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Delhi NCR News: जीरो वेस्ट कॉलोनी बनाने पर मिलेगा विकास फंड, लापरवाही पर जुर्माना
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एमसीडी की नई पहल में स्रोत पर कचरा पृथक्करण और स्थानीय प्रसंस्करण अनिवार्य, सात मानकों का 100% पालन करने वाली आरडब्ल्यूए होंगी पुरस्कृत
विनोद डबास
नई दिल्ली। दिल्ली में कचरा पैदा होने से लेकर उसके अंतिम निपटान तक की जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभाने वाली कॉलोनियों और बड़ी हाउसिंग सोसाइटियों को अब एमसीडी प्रोत्साहन राशि देगी। जीरो वेस्ट कॉलोनी घोषित होने वाली आरडब्ल्यूए को स्थानीय विकास कार्यों के लिए हर साल 50 हजार से ढाई लाख रुपये तक का विकास फंड मिलेगा। वहीं, तय मानकों का पालन नहीं करने वाली सोसाइटियों पर निगरानी के साथ जुर्माने की कार्रवाई भी होगी।
एमसीडी ने 2022 से संचालित सहभागिता योजना को नए स्वरूप में लागू करते हुए इसका नाम 'जीरो वेस्ट कॉलोनी इनिशिएटिव' रखा है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब राजधानी की लैंडफिल साइटों पर कचरे का बढ़ता दबाव बड़ी चुनौती बना हुआ है। नई व्यवस्था का उद्देश्य कचरे का स्रोत पर पृथक्करण और अधिकतम प्रसंस्करण कॉलोनी स्तर पर सुनिश्चित करना है।
नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत बल्क वेस्ट जनरेटर की परिभाषा भी स्पष्ट कर दी गई है। 20 हजार वर्गमीटर या अधिक फ्लोर एरिया, प्रतिदिन 40 हजार लीटर या उससे अधिक पानी की खपत अथवा रोजाना 100 किलोग्राम या अधिक कचरा पैदा करने वाले परिसर इस श्रेणी में आएंगे। ऐसे परिसरों को कचरे को चार श्रेणियों में अलग करना और गीले कचरे का परिसर में ही प्रसंस्करण करना अनिवार्य होगा।
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जीरो वेस्ट कॉलोनी का दर्जा पाने के लिए आरडब्ल्यूए को सात मानकों का शत-प्रतिशत पालन करना होगा। इनमें घर-घर से कचरे का पृथक्करण, गीले कचरे की कंपोस्टिंग, बागवानी कचरे का स्थानीय निपटान, सूखे कचरे को अधिकृत रीसाइकलर तक पहुंचाना, ई-कचरे का अधिकृत एजेंसी को सौंपना, निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) मलबे का नियमानुसार निपटान और एमसीडी को भेजे जाने वाले अवशेष कचरे को कुल कचरे के 15 प्रतिशत से कम रखना शामिल है। लक्ष्य यह है कि अधिकतम कचरे का निस्तारण कॉलोनी स्तर पर ही हो और लैंडफिल पर निर्भरता घटे।
घर बढ़े, इनाम भी बढ़ा: जीरो वेस्ट कॉलोनियों को मिलेगा विकास फंड
100 तक घर वाली कॉलोनी को 50 हजार रुपये, 100 से 250 घर वाली कॉलोनी को एक लाख रुपये, 250 से 500 घर वाली कॉलोनी को दो लाख रुपये और 500 से अधिक घरों वाली कॉलोनी को ढाई लाख रुपये सालाना मिलेंगे। यह राशि आरडब्ल्यूए की सिफारिश पर कंपोस्टिंग उपकरण, स्वच्छता ढांचा, पार्कों, गलियों और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं के विकास पर खर्च की जाएगी।
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विनोद डबास
नई दिल्ली। दिल्ली में कचरा पैदा होने से लेकर उसके अंतिम निपटान तक की जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभाने वाली कॉलोनियों और बड़ी हाउसिंग सोसाइटियों को अब एमसीडी प्रोत्साहन राशि देगी। जीरो वेस्ट कॉलोनी घोषित होने वाली आरडब्ल्यूए को स्थानीय विकास कार्यों के लिए हर साल 50 हजार से ढाई लाख रुपये तक का विकास फंड मिलेगा। वहीं, तय मानकों का पालन नहीं करने वाली सोसाइटियों पर निगरानी के साथ जुर्माने की कार्रवाई भी होगी।
एमसीडी ने 2022 से संचालित सहभागिता योजना को नए स्वरूप में लागू करते हुए इसका नाम 'जीरो वेस्ट कॉलोनी इनिशिएटिव' रखा है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब राजधानी की लैंडफिल साइटों पर कचरे का बढ़ता दबाव बड़ी चुनौती बना हुआ है। नई व्यवस्था का उद्देश्य कचरे का स्रोत पर पृथक्करण और अधिकतम प्रसंस्करण कॉलोनी स्तर पर सुनिश्चित करना है।
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नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत बल्क वेस्ट जनरेटर की परिभाषा भी स्पष्ट कर दी गई है। 20 हजार वर्गमीटर या अधिक फ्लोर एरिया, प्रतिदिन 40 हजार लीटर या उससे अधिक पानी की खपत अथवा रोजाना 100 किलोग्राम या अधिक कचरा पैदा करने वाले परिसर इस श्रेणी में आएंगे। ऐसे परिसरों को कचरे को चार श्रेणियों में अलग करना और गीले कचरे का परिसर में ही प्रसंस्करण करना अनिवार्य होगा।
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जीरो वेस्ट कॉलोनी का दर्जा पाने के लिए आरडब्ल्यूए को सात मानकों का शत-प्रतिशत पालन करना होगा। इनमें घर-घर से कचरे का पृथक्करण, गीले कचरे की कंपोस्टिंग, बागवानी कचरे का स्थानीय निपटान, सूखे कचरे को अधिकृत रीसाइकलर तक पहुंचाना, ई-कचरे का अधिकृत एजेंसी को सौंपना, निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) मलबे का नियमानुसार निपटान और एमसीडी को भेजे जाने वाले अवशेष कचरे को कुल कचरे के 15 प्रतिशत से कम रखना शामिल है। लक्ष्य यह है कि अधिकतम कचरे का निस्तारण कॉलोनी स्तर पर ही हो और लैंडफिल पर निर्भरता घटे।
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100 तक घर वाली कॉलोनी को 50 हजार रुपये, 100 से 250 घर वाली कॉलोनी को एक लाख रुपये, 250 से 500 घर वाली कॉलोनी को दो लाख रुपये और 500 से अधिक घरों वाली कॉलोनी को ढाई लाख रुपये सालाना मिलेंगे। यह राशि आरडब्ल्यूए की सिफारिश पर कंपोस्टिंग उपकरण, स्वच्छता ढांचा, पार्कों, गलियों और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं के विकास पर खर्च की जाएगी।