Bihar: बिजली चोरी के केस में मृत व्यक्ति बना आरोपी, एफआईआर पर उठे सवाल; विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर
सारण के गड़खा में बिजली चोरी के मामले में विभाग ने कई वर्ष पहले मृत हो चुके देवरतन मांझी के नाम एफआईआर दर्ज कर दी। ग्रामीणों ने कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि विभाग ने कनेक्शन पुराने नाम पर होने और नामांतरण नहीं होने की दलील दी।
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सारण जिले के गड़खा थाना क्षेत्र में बिजली चोरी के एक मामले में दर्ज की गई प्राथमिकी सवालों के घेरे में आ गई है। उत्तर बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एनबीपीडीसीएल) की ओर से दर्ज कराए गए इस मामले में जिस व्यक्ति को आरोपित बनाया गया है, उसकी कई वर्ष पहले ही मृत्यु हो चुकी है। घटना सामने आने के बाद विभाग की कार्रवाई और उपभोक्ता सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, एनबीपीडीसीएल के निर्देश पर शनिवार रात गड़खा प्रखंड की रामपुर पंचायत के गलिमापुर रामपुर गांव में बिजली चोरी के खिलाफ विशेष छापेमारी अभियान चलाया गया। छापेमारी के दौरान विभाग ने एक घर में मीटर बाइपास कर अवैध रूप से बिजली उपयोग किए जाने का दावा किया। इस संबंध में जूनियर अभियंता (जेई) राम मनोहर शर्मा के आवेदन पर गड़खा थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई।
प्राथमिकी में देवरतन मांझी को आरोपित बनाते हुए बताया गया कि अवैध रूप से बिजली उपयोग किए जाने से विभाग को ₹19,852 की राजस्व क्षति हुई। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि देवरतन मांझी का कई वर्ष पहले ही निधन हो चुका है। ऐसे में मृत व्यक्ति के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज होने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि छापेमारी के दौरान संबंधित उपभोक्ता और बिजली कनेक्शन का समुचित सत्यापन किया गया होता, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
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वहीं, विभाग का पक्ष अलग है। जूनियर अभियंता राम मनोहर शर्मा ने बताया कि संबंधित बिजली कनेक्शन अब भी देवरतन मांझी के नाम पर दर्ज है। विभागीय नियमों के अनुसार, जिस व्यक्ति के नाम पर बिजली कनेक्शन दर्ज रहता है, उसी के नाम पर बिजली चोरी की प्राथमिकी दर्ज की जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले में निर्धारित जुर्माना जमा करा दिया गया है।
विभाग का कहना है कि यदि किसी उपभोक्ता की मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिजनों को नियमानुसार बिजली विभाग को सूचना देकर कनेक्शन का नामांतरण कराना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर विभागीय अभिलेखों में पूर्व उपभोक्ता का नाम ही दर्ज रहता है और कार्रवाई भी उसी आधार पर की जाती है।
इधर, पुलिस का कहना है कि प्राथमिकी के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के दौरान यदि किसी प्रकार की तथ्यात्मक त्रुटि या प्रक्रियागत चूक सामने आती है, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह मामला बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और उपभोक्ताओं के अभिलेखों को समय पर अद्यतन रखने की व्यवस्था पर चर्चा का विषय बना हुआ है।