{"_id":"6974209bbf4453560c01ca4a","slug":"science-and-life-new-paths-open-through-imagination-and-knowledge-2026-01-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीवन धारा: विचारों से खुलते हैं नए रास्ते; कल्पना और ज्ञान से जन्म लेती हैं नई संभावनाएं","category":{"title":"Blog","title_hn":"अभिमत","slug":"blog"}}
जीवन धारा: विचारों से खुलते हैं नए रास्ते; कल्पना और ज्ञान से जन्म लेती हैं नई संभावनाएं
हेनरिक रोहरर
Published by: शिवम गर्ग
Updated Sat, 24 Jan 2026 07:01 AM IST
विज्ञापन
सार
जब कल्पना और ज्ञान साथ-साथ चलते हैं, तभी नई संभावनाएं जन्म लेती हैं। कभी-कभी एक छोटा-सा विचार या असफलता नया रास्ता दिखा देती है। अपने ज्ञान पर विश्वास होना अच्छी बात है, पर यह मान लेना कि हम सब कुछ जानते हैं, पतन की शुरुआत है।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : freepik
विज्ञापन
विस्तार
विज्ञान का अर्थ केवल प्रयोगशालाओं, समीकरणों या उपकरणों तक सीमित नहीं है, विज्ञान वास्तव में जीवन को समझने की एक गहरी मानवीय यात्रा है। विज्ञान लगातार एक पतली रस्सी पर चलने जैसा है, अंधविश्वास व जिज्ञासा के बीच, विशेषज्ञता और रचनात्मकता के बीच, पूर्वाग्रह और खुलेपन के बीच। यही संतुलन विज्ञान को जीवंत बनाता है।
Trending Videos
जीवन भी कुछ ऐसा ही है। हम अनुभवों के सहारे आगे बढ़ते हैं, परंतु जरूरी नहीं कि हर अनुभव अंतिम सत्य ही हो। विज्ञान हमें सिखाता है कि आज जो सत्य है, हो सकता है कल वह सवालों के घेरे में आ जाए। इस अनिश्चितता को स्वीकार करना ही वैज्ञानिक सोच की पहली शर्त है। जब हम अपने विश्वास को ही अंतिम मान लेते हैं, तब विकास रुक जाता है। विज्ञान में विशेषज्ञता जरूरी है, पर केवल वही एकमात्र शर्त नहीं है। रचनात्मकता के बिना खोज असंभव है। इतिहास गवाह है कि महान वैज्ञानिक उपलब्धियां अक्सर उन लोगों ने कीं, जिन्होंने अपनी सीमाओं से बाहर जाकर सोचने का साहस दिखाया। जब कल्पना और ज्ञान साथ-साथ चलते हैं, तभी नई संभावनाएं जन्म लेती हैं। पूर्वाग्रह विज्ञान का सबसे बड़ा शत्रु है।
विज्ञापन
विज्ञापन
खुलेपन का अर्थ है, गलत होने की संभावना को स्वीकार करना। जब हम दूसरों को सुनने, समझने और उनसे सीखने के लिए खुले रहते हैं, तभी आगे बढ़ते हैं। कभी-कभी एक छोटा-सा विचार या एक असफलता हमें नया रास्ता दिखा देती है। महत्वाकांक्षा विज्ञान को आगे बढ़ाती है, लेकिन वह यदि संवेदनहीन हो जाए, तो विनाशकारी भी बन सकती है। इसलिए विज्ञान को केवल उत्साह से नहीं, बल्कि गहरे समर्पण और नैतिक जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना चाहिए। अपने ज्ञान पर विश्वास होना अच्छी बात है, लेकिन यह मान लेना कि हम सब कुछ जानते हैं, पतन की शुरुआत है।
विज्ञान और जीवन, दोनों ही भूत, वर्तमान और भविष्य के बीच चलने वाले निरंतर संवाद हैं। यह ऐसी यात्रा है, जहां निश्चितताएं कम हैं, पर संभावनाएं अनंत हैं। और इन्हीं संभावनाओं में सृजन है, विकास है और भविष्य की आशा छिपी हुई है।