{"_id":"69f32089eb159a20b802502e","slug":"sultanganj-encounter-ramdhani-yadav-killed-eo-krishna-bhushan-murder-gangwar-bihar-crime-news-2026-04-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bihar: ईओ की हत्या का मुख्य आरोपी एनकाउंटर में ढेर, पुलिस पर की थी फायरिंग, जांच में खुलेंगे कई बड़े राज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bihar: ईओ की हत्या का मुख्य आरोपी एनकाउंटर में ढेर, पुलिस पर की थी फायरिंग, जांच में खुलेंगे कई बड़े राज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: Ashutosh Pratap Singh
Updated Thu, 30 Apr 2026 02:58 PM IST
विज्ञापन
सार
सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में घुसकर सभापति पर हमला और ईओ कृष्ण भूषण की हत्या के मुख्य आरोपी रामधनी यादव को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। गैंग के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद उसके ठिकाने का पता चला था।
मौके पर मौजूद पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
विस्तार
सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में घुसकर सभापति को गोली मारने और कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) कृष्ण भूषण की हत्या करने के बाद फरार चल रहा मुख्य आरोपी रामधनी यादव आखिरकार पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। बुधवार की अहले सुबह पुलिस ने उसे घेर लिया, जिसके बाद हुई फायरिंग में रामधनी यादव ढेर हो गया।
पुलिस मुठभेड़ में मारा गया आरोपी
पुलिस के अनुसार, गैंग के अन्य अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद रामधनी यादव के ठिकाने की जानकारी मिली। बुधवार सुबह पुलिस टीम ने उसे घेराबंदी कर पकड़ने की कोशिश की, लेकिन रामधनी ने पुलिस को देखते ही फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी फायरिंग की, जिसमें रामधनी यादव को गोली लगी और उसकी मौत हो गई।
ईओ कृष्ण भूषण की हत्या से जुड़ा था मामला
मधुबनी के रहने वाले कृष्ण भूषण सुल्तानगंज में कार्यपालक पदाधिकारी के रूप में तैनात थे। बताया जा रहा है कि उन्होंने गंगा घाट पर चल रहे अवैध धंधों को बंद करवाने की सख्त कार्रवाई शुरू कर दी थी, जिससे रामधनी यादव को भारी नुकसान हो रहा था। सूत्रों के अनुसार, सुल्तानगंज घाट से होने वाली अवैध कमाई को लेकर रामधनी यादव की कनबूच्चा यादव और राजकुमार गुड्डू के साथ सीधी टक्कर चल रही थी। रामधनी के दुश्मन रंजीत यादव और पूजा यादव को इस स्थिति से फायदा मिल रहा था। कनबूच्चा यादव इलाके का बड़ा माफिया माना जाता है और उसका नाम पुलिस के जिले के टॉप-10 अपराधियों में शामिल है।
राजनीतिक कनेक्शन भी आए सामने
कनबूच्चा यादव की पत्नी दयावती देवी पहले नगर परिषद की अध्यक्ष रह चुकी हैं। बाद में नीलम देवी ने अविश्वास प्रस्ताव लाकर दयावती देवी को पद से हटाया और खुद अध्यक्ष बन गईं। इस पूरे मामले में स्थानीय राजनीति और आपराधिक गठजोड़ की भी भूमिका सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि वर्ष 2023 में भी रामधनी यादव पर गोलीबारी हुई थी, जिसमें राजकुमार का नाम सामने आया था। तब से ही इन गुटों के बीच दुश्मनी और बढ़ गई थी।
ये भी पढ़ें- कार्यपालक पदाधिकारी के पार्थिव शरीर को देखकर रो पड़ी पत्नी, राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
वर्चस्व की लड़ाई में गई ईओ की जान
प्राथमिक जांच में यह सामने आया है कि ईओ कृष्ण भूषण की हत्या रामधनी यादव और कनबूच्चा यादव के बीच वर्चस्व की लड़ाई का परिणाम हो सकती है। ईओ द्वारा अवैध वसूली पर सख्ती भी इस हत्या का एक बड़ा कारण मानी जा रही है। इसके अलावा सूरत बंदोबस्ती को लेकर भी दो गुटों के बीच विवाद चल रहा था और बंदोबस्ती में पिछड़ने के कारण इस घटना को अंजाम देने की बात भी सामने आ रही है। घटना के बाद सुल्तानगंज को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीआईडी की भी एंट्री हो गई है, जिससे यह मामला और हाई प्रोफाइल बन गया है। पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है।
Trending Videos
पुलिस मुठभेड़ में मारा गया आरोपी
पुलिस के अनुसार, गैंग के अन्य अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद रामधनी यादव के ठिकाने की जानकारी मिली। बुधवार सुबह पुलिस टीम ने उसे घेराबंदी कर पकड़ने की कोशिश की, लेकिन रामधनी ने पुलिस को देखते ही फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी फायरिंग की, जिसमें रामधनी यादव को गोली लगी और उसकी मौत हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
ईओ कृष्ण भूषण की हत्या से जुड़ा था मामला
मधुबनी के रहने वाले कृष्ण भूषण सुल्तानगंज में कार्यपालक पदाधिकारी के रूप में तैनात थे। बताया जा रहा है कि उन्होंने गंगा घाट पर चल रहे अवैध धंधों को बंद करवाने की सख्त कार्रवाई शुरू कर दी थी, जिससे रामधनी यादव को भारी नुकसान हो रहा था। सूत्रों के अनुसार, सुल्तानगंज घाट से होने वाली अवैध कमाई को लेकर रामधनी यादव की कनबूच्चा यादव और राजकुमार गुड्डू के साथ सीधी टक्कर चल रही थी। रामधनी के दुश्मन रंजीत यादव और पूजा यादव को इस स्थिति से फायदा मिल रहा था। कनबूच्चा यादव इलाके का बड़ा माफिया माना जाता है और उसका नाम पुलिस के जिले के टॉप-10 अपराधियों में शामिल है।
राजनीतिक कनेक्शन भी आए सामने
कनबूच्चा यादव की पत्नी दयावती देवी पहले नगर परिषद की अध्यक्ष रह चुकी हैं। बाद में नीलम देवी ने अविश्वास प्रस्ताव लाकर दयावती देवी को पद से हटाया और खुद अध्यक्ष बन गईं। इस पूरे मामले में स्थानीय राजनीति और आपराधिक गठजोड़ की भी भूमिका सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि वर्ष 2023 में भी रामधनी यादव पर गोलीबारी हुई थी, जिसमें राजकुमार का नाम सामने आया था। तब से ही इन गुटों के बीच दुश्मनी और बढ़ गई थी।
ये भी पढ़ें- कार्यपालक पदाधिकारी के पार्थिव शरीर को देखकर रो पड़ी पत्नी, राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
वर्चस्व की लड़ाई में गई ईओ की जान
प्राथमिक जांच में यह सामने आया है कि ईओ कृष्ण भूषण की हत्या रामधनी यादव और कनबूच्चा यादव के बीच वर्चस्व की लड़ाई का परिणाम हो सकती है। ईओ द्वारा अवैध वसूली पर सख्ती भी इस हत्या का एक बड़ा कारण मानी जा रही है। इसके अलावा सूरत बंदोबस्ती को लेकर भी दो गुटों के बीच विवाद चल रहा था और बंदोबस्ती में पिछड़ने के कारण इस घटना को अंजाम देने की बात भी सामने आ रही है। घटना के बाद सुल्तानगंज को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीआईडी की भी एंट्री हो गई है, जिससे यह मामला और हाई प्रोफाइल बन गया है। पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है।
