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राज और नीति : दतिया उपचुनाव से सिंधिया ने बनाई दूरी, घोर विरोधी कुशवाहा बनाए गए प्रभारी

Fri, 17 Jul 2026 06:26 AM IST
Suresh Tiwari सुरेश तिवारी
Updated Fri, 17 Jul 2026 06:26 AM IST
सार

दतिया उपचुनाव में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की निष्क्रियता चर्चा का विषय बनी हुई है। भाजपा ने ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाहा को चुनाव प्रभारी बनाया है, जिन्हें सिंधिया का विरोधी माना जाता है। ऐसे में राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं कि सिंधिया की गैरमौजूदगी से भाजपा को फायदा होगा या नुकसान।

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Politics and Policy: Scindia distances himself from Datia by-election, arch rival Kushwaha appointed in-charge
राज और नीति : मप्र में सियासी और प्रशासनिक हलचल बताता कॉलम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सियासी गलियारों में इस बात की बड़ी चर्चा है कि केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया दतिया उपचुनाव में क्यों सक्रिय दिखाई नहीं दे रहे हैं? भाजपा प्रत्याशी के रूप में जैसे ही आशुतोष तिवारी के नाम की घोषणा हुई थी सोशल मीडिया पर यह खबर चल रही थी कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को दतिया उपचुनाव का प्रभारी बनाया गया है, लेकिन इसकी अधिकृत घोषणा आज तक कहीं दिखाई नहीं दी। इतना ही नहीं न तो स्वयं सिंधिया और न ही उनका कोई समर्थक मंत्री, तिवारी के नामांकन पत्र दाखिल करते समय नजर आया। अब चुनाव प्रभारी की भी घोषणा हो गई है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने ग्वालियर के सांसद भारत सिंह कुशवाहा को दतिया उपचुनाव का प्रभारी बनाया है। कुशवाहा को ग्वालियर चंबल क्षेत्र में सिंधिया का घोर विरोधी माना जाता है। राजनीतिक जानकार आकलन कर रहे हैं कि दतिया में सिंधिया की मौजूदगी नहीं होने से बीजेपी को फायदा होगा या नुकसान?
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10 साल बाद खुला कर्मचारियों की पदोन्नति का रास्ता 
प्रदेश में करीब पांच लाख सरकारी कर्मचारी अधिकारी अब खुश नजर आ रहे हैं। आखिर 10 साल बाद मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव की पहल से उनकी पदोन्नति का रास्ता जो खुला है। रोज हर विभाग में पदोन्नति के आदेश जारी हो रहे हैं और यह क्रम लगातार जारी है। मंत्रालय वल्लभ भवन के गलियारों में यह चर्चा जरूर हो रही है कि जो काम आज हो रहा है यह तो 10 वर्ष पहले भी हो सकता था। हजारों की संख्या में कर्मचारी अधिकारी इस दौरान बिना पदोन्नति के ही रिटायर हो गए। अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन अधिकारी कर्मचारियों की पद प्रतिष्ठा की उपेक्षा तो हुई है, साथ ही उन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ा है। 
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नेशनल पार्क का प्रबंधन प्रभारी के भरोसे
वन विभाग के इतिहास में पहली बार एक साल से पन्ना टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर का पद खाली है। राज्य शासन ने पिछली जुलाई 25 में एक शिकायत के आधार पर 2010 बैच की वन्य प्राणी विशेषज्ञ आईएफएस अधिकारी अंजना सुचिता तिर्की को हटा दिया था। इसके बाद आज तक किसी भी आईएफएस अधिकारी की पूर्णकालिक फील्ड डायरेक्टर की पोस्टिंग यहां नहीं हुई। इसी प्रकार 11 जनवरी 2026 से संजय नेशनल पार्क में फील्ड डायरेक्टर का पद खाली है।  
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जब सीएस ने वन बल प्रमुख की ली क्लास
वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक रिजर्व फॉरेस्ट की जमीन को खुर्द-बुर्द करने के मामले में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने वन बल प्रमुख शुभ रंजन सेन और वर्किंग प्लान अफसर और सर्किल प्रभारी, वन संरक्षक रीवा अनुराग कुमार की जमकर क्लास ली। इस मामले में मुख्य सचिव इस कदर नाराज थे कि उन्होंने सर्किल प्रभारी रीवा कुमार को निलंबित करने तक का कह दिया। बताया जाता है कि इस मौके पर वहां उपस्थित एसीएस अशोक वर्णवाल ने डैमेज कंट्रोल करते हुए कुमार को सस्पेंड होने से बचाया।

अस्वीकरण: यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें। 
 
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