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Bihar News: SC-ST केस का डर या दबाव की साजिश? 18 साल के युवक की आत्महत्या से मचा हड़कंप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णिया
Published by: पूर्णिया ब्यूरो
Updated Fri, 13 Mar 2026 01:01 PM IST
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सार
पूर्णिया जिले के गुलाबबाग जीरो माइल इलाके में 18 साल के युवक मोहम्मद याकिब ने अपने घर में फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि होली से एक दिन पहले हुए विवाद के बाद दूसरे पक्ष ने 9 मार्च को याकिब समेत 10 लोगों पर एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया था।
घटनास्थल पर मामले की जांच पड़ताल करते पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पूर्णिया जिले से एक दुखद और परेशान करने वाली घटना सामने आई है। यहां महज 18 साल के एक युवक ने कानूनी कार्रवाई और सामाजिक बदनामी के डर से आत्महत्या कर ली। यह घटना सदर थाना क्षेत्र के गुलाबबाग जीरो माइल इलाके की है। मृतक की पहचान गुलाबबाग जीरो माइल निवासी मोहम्मद याकिब के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि गुरुवार दोपहर उसने अपने ही घर में फंदे से झूलकर जान दे दी।
होली से पहले हुई कहासुनी से शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार इस घटना की जड़ें होली से एक दिन पहले हुई एक मामूली कहासुनी से जुड़ी हैं। बताया जाता है कि जब याकिब घर लौट रहा था, तभी दूसरे पक्ष के कुछ लोगों से उसकी बहस हो गई। देखते ही देखते यह बहस झड़प में बदल गई। इस घटना के बाद 9 मार्च को दूसरे पक्ष ने याकिब समेत 10 लोगों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करा दिया।
केस के बाद मानसिक दबाव का आरोप
याकिब की मौत के बाद उसके परिजनों और स्थानीय लोगों में काफी गुस्सा देखा गया। परिजनों का आरोप है कि केस दर्ज होने के बाद से ही विपक्षी पक्ष याकिब पर लगातार मानसिक दबाव बना रहा था। परिवार का कहना है कि केस वापस लेने के बदले उनसे बड़ी रकम की मांग की जा रही थी। जेल जाने के डर और इस आर्थिक दबाव के कारण 18 साल के युवक ने यह कदम उठा लिया।
लोगों ने पोस्टमार्टम के लिए शव ले जाने से रोका
आत्महत्या की खबर फैलते ही इलाके में आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए। गुस्साए लोगों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने से रोक दिया और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। एसडीपीओ ने खुद वहां पहुंचकर परिजनों को निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया। इसके बाद लोगों को समझाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
पुलिस ने शुरू की जांच
मामले में थाना अध्यक्ष अजय कुमार ने बताया कि दूसरे पक्ष ने मेडिकल रिपोर्ट के साथ शिकायत दर्ज कराई थी। उसी के आधार पर कानून के अनुसार केस दर्ज किया गया था। पुलिस के अनुसार पहली नजर में यह मामला गिरफ्तारी के डर से की गई आत्महत्या का लगता है। फिलहाल पुलिस अवैध वसूली और मानसिक प्रताड़ना के आरोपों सहित सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कर रही है।
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होली से पहले हुई कहासुनी से शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार इस घटना की जड़ें होली से एक दिन पहले हुई एक मामूली कहासुनी से जुड़ी हैं। बताया जाता है कि जब याकिब घर लौट रहा था, तभी दूसरे पक्ष के कुछ लोगों से उसकी बहस हो गई। देखते ही देखते यह बहस झड़प में बदल गई। इस घटना के बाद 9 मार्च को दूसरे पक्ष ने याकिब समेत 10 लोगों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करा दिया।
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केस के बाद मानसिक दबाव का आरोप
याकिब की मौत के बाद उसके परिजनों और स्थानीय लोगों में काफी गुस्सा देखा गया। परिजनों का आरोप है कि केस दर्ज होने के बाद से ही विपक्षी पक्ष याकिब पर लगातार मानसिक दबाव बना रहा था। परिवार का कहना है कि केस वापस लेने के बदले उनसे बड़ी रकम की मांग की जा रही थी। जेल जाने के डर और इस आर्थिक दबाव के कारण 18 साल के युवक ने यह कदम उठा लिया।
लोगों ने पोस्टमार्टम के लिए शव ले जाने से रोका
आत्महत्या की खबर फैलते ही इलाके में आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए। गुस्साए लोगों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने से रोक दिया और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। एसडीपीओ ने खुद वहां पहुंचकर परिजनों को निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया। इसके बाद लोगों को समझाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
पुलिस ने शुरू की जांच
मामले में थाना अध्यक्ष अजय कुमार ने बताया कि दूसरे पक्ष ने मेडिकल रिपोर्ट के साथ शिकायत दर्ज कराई थी। उसी के आधार पर कानून के अनुसार केस दर्ज किया गया था। पुलिस के अनुसार पहली नजर में यह मामला गिरफ्तारी के डर से की गई आत्महत्या का लगता है। फिलहाल पुलिस अवैध वसूली और मानसिक प्रताड़ना के आरोपों सहित सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कर रही है।