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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Not violence, but the Constitution and non-violence are the solution to every dispute: Mohammad Irfan

हिंसा नहीं, संविधान और अहिंसा ही हर विवाद का समाधान : मोहम्मद इरफान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jul 2026 10:26 PM IST
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दिल्ली की सावड़ा जेजे कॉलोनी के मजदूर मोहम्मद इरफान बोले- लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से असहमति जताना हर नागरिक का अधिकार
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली की सावड़ा जेजे कॉलोनी में रहने वाले 35 वर्षीय मोहम्मद इरफान का मानना है कि किसी भी विवाद या असहमति का समाधान हिंसा नहीं, बल्कि संविधान और अहिंसा के रास्ते से ही संभव है। बिहार के गया जिले के मूल निवासी इरफान पिछले कई वर्षों से दिल्ली में दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना और असहमति जताना अपराध नहीं, बल्कि हर नागरिक का सांविधानिक अधिकार है।

इरफान बताते हैं कि संविधान ने सभी धर्मों, जातियों और वर्गों को समान अधिकार दिए हैं, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में लोग शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। यही उनकी सबसे बड़ी चिंता और असहमति का विषय है। इसी सोच के साथ वह पिछले करीब 15 वर्षों से विभिन्न सामाजिक और नागरिक आंदोलनों से जुड़े रहे हैं।
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अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल रहे इरफान
उन्होंने बताया कि वह अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल रहे। निर्भया आंदोलन में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सके, लेकिन उस घटना ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। उनके अनुसार, ऐसे आंदोलनों ने लोगों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने का महत्वपूर्ण काम किया। इरफान का कहना है कि वह किसी भी प्रकार की हिंसा में विश्वास नहीं रखते। उनके अनुसार, हिंसा समाज में दूरियां बढ़ाती है, जबकि अहिंसा लोगों को जोड़ती है। इसलिए लोकतंत्र में हर विरोध और असहमति शांतिपूर्ण तथा संवैधानिक तरीके से ही व्यक्त की जानी चाहिए।
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भगवान श्रीराम के जीवन से ली करुणा, दया, प्रेम और त्याग की प्रेरणा
वह बताते हैं कि भगवान श्रीराम के जीवन से उन्होंने करुणा, दया, प्रेम और त्याग की प्रेरणा ली है। उनके अनुसार, श्रीराम का जीवन समाज को जोड़ने और मानवता का संदेश देने वाला है। इसलिए समाज में नफरत और हिंसा के बजाय प्रेम, भाईचारा और पारस्परिक सम्मान को बढ़ावा देना जरूरी है। अविवाहित इरफान मेहनत-मजदूरी के साथ सामाजिक और नागरिक मुद्दों पर अपनी जिम्मेदारी निभाने को भी आवश्यक मानते हैं। उनका विश्वास है कि संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और अहिंसा के मार्ग पर चलकर ही समाज में सकारात्मक और स्थायी बदलाव लाया जा सकता है।
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