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Bihar News: एक बार फिर खुली शिक्षा व्यवस्था की पोल, बिना केमिस्ट्री टीचर के 126 छात्राओं ने दी इंटर की परीक्षा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,सारण
Published by: सारण ब्यूरो
Updated Tue, 24 Feb 2026 11:48 AM IST
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सार
Bihar News: सारण के छपरा स्थित राजकीय बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 126 छात्राओं ने बिना रसायन विज्ञान शिक्षक के इंटरमीडिएट परीक्षा दी। वर्ष 2023 में शिक्षक का स्थानांतरण होने के बाद रिक्त पद नहीं भरा गया। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब जिलाधिकारी ने स्कूल का दौरा किया।
स्कूल की जांच करते जिलाधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सारण के छपरा शहर स्थित राजकीय बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से शिक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां इंटरमीडिएट विज्ञान संकाय की 126 छात्राओं ने रसायन शास्त्र के नियमित शिक्षक के बिना ही दो वर्षों की पढ़ाई पूरी कर बोर्ड परीक्षा दी। अब सभी छात्राएं अपने परिणाम का इंतजार कर रही हैं।
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स्कलू में 2023 से नहीं हैं रसायन विज्ञान के शिक्षक
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 में विद्यालय में कार्यरत रसायन विज्ञान के एकमात्र शिक्षक का स्थानांतरण हो गया था। इसके बाद न तो नए शिक्षक की नियुक्ति की गई और न ही किसी अन्य विद्यालय से प्रतिनियुक्ति की व्यवस्था की गई। इसके बावजूद सत्र 2023–2025 की छात्राओं ने हार नहीं मानी और स्वअध्ययन के बल पर तैयारी जारी रखी।
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खुद से की तैयारी
विद्यालय की छात्राओं ने नोट्स, गाइड, ऑनलाइन सामग्री और समूह अध्ययन का सहारा लिया। कई छात्राओं ने निजी ट्यूशन पढ़ी, जबकि कुछ ने सीनियर छात्राओं और अन्य विद्यालयों के शिक्षकों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। रसायन विज्ञान एक प्रयोगात्मक विषय होने के कारण बिना नियमित शिक्षक और सुव्यवस्थित प्रयोगशाला के पढ़ाई करना बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। फिर भी सभी छात्राओं ने परीक्षा में शामिल होकर अपने जज्बे और आत्मविश्वास का परिचय दिया। इस दौरान विद्यालय परिसर में फर्नीचर की जर्जर स्थिति पर भी जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई। उन्होंने प्रधानाध्यापक को सभी फर्नीचर की मरम्मत, पेंटिंग और साफ-सफाई कराने का निर्देश दिया, ताकि छात्राओं को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
जिलाधिकारी के दौरे के दौरान खुला मामला
यह गंभीर शैक्षणिक कमी उस समय उजागर हुई जब सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने मैट्रिक परीक्षा निरीक्षण के दौरान विद्यालय का दौरा किया। निरीक्षण में रसायन एवं भौतिकी प्रयोगशालाएं अव्यवस्थित मिलीं। कई उपकरण धूल जमे हुए थे और प्रयोगशालाएं नियमित रूप से संचालित नहीं हो रही थीं। कंप्यूटर लैब की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई।
जिलाधिकारी ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को दिया आदेश
प्राचार्य से पूछताछ में यह तथ्य सामने आया कि इंटर स्तरीय विद्यालय में रसायन विज्ञान का एक भी शिक्षक कार्यरत नहीं है। इस पर जिलाधिकारी ने तत्काल जिला शिक्षा पदाधिकारी निशांत किरण को आवश्यक कार्रवाई कर शिक्षक की प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने प्रयोगशालाओं की साफ-सफाई, उपकरणों की व्यवस्थित रख-रखाव और छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण प्रयोगात्मक शिक्षा उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
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1950 में हुई थी स्कूल की स्थापना
जानकारी के अनुसार, इस राजकीय बालिका प्लस टू विद्यालय की स्थापना 1950 के दशक में लड़कियों की उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। समय के साथ छात्राओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई, लेकिन आधारभूत संरचना और शिक्षकों की नियुक्ति उसी अनुपात में नहीं हो सकी। नियमित बहाली में विलंब, स्थानांतरण के बाद रिक्त पदों को भरने में देरी और बजट की सीमाएं विद्यालय की गिरती व्यवस्था का प्रमुख कारण है।