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Bihar : सांस्कृतिक पुनर्जागरण से बदलेगी बिहार की तस्वीर, पटना में गूँजा 'लेट्स इंस्पायर बिहार' का संकल्प
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: Krishan Ballabh Narayan
Updated Sun, 22 Mar 2026 10:01 PM IST
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सार
Bihar : अब सांस्कृतिक पुनर्जागरण से ही बिहार की तस्वीर बदलेगी। उक्त बातें आईपीएस विकास वैभव ने कही। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब बिहार ने न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व को ज्ञान और बुद्धिमत्ता का प्रकाश प्रदान किया।
आईपीएस विकास वैभव के साथ अन्य लोग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
लेट्स इंस्पायर बिहार अभियान ने अपना 5वां भव्य स्थापना दिवस मनाया। इस कार्यक्रम का आयोजन पटना स्थित बापू सभागार में किया गया। बिहार सांस्कृतिक पुनर्जागरण महासभा उभरते हुए बिहारी पुनर्जागरण की भावना का प्रतीक था। इस कार्यक्रम में लगभग 5,000 लोग शामिल हुए।
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बिहार की ऐतिहासिक और सभ्यतागत विरासत पर जोर देते हुए आईपीएस विकास वैभव ने कहा कि एक समय ऐसा था जब बिहार ने न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व को ज्ञान और बुद्धिमत्ता का प्रकाश प्रदान किया। उन्होंने कहा कि ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज और हार्वर्ड जैसे संस्थानों के अस्तित्व में आने से बहुत पहले ही बिहार में नालंदा विश्वविद्यालय और विक्रमशिला विश्वविद्यालय जैसे विश्वप्रसिद्ध शिक्षण केंद्र स्थापित थे। उन्होंने कहा कि यह विरासत केवल गर्व का विषय ही नहीं है, बल्कि बिहार की पहचान को पुनर्स्थापित करने के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।
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आईपीएस विकास वैभव ने कहा कि भारत का विकास बिहार के विकास से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है। भारत की वास्तविक प्रगति के लिए आवश्यक है कि बिहार और उसके लोग नेतृत्व की भूमिका निभाएँ। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ऐसा बिहार बनाया जाना चाहिए, जहाँ किसी भी व्यक्ति को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा या रोजगार की तलाश में राज्य छोड़ने के लिए विवश न होना पड़े। बेंगलुरु में आयोजित बिहार @ 2047 विजन कॉन्क्लेव के दौरान जारी विजन डॉक्यूमेंट का उल्लेख करते हुए, विकास वैभव ने कहा कि यह दस्तावेज़ बिहार के दीर्घकालिक विकास के लिए एक व्यापक और क्रियाशील रोडमैप प्रस्तुत करता है। उन्होंने प्रतिभागियों से इस दस्तावेज़ का अध्ययन करने और इसके क्रियान्वयन में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
आईपीएस विकास वैभव ने कहा कि वर्तमान में बिहार प्रति व्यक्ति मासिक आय के मामले में देश के सबसे निचले राज्यों में बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य विकसित राज्यों के साथ अंतर को पाटने के लिए बिहार को आने वाले वर्षों में लगभग 15 प्रतिशत की सतत वार्षिक वृद्धि दर प्राप्त करनी होगी। उन्होंने इस चुनौती की गंभीरता को स्वीकार करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक प्रयास और सही दृष्टिकोण के माध्यम से यह लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने आगे बताया कि लेट्स इंस्पायर बिहार अभियान का विस्तार निरंतर बढ़ रहा है, और इसके अंतर्गत न केवल बिहार के विभिन्न शहरों में बल्कि देश के प्रमुख शहरों में भी सफलतापूर्वक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। हाल ही में बेंगलुरु, हैदराबाद और नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रमों में अत्यधिक सहभागिता देखने को मिली, जिसने इस अभियान की राष्ट्रीय उपस्थिति को और अधिक सुदृढ़ किया है। सामाजिक विभाजनों के विषय पर बात करते हुए, विकास वैभव ने जाति के मुद्दे पर स्पष्ट रूप से अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्राचीन बिहार में जाति तो थी, परंतु आज जिस प्रकार का कठोर और विभाजनकारी जातिवाद देखने को मिलता है, वह उस समय समाज की पहचान नहीं था। उन्होंने कहा कि ऐसे विभाजन सामाजिक प्रगति में बाधा उत्पन्न करते हैं और इन्हें समाप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे जाति, पंथ, धर्म, नस्ल, रंग और लिंग जैसे विभाजनों से ऊपर उठकर बिहार के विकास के लिए एकजुट हों।
आईपीएस विकास वैभव ने इतिहास से उदाहरण देते हुए उन्होंने चाणक्य का उल्लेख किया। जिन्होंने नेतृत्व चयन को जातिगत सीमाओं तक सीमित नहीं रखा, और नंद वंश के उदय का भी उल्लेख किया, जो एक अत्यधिक जाति-विभाजित समाज में संभव नहीं होता। उन्होंने वैशाली गणराज्य का भी संदर्भ दिया, जहाँ नेतृत्व का चयन जन्म आधारित पहचान के बजाय योग्यता और जन-स्वीकृति के आधार पर होता था।
अपने प्रशासनिक करियर के दौरान अपने अनुभव साझा करते हुए, विकास वैभव ने बगहा और रोहतास जैसे क्षेत्रों में अपने कार्यकाल के दौरान हुए परिवर्तन का उल्लेख किया, जब वे वहाँ पुलिस अधीक्षक के रूप में पदस्थापित थे। उन्होंने बताया कि बगहा, जिसे कभी “मिनी चंबल” कहा जाता था और जिसे ब्रिटिश शासन के दौरान “अपराध की विश्वविद्यालय” तक कहा गया था, वहाँ एक उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिला, जब लोगों को उनकी समृद्ध विरासत और गौरवशाली पूर्वजों की याद दिलाई गई। इसी प्रकार, रोहतास, जो कभी माओवादी गतिविधियों से प्रभावित था, वहाँ भी उल्लेखनीय सुधार हुआ, जिसमें ऐतिहासिक स्थलों जैसे रोहतासगढ़ किले को माओवादी प्रभाव से मुक्त कराया जाना शामिल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये परिवर्तन केवल पुलिसिंग के माध्यम से नहीं, बल्कि लोगों की सोच में बदलाव और सामूहिक गौरव की पुनर्स्थापना के माध्यम से संभव हो सके।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की एकता का दार्शनिक आधार वेदांत दर्शन में निहित है, जो एकत्व और परस्पर संबंध की भावना को प्रतिपादित करता है। उन्होंने सुझाव दिया कि यही दार्शनिक आधार एक समरस और प्रगतिशील बिहार के निर्माण में मार्गदर्शक होना चाहिए। लेट्स इंस्पायर बिहार अभियान के आरम्भ का वर्णन करते हुए, विकास वैभव ने उस निर्णायक क्षण को याद किया जब केवल तीन व्यक्तियों ने बिहार के भविष्य के प्रति आशा व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि वही क्षण एक ऐसे आंदोलन का बीज बना, जो आज लाखों लोगों को जोड़ने वाला जन-आंदोलन बन चुका है। विकास वैभव के आह्वान पर, लगभग 5,000 लोगों से खचाखच भरी सभा ने खड़े होकर बिहार के सांस्कृतिक पुनर्जागरण एवं इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा स्टार्टअप हब बनाने का सामूहिक संकल्प लिया। उपस्थित लोगों ने विकास वैभव के साथ निम्नलिखित संकल्प को दोहराया:
“मैं संकल्प लेता हूँ कि बिहार के उज्ज्वलतम भविष्य के निर्माण के लिए हर संभव निस्वार्थ अंशदान समर्पित करूँगा तथा स्वयं अपने चरित्र, आचरण एवं व्यवहार से अपने यशस्वी पूर्वजों की भांति एक प्रेरणाश्रोत बनूँगा. विकसित भारत में विकसित बिहार के निर्माण के लिए जाती, संप्रदाय, लिंगभेद और विचारधाराओं के मतभेदों से ऊपर उठकर सभी को बिहार में सांस्कृतिक पुनर्जागरण तथा शिक्षा एवं उधामिता की क्रान्ति लाने के निमित्त प्रेरित करूँगा. मैं बिहार की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत में समाहित प्रेरणा का प्रसार करूँगा.”