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किताबें और जिंदगी: 12 साल की उम्र में उन्होंने दोस्तोवस्की को पढ़ डाला, साहित्यिक बिरादरी का धुरंधर है ये युवा

Sun, 26 Jul 2026 09:10 AM IST
ज्योति भास्कर एलेक्स वाडुकुल (द न्यूयॉर्क टाइम्स)
एलेक्स वाडुकुल (द न्यूयॉर्क टाइम्स) Published by: ज्योति भास्कर Updated Sun, 26 Jul 2026 09:10 AM IST
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सार
मेंडेल उमिनर एक यहूदी युवक हैं और उनकी उम्र सिर्फ 31 वर्ष है। मैनहट्टन में किराये के एक अपार्टमेंट में वह अपनी दस हजार किताबों के साथ रहते हैं। दीवारों के सहारे यहूदी साहित्य के ऊंचे-ऊंचे ढेर लगे हैं, फिल्म-आलोचना और ओपेरा के इतिहास की किताबें भरी पड़ी हैं, नाटकों और कविताओं के ढेर ने खिड़की को रोक रखा है और इन सबके बीच वह गद्दा बिछाकर सोते हैं। लेकिन, फिर कुछ ऐसा हुआ कि पड़ोसियों की शिकायत पर उन्हें अपार्टमेंट छोड़ना पड़ा।
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Books and Life read Dostoevsky at the age of 12 Jewish Young litterateur famous in literary community
यहूदी विद्वान और लेखक मेंडेल उमिनर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट / एजेंसी

विस्तार

मेंडेल उमिनर नाम के एक युवा यहूदी विद्वान और लेखक के लिए किताबें ही जिंदगी है। इसलिए, जब उन्हें एक साल पहले मैनहट्टन के अपर ईस्ट साइड में सेंट्रल पार्क से एक ब्लॉक दूर एक स्टूडियो अपार्टमेंट मिला, तो वह अपनी सभी 10,000 किताबें अपने साथ ले आए। इसके बाद, कुछ समय के लिए, उस 600 वर्ग फुट के ज्ञान के मंदिर में उनकी जिंदगी बहुत शानदार गुजरी। दीवारों के सहारे यहूदी साहित्य के ऊंचे-ऊंचे ढेर लगे थे, फिल्म-आलोचना और ओपेरा के इतिहास की किताबें भरी पड़ी थीं, नाटकों और कविताओं के ढेर ने खिड़की को रोक रखा था, और इन सबके बीच उमिनर जमीन पर गद्दा बिछा कर सोते थे। दोपहर के आसपास जागने के बाद, वह अपना समय आरामकुर्सी पर बिताते थे, जहां वह चैम ग्रेड जैसे यिडिश लेखकों और एडमंड विल्सन जैसे आलोचकों की रचनाओं को बड़े चाव से पढ़ते और शहर की हलचल के बीच अपने मन को समृद्ध करते।



31 साल के उमिनर ने कहा, ‘मैं जानकारी पाने के लिए हमेशा पढ़ता रहता हूं। मेरे पास जितनी भी किताबें हैं, वे सब मेरे काम की हैं। मेरी लाइब्रेरी ही मेरी जिंदगी की गाइड है।’ उमिनर फ्रीलांस हिब्रू अनुवादक के तौर पर काम करते थे और अपनी नई साहित्यिक पत्रिका नोटारिकॉन रिव्यू के मुख्यालय के तौर पर इस अपार्टमेंट का इस्तेमाल करते थे। यहां होने वाली पार्टियों की न्यूयॉर्क के साहित्यिक जगत के उभरते लेखकों के बीच काफी चर्चा थी। संघर्ष कर रहे लेखक किताबों के ऊंचे-नीचे ढेर के बीच बैठकर विदेशी मामलों और यूनानी साहित्य पर बहस करते थे। हालांकि, पिछली सर्दियों में उन्हें बिल्डिंग मैनेजमेंट से एक नोटिस मिला, जिसमें लिखा था, ‘आप किरायेदारी के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। आप घर में बहुत सारी किताबें जमा कर रहे हैं; और आग लगने का खतरा पैदा कर रहे हैं।’ चेतावनी पर ध्यान न देने के बाद, उन्हें घर से निकालने की कार्रवाई शुरू हो गई। फिर, उन्होंने कोर्ट का रुख किया।


पिछले महीने की एक दोपहर, उमिनर किताबों की झुकी हुई इमारतों के बीच खड़े होकर अपनी बेतरतीब जन्नत का मजा ले रहे थे। उन्होंने बड़े प्यार से अब्राहम रीसेन की कविताओं की एक किताब उठाई; रीसेन एक यिडिश लेखक थे जिन्हें उमिनर बहुत पसंद करते थे। उन्होंने कहा, ‘मुझे पता है कि कुछ लोगों को मेरी लाइब्रेरी बहुत बड़ी लग सकती है, लेकिन यह उतनी भी बड़ी नहीं है, जितना लोग सोचते हैं। एक रब्बी के घर में, मेरी जैसी लाइब्रेरी देखकर किसी को हैरानी नहीं होगी। पढ़ना मेरी संस्कृति का हिस्सा है। मुझे लगा था कि मुझे यहां शांति मिल जाएगी, कि मैं यहीं अपनी पत्रिका शुरू करूंगा। पर शायद, मुझे कुछ समय के लिए अपनी लाइब्रेरी बढ़ाना रोकना पड़े।’

क्राउन हाइट्स के हसीदिक इलाके में पले-बढ़े मेंडेल ने अपने दादा-दादी के साथ यिडिश भाषा में बात करते हुए, चाचाओं की शिक्षाएं सुनते हुए और बैंक्वेट हॉल में ट्रोइका डांस में शामिल होते हुए अपना बचपन बिताया। उनके पिता, इसाक, जो एक धार्मिक रियल एस्टेट ब्रोकर थे, उन्हें तोराह पढ़ाना पसंद करते थे। लेकिन, उस लड़के को तो साहित्य में दिलचस्पी थी। 12 साल की उम्र में ही वह दोस्तोवस्की की किताबें पढ़ रहे थे। किशोरावस्था में, उमिनर रब्बी बनने की ट्रेनिंग वाले स्कूल (सेमिनरी) गए, जहां उन्होंने तालमुद का अध्ययन किया। पढ़ाई सुबह सात बजे शुरू होती थी और रात में एक बहस पर खत्म होती थी। उन्होंने कहा, ‘मेरे दिन अरामी, हिब्रू और यिडिश भाषाओं में लिखे ग्रंथों को पढ़ने में बीतते थे, और कभी-कभी तो मैं पूरे साल किसी का चेहरा तक नहीं देखता था, पर मैं जिद्दी भी था। मैं हमेशा वही पढ़ता था, जो मैं पढ़ना चाहता था। यहीं पर आप अपनी बात रखते हैं। यहीं पर आप अपनी राय बनाते हैं। यहीं पर आप दुनिया को अपने नजरिये से समझते हैं। अगर मैं कोई राय बनाता हूं और उसके उलट बातें कहने वाली किताबें मौजूद हैं, तो मुझे उन सभी को पढ़ना होगा, ताकि यह जान सकूं कि मेरी राय सही है या नहीं। अगर मुझे यकीन नहीं होता, तो मुझे अपनी राय छोड़ देनी चाहिए।’

अपने 20वें वर्ष की शुरुआत में, जब वह ओविड और रूसो की रचनाओं में डूबने लगे, तो उनकी दोस्ती कुछ लेखकों से हो गई। धर्मगुरु बनने की प्रक्रिया पूरी होने से एक साल पहले, उन्होंने अपने लिए तय किए गए रास्ते को छोड़ दिया। उन्होंने कहा, ‘मुझे एहसास हुआ कि मैं उतना आस्तिक नहीं था, जितना मैं खुद को समझता था। मैं वही करूंगा, जो मैं करना चाहता था, यानी न्यूयॉर्क के आधुनिक, उदारवादी और सांस्कृतिक समाज का हिस्सा बनना। मैं अब मध्ययुगीन धार्मिकता के नशे में नहीं रहना चाहता था।’

 

12 साल की उम्र में उन्होंने दोस्तोवस्की को पढ़ डाला था और तब से वह बस पढ़ ही रहे हैं। न्यूयॉर्क की साहित्यिक बिरादरी में शायद ही कोई हो, जो उन्हें न जानता हो। उनके घर में आयोजित होने वाली युवा साहित्यकारों की बैठकें साहित्य जगत में चर्चा का विषय बनी रहती हैं। उनके प्रशंसक दूर-दूर से बस उनके साथ कुछ घंटे बिताने के लिए आते हैं।


उनकी मां, डीना उमिनर ने कहा कि जब वह छोटा था, तभी वह बहस करके हमें अपनी बात समझाने की कोशिश करता था। उसे थोड़ी-बहुत जानकारी से कभी संतोष नहीं मिलता था। उमिनर ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी में फिल्म और फिलॉसफी की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया। क्लास के बाहर, उन्होंने टैबलेट मैगजीन में इंटर्नशिप की। 27 साल की उम्र में ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद, वह पेरिस की एक युवती से मिले। वह उसके शहर गए। उमिनर ने कहा, ‘किताबों को लेकर मेरे जुनून के चलते उसने मुझे अपार्टमेंट से निकाल दिया, पर मैं तब तक पेरिस में ही रहा, जब तक मेरा आखिरी डॉलर खर्च नहीं हो गया। वहां बेहतरीन राजनीतिक व साहित्यिक पत्रिकाएं मिलती थीं। पेरिस ने मुझे बदल दिया।'

उन्होंने सीन नदी के किनारे किताबों के स्टॉल पर घंटों बिताए। नूवेल रेव्यू फ्रांसेज और कोनेसेंस देज आर्ट्स जैसी पत्रिकाएं पढ़कर उन्हें अपना मकसद मिल गया। उन्होंने कहा, ‘इन फ्रेंच पत्रिकाओं में लोग ऐसे तर्क देते थे, जो वाकई मायने रखते थे। यहां हमारी ज्यादातर लिखाई इस बारे में होती है कि आपको एक रास्ता चुनना होगा।’ उनमें विवाद को सहजता से लेने, तर्क में सटीकता और ऐतिहासिक समझ का एहसास होता है, जिसकी हमें और ज्यादा जरूरत है। न्यूयॉर्क वापस आकर, उमिनर ने नोटारिकॉन रिव्यू शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने इसमें जिन लेखकों को शामिल किया है, उनमें से कुछ सोशल मीडिया पर उनके पुराने विरोधी रहे हैं। उम्मीद है कि इस साल के आखिर में उसका पहला अंक प्रकाशित हो जाएगा।

आखिरकार कई महीनों तक चली धीमी कानूनी खींचतान के बाद, उमिनर ने वह घर छोड़ने का फैसला कर लिया। गर्मी भरे शुक्रवार के दिन, कुछ दोस्त सामान शिफ्ट करने में मदद करने के लिए आए। उनके एक दोस्त कोस्मा ने कहा, ‘मुझे यह बात समझ आती है कि ब्रुकलिन के एक यहूदी धार्मिक स्कूल (येशिवा) में पढ़े मेंडेल ने अपर ईस्ट साइड आकर अपने लिए एक दुनिया बनाई, और फिर उसी दुनिया ने उसे ठुकरा दिया। आज का न्यूयॉर्क पेशेवर और एक जैसे तौर-तरीकों पर चलता है; वहां जब लोग मेंडेल जैसे किसी व्यक्ति को देखते हैं, तो उन्हें लगता है कि उसमें कुछ तो गड़बड़ है। शहर में अब एक ऐसा माहौल है, जो बौद्धिक सोच और उससे जुड़ी अनोखी आदतों या सनक के खिलाफ है।’

जैसे-जैसे दोस्तों ने लाइब्रेरी हटाई, दीवारें पूरी तरह दिखने लगीं। आखिर में, बक्सों को बाहर खड़ी वैन में ले जाने का समय आ गया। आसमान में अंधेरा छा गया और जोरदार बारिश होने लगी। अपना सामान गाड़ी में रखते हुए वह और उनके दोस्त पूरी तरह भीग गए। वे वापस अपार्टमेंट लौट आए। फिर रात हुई और कमरा रूसी कविताओं से लेकर लेबनान के विदेशी मामलों पर चर्चाओं से गूंजने लगा।
उस रात चर्चा में कोलंबिया से आई इतिहास की एक छात्रा कात्या भी शामिल हुई। वह कहती है, ‘मेंडेल अपने ख्यालों की दुनिया में रहते हैं और वह उसे कहीं भी अपने साथ ले जा सकते हैं।’ वह आगे कहती है, ‘मैंने सुना है कि उन्हें एक बड़ा अपार्टमेंट मिल गया है, तो इसका मतलब है-और ज्यादा किताबें।’

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