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मुद्दा: जो हुआ है और जो होना बाकी है; स्टार्टअप्स के लिए अब भी बहुत कुछ करने की जरूरत

डॉ. पी एस वोहरा Published by: शिवम गर्ग Updated Sat, 24 Jan 2026 06:55 AM IST
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सार

स्टार्टअप इंडिया मिशन से देश में स्टार्टअप्स की संख्या दो लाख से ऊपर पहुंच गई है, जो पहले एक हजार से भी कम थी, पर अब भी काफी कुछ किया जाना बाकी है।  

Startup India Growth: Over 2 Lakh Startups, But Technology & Health Sectors Lag Behind
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik
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विस्तार
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भारत में स्टार्टअप का दौर अपने एक दशक के इतिहास को पूरा कर चुका है और अब अगले पायदान में प्रवेश करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज वैश्विक स्तर पर स्टार्टअप के माध्यम से औद्योगिक विकास और समाज के आर्थिक विस्तार में शीर्ष पांच देशों में भारत की हैसियत एक ऐसी सच्चाई है, जो भारत के युवाओं को उद्यमिता के क्षेत्र की तरफ लगातार आकर्षित कर रही है। पिछले एक दशक में भारत ने कई ऐसे युवाओं को स्टार्टअप के जरिये अपनी पहचान बनाते देखा है, जो किसी बड़ी पृष्ठभूमि से नहीं थे और न ही उन्हें किसी औद्योगिक घराने का संरक्षण प्राप्त था। वे सब उद्यमिता के जोखिम को उठाने की क्षमता के साथ आगे बढ़े और नवाचारों के माध्यम से उन्हें आर्थिक सक्षमता मिली।

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स्टार्टअप इंडिया मिशन की घोषणा के बाद से अब तक भारत में स्टार्टअप्स की संख्या दो लाख से ऊपर पहुंच गई है, जो उससे पहले एक हजार से भी कम थी। हालांकि, भारतीय स्टार्टअप्स की आलोचना भी की जाती है कि वे मात्र ई-कॉमर्स के साथ ही जुड़कर रह गए और तकनीकी क्षेत्र में अमेरिका व चीन जैसे देशों की तरह नहीं बन पाए। आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं कि भारत में 30 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप खुदरा क्षेत्र से ही जुड़े हुए हैं। तकनीक क्षेत्र में भारत में अमेरिका और चीन की तुलना में केवल एक-चौथाई स्टार्टअप हैं। वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत की हिस्सेदारी मात्र पांच फीसदी है, जबकि अमेरिका और चीन में यह भारत से दोगुनी से भी अधिक है।
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कृषि और बीमा क्षेत्रों में स्टार्टअप व यूनिकॉर्न का आकर्षण बहुत कम है, जबकि चीन, अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देश इन क्षेत्रों में स्टार्टअप्स के जरिये अनुसंधान और विकास को तेजी से बढ़ा रहे हैं। भारत में नवाचार अधिकतर तात्कालिक मुनाफे पर केंद्रित है, न कि ऐसे दीर्घकालिक नेतृत्व पर, जो आने वाले 20–30 वर्षों तक देश की आबादी को सतत लाभ पहुंचा सके। भारत में आज 100 से ज्यादा यूनिकॉर्न हैं, जिनका बाजार मूल्यांकन एक अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक होता है। आज इनका कुल मूल्य करीब 70 अरब डॉलर है, पर चिंता यह है कि शीर्ष के पांच यूनिकॉर्न की हिस्सेदारी भारतीय स्टार्टअप के बाजार में 40 फीसदी के आसपास है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत के शीर्ष पांच स्टार्टअप्स ने कुल एक अरब डॉलर से ऊपर का वित्तीय निवेश जुटाया, जो बाकी स्टार्टअप्स को हुई फंडिंग से 11 फीसदी अधिक है। यह संकेत है कि स्टार्टअप्स के जरिये औद्योगिक विकास का सपना भी उन्हीं चुनौतियों से जूझ सकता है, जिनका सामना आज भारत का विनिर्माण क्षेत्र कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में ही भारतीय पूंजी बाजार, बीएसई और एनएससी पर सूचीबद्ध होने के लिए स्टार्टअप्स की लंबी कतार देखी गई। एक रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, स्टॉक मार्केट पर सूचीबद्ध हुए कुल स्टार्टअप ने संयुक्त रूप से करीब 40,000 करोड़ रुपये भारतीय पूंजी बाजार से जुटाए हैं, जो 2024 से एक-तिहाई ज्यादा है।

एक नकारात्मक पक्ष यह भी है कि भारतीय स्टार्टअप्स के जरिये अब तक बहुत अधिक रोजगार उपलब्ध नहीं करवाए गए हैं, क्योंकि 30 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप खुदरा व्यवसाय में संलग्न हैं। इस कारण इनके माध्यम से मिलने वाला रोजगार गिग श्रमिकों के रूप में ही बहुतायत में सामने आया है। एक अन्य पक्ष यह भी है कि भारतीय स्टार्टअप्स में ज्यादातर प्रतिनिधित्व शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों से निकले युवाओं का है। यह दिखाता है कि अन्य संस्थानों में उद्यमिता शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना जरूरी है, वरना छोटे शहरों व गांवों के युवा प्रयास तो करेंगे, पर सफलता कम मिलने से निराशा बढ़ सकती है। edit@amarujala.com

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