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Sanju Samson: धैर्य की आग में तपकर निखरे संजू, टीम से बाहर हुए, लेकिन जब मौका मिला तो लिख दी वापसी की कहानी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: Mayank Tripathi
Updated Sun, 08 Mar 2026 10:01 PM IST
सार
Sanju Samson Comeback Story T20 World Cup 2026: टीम से बाहर होने और आलोचनाओं का सामना करने के बावजूद संजू सैमसन ने धैर्य नहीं खोया और मौके का इंतजार किया। जब टीम को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत पड़ी, तब उन्होंने शानदार पारियों से टी20 विश्व कप में भारत की जीत की राह आसान कर दी और अपनी अहमियत साबित कर दी।
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संजू सैमसन
- फोटो : PTI
क्रिकेट सिर्फ रन, चौके और छक्कों का खेल नहीं है। यह इंतजार, संघर्ष, विश्वास और खुद पर भरोसा बनाए रखने की परीक्षा भी है। कई बार खिलाड़ी मैदान पर नहीं, बल्कि ड्रेसिंग रूम में बैठकर सबसे कठिन मुकाबला लड़ते हैं। संजू सैमसन की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। जहां निराशा, आलोचना और इंतजार के बाद आई एक ऐसी वापसी, जिसने पूरी दुनिया को उनका लोहा मानने पर मजबूर कर दिया।
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संजू सैमसन
- फोटो : IANS
हार मानने की बजाय खेल पर दिया ध्यान
टी20 विश्व कप से ठीक पहले टीम से बाहर होना, न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में बल्ले का खामोश रहना और लगातार उठती आलोचनाओं के बीच कई खिलाड़ी टूट जाते हैं। लेकिन सैमसन ने हार नहीं मानी। उन्होंने शोर नहीं मचाया, बयान नहीं दिए बस चुपचाप अपने खेल पर काम करते रहे और सही मौके का इंतजार करते रहे।
जब टी20 विश्व कप 2026 के दौरान भारतीय बल्लेबाज लड़खड़ाए, तब एक नाम बार-बार चर्चा में आने लगा, संजू सैमसन। और जब उन्हें दोबारा मौका मिला, तो उन्होंने बल्ले से ऐसा जवाब दिया कि आलोचक भी तालियां बजाने को मजबूर हो गए। उनकी वापसी सिर्फ रन बनाने की कहानी नहीं थी, बल्कि यह आत्मविश्वास, संयम और साहस की जीत की कहानी बन गई।
टी20 विश्व कप से ठीक पहले टीम से बाहर होना, न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में बल्ले का खामोश रहना और लगातार उठती आलोचनाओं के बीच कई खिलाड़ी टूट जाते हैं। लेकिन सैमसन ने हार नहीं मानी। उन्होंने शोर नहीं मचाया, बयान नहीं दिए बस चुपचाप अपने खेल पर काम करते रहे और सही मौके का इंतजार करते रहे।
जब टी20 विश्व कप 2026 के दौरान भारतीय बल्लेबाज लड़खड़ाए, तब एक नाम बार-बार चर्चा में आने लगा, संजू सैमसन। और जब उन्हें दोबारा मौका मिला, तो उन्होंने बल्ले से ऐसा जवाब दिया कि आलोचक भी तालियां बजाने को मजबूर हो गए। उनकी वापसी सिर्फ रन बनाने की कहानी नहीं थी, बल्कि यह आत्मविश्वास, संयम और साहस की जीत की कहानी बन गई।
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संजू सैमसन
- फोटो : IANS
ईशान की वापसी के बाद मुश्किल में पड़ गई थी जगह
टी20 विश्व कप से ठीक पहले ईशान किशन की टीम में वापसी ने सैमसन के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी थीं। न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में सैमसन का बल्ला खामोश रहा और इसी कारण टीम मैनेजमेंट ने विश्व कप में ओपनिंग की जिम्मेदारी ईशान किशन और अभिषेक शर्मा को सौंप दी। ऐसा लगने लगा था कि सैमसन के लिए टीम के दरवाजे लगभग बंद हो चुके हैं। लेकिन क्रिकेट में किस्मत कब करवट ले ले, यह कोई नहीं जानता। जैसा कहा जाता है, भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं। सैमसन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।
ये भी पढ़ें: Sanju Samson: सैमसन T20 विश्वकप के सेमीफाइनल-फाइनल में 50+ स्कोर बनाने वाले तीसरे बल्लेबाज, कोहली की बराबरी की
टी20 विश्व कप से ठीक पहले ईशान किशन की टीम में वापसी ने सैमसन के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी थीं। न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में सैमसन का बल्ला खामोश रहा और इसी कारण टीम मैनेजमेंट ने विश्व कप में ओपनिंग की जिम्मेदारी ईशान किशन और अभिषेक शर्मा को सौंप दी। ऐसा लगने लगा था कि सैमसन के लिए टीम के दरवाजे लगभग बंद हो चुके हैं। लेकिन क्रिकेट में किस्मत कब करवट ले ले, यह कोई नहीं जानता। जैसा कहा जाता है, भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं। सैमसन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।
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संजू सैमसन
- फोटो : PTI
जब मौका मिला तो दुनिया देखती रह गई
विश्व कप के पहले मैच में सैमसन बेंच पर बैठे रहे। इसके बाद नामीबिया के खिलाफ ग्रुप स्टेज मुकाबले में उन्हें खेलने का मौका मिला और उन्होंने सिर्फ 8 गेंदों में 22 रन बनाकर अपनी आक्रामक क्षमता की झलक दिखा दी। हालांकि, इसके बाद फिर बदलाव हुआ और वह एक बार फिर प्लेइंग-11 से बाहर हो गए। लेकिन जब भारतीय बल्लेबाजी लड़खड़ाने लगी और टीम को एक स्थिर शुरुआत की जरूरत महसूस हुई, तब टीम मैनेजमेंट ने जिम्बाब्वे के खिलाफ उन्हें फिर मौका दिया। इस मैच में सैमसन ने भले ही 15 गेंदों में 24 रन बनाए, लेकिन अभिषेक शर्मा के साथ मिलकर टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई और यह संकेत दे दिया कि मौका मिला तो वह बड़ा असर छोड़ सकते हैं।
विश्व कप के पहले मैच में सैमसन बेंच पर बैठे रहे। इसके बाद नामीबिया के खिलाफ ग्रुप स्टेज मुकाबले में उन्हें खेलने का मौका मिला और उन्होंने सिर्फ 8 गेंदों में 22 रन बनाकर अपनी आक्रामक क्षमता की झलक दिखा दी। हालांकि, इसके बाद फिर बदलाव हुआ और वह एक बार फिर प्लेइंग-11 से बाहर हो गए। लेकिन जब भारतीय बल्लेबाजी लड़खड़ाने लगी और टीम को एक स्थिर शुरुआत की जरूरत महसूस हुई, तब टीम मैनेजमेंट ने जिम्बाब्वे के खिलाफ उन्हें फिर मौका दिया। इस मैच में सैमसन ने भले ही 15 गेंदों में 24 रन बनाए, लेकिन अभिषेक शर्मा के साथ मिलकर टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई और यह संकेत दे दिया कि मौका मिला तो वह बड़ा असर छोड़ सकते हैं।
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सैमसन को बधाई देते हेटमायर
- फोटो : IANS
वेस्टइंडीज के खिलाफ दिखा असली सैमसन
इसके बाद आया करो-या-मरो का मुकाबला। सामने थी वेस्टइंडीज, वही टीम जिसने 2016 टी20 विश्व कप में भारत को सेमीफाइनल से बाहर किया था। इस बार भी दांव बड़ा था, जो जीतेगा वही सेमीफाइनल में जाएगा। भारत को 196 रन का मुश्किल लक्ष्य मिला। शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम ने जल्दी ही अभिषेक शर्मा और ईशान किशन के विकेट गंवा दिए। स्कोर 41 रन था और दबाव साफ दिखाई दे रहा था। ऐसे में सैमसन ने जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली। उन्होंने पहले सूर्यकुमार यादव, फिर तिलक वर्मा, फिर हार्दिक पांड्या और आखिर में शिवम दुबे के साथ साझेदारियां करते हुए टीम को जीत की राह पर पहुंचा दिया। सैमसन ने 50 गेंदों में 12 चौकों और चार छक्कों की मदद से नाबाद 97 रन बनाए। उनका स्ट्राइक रेट 194 रहा और इसी शानदार पारी के दम पर भारत ने सेमीफाइनल का टिकट हासिल किया।
इसके बाद आया करो-या-मरो का मुकाबला। सामने थी वेस्टइंडीज, वही टीम जिसने 2016 टी20 विश्व कप में भारत को सेमीफाइनल से बाहर किया था। इस बार भी दांव बड़ा था, जो जीतेगा वही सेमीफाइनल में जाएगा। भारत को 196 रन का मुश्किल लक्ष्य मिला। शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम ने जल्दी ही अभिषेक शर्मा और ईशान किशन के विकेट गंवा दिए। स्कोर 41 रन था और दबाव साफ दिखाई दे रहा था। ऐसे में सैमसन ने जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली। उन्होंने पहले सूर्यकुमार यादव, फिर तिलक वर्मा, फिर हार्दिक पांड्या और आखिर में शिवम दुबे के साथ साझेदारियां करते हुए टीम को जीत की राह पर पहुंचा दिया। सैमसन ने 50 गेंदों में 12 चौकों और चार छक्कों की मदद से नाबाद 97 रन बनाए। उनका स्ट्राइक रेट 194 रहा और इसी शानदार पारी के दम पर भारत ने सेमीफाइनल का टिकट हासिल किया।