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गुलाबी पगड़ी नहीं, ये मान है हमारा...2000 लड़कियों ने यूं सेलिब्रेट किया इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे
रूबी सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 12 Oct 2018 12:12 PM IST
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गुलाबी पगड़ी नहीं, ये मान है हमारा। सुरक्षा और समान अधिकार का प्रतीक है। 2015 से इस शपथ के साथ सिटी ब्यूटीफुल की गर्ल्स ने पिंक टर्बन यानी गुलाबी पगड़ी को पहनना शुरू किया। आज शहर की लड़कियों की यह शान बन गई है। इस शान के साथ वीरवार को दो हजार गर्ल्स ने पिंक टर्बन पहनकर इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे सेलीब्रेट किया।
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ये गर्ल्स गवर्नमेंट गर्ल्स मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-18 की पहली से लेकर 12वीं कक्षा की छात्रा थीं। यह सेलीब्रेशन स्कूल की अरुणिमा पीस क्लब ने युवसत्ता एनजीओ की ओर से की गई। जिसमें छात्राओं ने गुलाबी पगड़ी पहनकर महिलाओं की सुरक्षा और आदर सम्मान व प्यार का संदेश दिया।
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चंडीगढ़ में पहली बार लड़कियों ने शुरू किया गुलाबी पगड़ी पहनने का सिलसिला
देश में चंडीगढ़ की लड़कियों ने गुलाबी पगड़ी को पहनने की पहल की। यह पहल युवसत्ता एनजीओ की ओर से 2015 में की गई। एनजीओ के संयोजक प्रमोद शर्मा ने बताया कि देश में पगड़ी को सिर्फ पुरुष ही सम्मान और जिम्मेदारी के तौर पर पहनते हैं। ऐसे में लड़कियों को यह पगड़ी पहनाने का मकसद था कि वे अपनी सुरक्षा के लिए पुरुषों का सहारा नहीं, बल्कि वे स्वयं की सुरक्षा की जिम्मेदारी लें। शहर की लड़कियां गुलाबी पगड़ी इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे से लेकर नेशनल गर्ल चाइल्ड एवं इंटरनेशनल यूथ पीस फेस्टिवल में पहनती है। यही नहीं, इस बार लड़कियों ने गुलाबी पगड़ी पहनकर समान अधिकार का संदेश विदेशी छात्राओं को भी दिया। इस पहल में लड़के भी आगे आए हैं।
देश में चंडीगढ़ की लड़कियों ने गुलाबी पगड़ी को पहनने की पहल की। यह पहल युवसत्ता एनजीओ की ओर से 2015 में की गई। एनजीओ के संयोजक प्रमोद शर्मा ने बताया कि देश में पगड़ी को सिर्फ पुरुष ही सम्मान और जिम्मेदारी के तौर पर पहनते हैं। ऐसे में लड़कियों को यह पगड़ी पहनाने का मकसद था कि वे अपनी सुरक्षा के लिए पुरुषों का सहारा नहीं, बल्कि वे स्वयं की सुरक्षा की जिम्मेदारी लें। शहर की लड़कियां गुलाबी पगड़ी इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे से लेकर नेशनल गर्ल चाइल्ड एवं इंटरनेशनल यूथ पीस फेस्टिवल में पहनती है। यही नहीं, इस बार लड़कियों ने गुलाबी पगड़ी पहनकर समान अधिकार का संदेश विदेशी छात्राओं को भी दिया। इस पहल में लड़के भी आगे आए हैं।
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स्कूल के पीस क्लब का नाम अरुणिमा के नाम पर रखा
स्कूल प्रिंसिपल राज बाला ने बताया कि उन्होंने लड़कियों की रोल मॉडल माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली अपंग महिला पद्मश्री अरुणिमा सिन्हा के नाम पर अपने स्कूल के पीस क्लब का नाम रखा है। अरुणिमा एक राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबाल खिलाड़ी थीं, जिन्हें 2011 में कुछ लुटेरों ने विरोध करने पर चलती ट्रेन से धक्का दे दिया था। नतीजतन, उनके एक पैर को घुटने के नीचे से काटना पड़ा था। लेकिन यह अपंगता उनके हौसले को पस्त नहीं कर सकी। उन्होंने पूरे साहस के साथ छह चोटियों पर चढ़ाई कर राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
स्कूल प्रिंसिपल राज बाला ने बताया कि उन्होंने लड़कियों की रोल मॉडल माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली अपंग महिला पद्मश्री अरुणिमा सिन्हा के नाम पर अपने स्कूल के पीस क्लब का नाम रखा है। अरुणिमा एक राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबाल खिलाड़ी थीं, जिन्हें 2011 में कुछ लुटेरों ने विरोध करने पर चलती ट्रेन से धक्का दे दिया था। नतीजतन, उनके एक पैर को घुटने के नीचे से काटना पड़ा था। लेकिन यह अपंगता उनके हौसले को पस्त नहीं कर सकी। उन्होंने पूरे साहस के साथ छह चोटियों पर चढ़ाई कर राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
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अब बदलाव लाने का समय : रीटा कोहली
पिंक टर्बन कैंपेन को अपना सहयोग देते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की एडवोकेट रीटा कोहली ने कहा कि महिलाओं ने सदियों तक समाज में मिलने वाले उचित अधिकारों और हैसियत को पाने के लिए इंतजार किया है। अब समय बदलाव लाने का है। परेशानी में घिरीं लड़कियों और महिलाओं के लिए अब अन्य लड़कियां व महिलाएं खड़ी हो रही हैं। यह समाज के लिए एक अच्छा संदेश है। वहीं स्कूल के शिक्षक रमेश ने सभी मेहमानों का स्वागत किया।
पिंक टर्बन कैंपेन को अपना सहयोग देते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की एडवोकेट रीटा कोहली ने कहा कि महिलाओं ने सदियों तक समाज में मिलने वाले उचित अधिकारों और हैसियत को पाने के लिए इंतजार किया है। अब समय बदलाव लाने का है। परेशानी में घिरीं लड़कियों और महिलाओं के लिए अब अन्य लड़कियां व महिलाएं खड़ी हो रही हैं। यह समाज के लिए एक अच्छा संदेश है। वहीं स्कूल के शिक्षक रमेश ने सभी मेहमानों का स्वागत किया।