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CG: लाल किले से गूंजा जनजातीय गौरव का स्वर, CM साय बोले- जनजातीय समाज दुनिया को सिखा सकता है प्रकृति संग विकास

अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: Lalit Kumar Singh Updated Mon, 25 May 2026 04:31 PM IST
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सार

CG News: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से उनके निवास पर मुलाकात की। इससे पहले राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम आयोजित हुआ।

Speaking on Tribal Pride from Red Fort CM Sai said tribal community can teach world how to achieve development
दिल्ली में राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम आयोजित हुआ। यह आयोजन भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर किया गया। देशभर से हजारों जनजातीय प्रतिनिधि और समुदाय इसमें शामिल हुए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व दिया।



दिल्ली सीएम रेखा से मिले मुख्यमंत्री साय
वहीं आज छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा  गुप्ता से उनके निवास पर मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच जनहित, सुशासन, शहरी विकास, सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय जैसे विषयों पर चर्चा हुई। 
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दोनों मुख्यमंत्रियों ने विकास पर की चर्चा
मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ में चल रहे विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी साझा की।  दोनों मुख्यमंत्रियों ने देश के विकास में राज्यों की सक्रिय भूमिका और आपसी सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। इस अवसर पर विभिन्न समसामयिक विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
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'आयोजन सांस्कृतिक चेतना का राष्ट्रीय संदेश बना'
बता दें कि लाल किले पर यह भव्य आयोजन जनजाति सुरक्षा मंच एवं जनजाति जागृति समिति द्वारा किया गया। लाल किले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में यह आयोजन सांस्कृतिक चेतना का राष्ट्रीय संदेश बना। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय समाज भारत की सांस्कृतिक आत्मा है। यह समाज सदियों से प्रकृति और मानव जीवन में संतुलन बनाए हुए है। 

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नई दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता से की मुलाकात - फोटो : Amar ujala digital

'प्रदेश की पहचान समृद्ध जनजातीय संस्कृति से जुड़ी'
उन्होंने बताया कि जनजातीय जीवन दर्शन मानवता को टिकाऊ विकास का मार्ग दिखा सकता है। छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति से जुड़ी है। राज्य में 42 प्रकार की जनजातियां निवास करती हैं। लगभग 44 फीसदी क्षेत्र वनाच्छादित है। स्वतंत्रता आंदोलन से राष्ट्र निर्माण तक जनजातीय समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। बिरसा मुंडा और वीर नारायण सिंह जैसे महानायकों ने बलिदान का इतिहास रचा।

'जनजातीय संस्कृति के संरक्षण को प्राथमिकता'
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि उनकी सरकार जनजातीय संस्कृति के संरक्षण को प्राथमिकता दे रही है। नया रायपुर में आदि परब, बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन होते हैं। ये कार्यक्रम जनजातीय प्रतिभा और पहचान को राष्ट्रीय मंच देते हैं। छत्तीसगढ़ सरकार गोंडी, हल्बी और सादरी जैसी भाषाओं में प्रारंभिक शिक्षा दे रही है। इससे नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहेगी। बस्तर से सरगुजा तक देवगुड़ी और मातागुड़ी का संरक्षण भी तेजी से हो रहा है।

'मूल परंपराएं छोड़ने वालों को बाहर किया'
मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज के संवैधानिक अधिकारों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि यह भावना प्रबल हो रही है कि मूल परंपराएं छोड़ने वालों को अनुसूचित जनजाति सूची से बाहर किया जाए। इससे आरक्षण और सरकारी सुविधाओं का वास्तविक लाभ मूल समुदायों को मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मांग किसी समुदाय के विरोध में नहीं है। यह जनजातीय समाज की अस्मिता और अधिकारों की रक्षा से जुड़ी है। इसे लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में उठाया जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं। उन्होंने पारंपरिक नृत्य और लोक संगीत से भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत दिखाई। लाल किला मैदान में दिनभर मांदर, ढोल और पारंपरिक लोकधुनों की गूंज रही। यह समागम जनजातीय समाज की एकता और स्वाभिमान का प्रतीक बना। यह आयोजन सांस्कृतिक पुनर्जागरण का सशक्त राष्ट्रीय घोष बनकर उभरा।

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