{"_id":"697564591b067c448600f03b","slug":"psychology-grief-is-not-a-problem-how-to-deal-with-it-books-will-tell-you-2026-01-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"मनोविज्ञान: दुख कोई समस्या नहीं है, कैसे निपटना है... किताबें बताएंगी","category":{"title":"Blog","title_hn":"अभिमत","slug":"blog"}}
मनोविज्ञान: दुख कोई समस्या नहीं है, कैसे निपटना है... किताबें बताएंगी
जेन ई ब्रॉडी
Published by: पवन पांडेय
Updated Sun, 25 Jan 2026 06:01 AM IST
विज्ञापन
सार
दुख कोई समस्या नहीं है: दुख कोई बीमारी नहीं है कि उससे दूर भागा जाए। इससे उबरने का तरीका यह है कि न तो इसे छिपाएं और न ही इससे जल्दबाजी में निकलने की कोशिश करें।
दुख कोई समस्या नहीं है
- फोटो : FreePik
विज्ञापन
विस्तार
यों तो हममें से बहुत से लोग मौत के बारे में खुलकर बात कर सकते हैं, पर किसी आत्मीय की मौत के बाद के दुख से समझदारी से निपटने के बारे में हमें अब भी बहुत कुछ सीखना है। दो मनोचिकित्सकों की दो नई किताबों में ऐसी कहानियों और मार्गदर्शन की भरमार है, जो शोक मनाने वालों और उनसे मिलने वाले लोगों, दोनों को दुख से जुड़ी कई आम गलतियों और गलतफहमियों से बचने में मदद कर सकती हैं। दोनों किताबें इस बारे में गलत धारणाओं को ठीक करने की कोशिश करती हैं कि दुख कैसे और कितने समय तक महसूस किया जा सकता है।
एक किताब है मेगन डेविन की इट्स ओके दैट यू आर नॉट ओके, जो उनके प्रिय साथी की 39 साल की उम्र में छुट्टी के दौरान डूबने से दुखद मौत के बाद लिखी गई। दूसरी किताब है जूलिया सैमुअल की ग्रीफ वर्क्स: स्टोरीज ऑफ लाइफ, डेथ एंड सर्वाइविंग, जिसमें बताया गया है कि लोग अलग-अलग तरह के नुकसान से कैसे निपटते हैं। ये किताबें एक बहुत ही अहम संदेश देती हैं। जैसा कि सैमुअल ने कहा, ‘दुख में कुछ भी सही या गलत नहीं होता। यह जिस भी रूप में आता है, हमें उसे स्वीकार करना होगा।’
वहीं डेविन का कहना है कि ‘यदि हम दुख की असली प्रकृति को समझना शुरू कर दें, तो हम एक ज्यादा मददगार, स्नेहिल व सहयोगी वातावरण बना सकते हैं।’ दोनों लेखक इस बात पर जोर देते हैं कि दुख कोई ऐसी समस्या नहीं है, जिसे हल किया जाए या सुलझाया जाए। बल्कि, यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसे संभाला जाना चाहिए, चाहे वह किसी भी रूप में हो और इसमें जितना भी समय लगे, उसे लगाना चाहिए। जैसे हम सब दूसरों से अपने-अपने अनोखे तरीकों से प्यार करते हैं, वैसे ही हम उनके जाने का दुख भी अलग तरीकों से मनाते हैं, जिन्हें किसी एक सांचे में या यहां तक कि अलग-अलग सांचों में भी फिट नहीं किया जा सकता।
डेविन का कहना है कि दुख से उबरने के लिए पेशेवरों और दूसरे लोगों द्वारा दी जाने वाली ज्यादातर मदद गलत तरीका अपनाती है, क्योंकि वे शोक मनाने वालों को दर्द से उबरने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। जबकि, दुख से उबरने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि दर्द को महसूस होने दें। न तो उसे छिपाएं और न ही उससे जल्दबाजी में निकलने की कोशिश करें। जब भी संभव हो, दुख कम करने के लिए ऐसी चीजों में शामिल हों, जो मदद करती हैं और उनसे बचें, जो मदद नहीं करतीं। - ©The New York Times 2026
Trending Videos
एक किताब है मेगन डेविन की इट्स ओके दैट यू आर नॉट ओके, जो उनके प्रिय साथी की 39 साल की उम्र में छुट्टी के दौरान डूबने से दुखद मौत के बाद लिखी गई। दूसरी किताब है जूलिया सैमुअल की ग्रीफ वर्क्स: स्टोरीज ऑफ लाइफ, डेथ एंड सर्वाइविंग, जिसमें बताया गया है कि लोग अलग-अलग तरह के नुकसान से कैसे निपटते हैं। ये किताबें एक बहुत ही अहम संदेश देती हैं। जैसा कि सैमुअल ने कहा, ‘दुख में कुछ भी सही या गलत नहीं होता। यह जिस भी रूप में आता है, हमें उसे स्वीकार करना होगा।’
विज्ञापन
विज्ञापन
वहीं डेविन का कहना है कि ‘यदि हम दुख की असली प्रकृति को समझना शुरू कर दें, तो हम एक ज्यादा मददगार, स्नेहिल व सहयोगी वातावरण बना सकते हैं।’ दोनों लेखक इस बात पर जोर देते हैं कि दुख कोई ऐसी समस्या नहीं है, जिसे हल किया जाए या सुलझाया जाए। बल्कि, यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसे संभाला जाना चाहिए, चाहे वह किसी भी रूप में हो और इसमें जितना भी समय लगे, उसे लगाना चाहिए। जैसे हम सब दूसरों से अपने-अपने अनोखे तरीकों से प्यार करते हैं, वैसे ही हम उनके जाने का दुख भी अलग तरीकों से मनाते हैं, जिन्हें किसी एक सांचे में या यहां तक कि अलग-अलग सांचों में भी फिट नहीं किया जा सकता।
डेविन का कहना है कि दुख से उबरने के लिए पेशेवरों और दूसरे लोगों द्वारा दी जाने वाली ज्यादातर मदद गलत तरीका अपनाती है, क्योंकि वे शोक मनाने वालों को दर्द से उबरने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। जबकि, दुख से उबरने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि दर्द को महसूस होने दें। न तो उसे छिपाएं और न ही उससे जल्दबाजी में निकलने की कोशिश करें। जब भी संभव हो, दुख कम करने के लिए ऐसी चीजों में शामिल हों, जो मदद करती हैं और उनसे बचें, जो मदद नहीं करतीं। - ©The New York Times 2026