Bihar News: सदर अस्पताल बना दलालों का अड्डा, गरीब मरीज को बरगलाकर इलाज के नाम पर वसूले 3.5 लाख
Bihar News: सिवान सदर अस्पताल में दलालों की सक्रियता का एक और मामला सामने आया है, जिसमें एक घायल महिला को बेहतर इलाज का झांसा देकर पटना के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया और इलाज के नाम पर करीब 3.5 लाख रुपये वसूल लिए गए। परिजनों ने जिलाधिकारी समेत स्वास्थ्य अधिकारियों को आवेदन देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है।
विस्तार
बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के गृह जिले सिवान के प्रमंडलीय मुख्यालय छपरा स्थित सदर अस्पताल में एक बार फिर दलालों की सक्रियता सामने आई है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों की परेशानियां बढ़ गई हैं। ताजा मामला सारण जिले के बनियापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत पिठौरी गांव के शक्करवार टोला का बताया जा रहा है। यहां स्वर्गीय गणेश राय की पत्नी शांति देवी जमीनी विवाद में हुई मारपीट के दौरान घायल हो गई थीं। विगत 20 फरवरी को परिजन उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन इलाज शुरू होने से पहले ही कथित दलाल सक्रिय हो गए।
परिवार को दलालों ने डराया
पीड़ित परिवार का आरोप है कि दलालों ने मरीज की स्थिति गंभीर बताते हुए कहा कि यहां समुचित इलाज संभव नहीं है, इसलिए उन्हें पटना रेफर कर दिया गया है। घबराए परिजन उनके झांसे में आ गए और पटना ले जाने को तैयार हो गए। पटना पहुंचने के बाद मरीज को गीतांजलि नामक एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के नाम पर करीब 3 लाख 50 हजार रुपये वसूल लिए गए।
पीड़ित परिवार ने प्रशासन से की कार्रावाई की मांग
पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें बरगलाकर निजी अस्पताल ले जाया गया और आर्थिक शोषण किया गया। इस मामले में परिजनों ने सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव, सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी तथा अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. कृष्ण मोहन दुबे को आवेदन देकर जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
दलाल डीएम और एसपी के आदेश को दिखा रहे ठेंगा
मालूम हो कि कुछ दिन पूर्व ही जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव और एसएसपी विनीत कुमार ने सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण कर निजी एंबुलेंस संचालकों पर कार्रवाई की थी। दलालों के प्रवेश पर रोक लगाने, 24 घंटे निगरानी व्यवस्था लागू करने और अस्पताल गेट पर पुलिस चेक पोस्ट बनाने के निर्देश भी दिए गए थे।
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पुलिस की तैनाती के बावजूद नहीं सुधरे हालात
इसके बावजूद दलाल खुलेआम सक्रिय होकर गरीब मरीजों को निजी जांच केंद्रों और अस्पतालों की ओर मोड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल परिसर में दलालों का नेटवर्क इतना मजबूत है कि प्रखंड से आने वाली एंबुलेंस तक को रास्ते में प्रभावित कर लिया जाता है। पुलिस की तैनाती के बावजूद हालात में सुधार नहीं होना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
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