रखा गया है। इसी के विरोध में वे अपने साथियों के साथ मोकामा के बाटा मोड़ पर बंद के समर्थन में शामिल हुए।