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Delhi NCR News: संसद सुरक्षा में सेंध की कोशिश की जांच तेज
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दिल्ली पुलिस का दावा-कुछ उपद्रवी संसद परिसर में घुसना चाहते थे, हिंसा और साजिश के एंगल से जांच जारी
पुरुषोत्तम वर्मा
नई दिल्ली। सीजेपी के बैनर तले आयोजित 'चलो संसद' मार्च के दौरान हुई हिंसा, पथराव और संसद की सुरक्षा सीमा में घुसने की कोशिश के मामले में दिल्ली पुलिस ने अलग एफआईआर दर्ज कर जांच तेज कर दी है। पुलिस की शुरुआती जांच और खुफिया इनपुट के आधार पर दावा किया गया है कि प्रदर्शन में शामिल कुछ शरारती तत्व संसद भवन तक पहुंचकर भीतर जाने की मंशा रखते थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मौके पर तैनात कर्मियों से बातचीत में कुछ प्रदर्शनकारियों ने संसद के अंदर जाने की बात कही थी, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं।
विशेष पुलिस आयुक्त स्तर के एक अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में बल प्रयोग के निर्देश नहीं थे, लेकिन संसद की सुरक्षा को देखते हुए हालात बिगड़ने पर सीमित बल प्रयोग और आंसू गैस के गोले छोड़कर भीड़ को तितर-बितर किया गया। पुलिस का कहना है कि मार्च के आयोजकों ने संसद भवन तक पहुंचने के बाद प्रदर्शन की स्पष्ट रूपरेखा नहीं बताई थी।
जांच में यह भी सामने आया है कि प्रदर्शन की आड़ में कुछ आपराधिक प्रवृत्ति के लोग हिंसा फैलाने पहुंचे थे। संदिग्ध और फर्जी सोशल मीडिया हैंडल के जरिए अफवाह फैलाकर माहौल बिगाड़ने की संभावित साजिश की भी जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक छात्रों से जुड़े मामलों में आगे की कार्रवाई अलग से विचाराधीन है, जबकि हिंसा और साजिश में शामिल संदिग्धों के खिलाफ जांच जारी रहेगी।
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नई दिल्ली जिला पुलिस के अनुसार सभी घायल पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों की हालत स्थिर है। विशेष पुलिस आयुक्त अनिल शुक्ला तथा अन्य पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट के मामले में भी रविवार को प्राथमिकी दर्ज कर ली गई।
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पुरुषोत्तम वर्मा
नई दिल्ली। सीजेपी के बैनर तले आयोजित 'चलो संसद' मार्च के दौरान हुई हिंसा, पथराव और संसद की सुरक्षा सीमा में घुसने की कोशिश के मामले में दिल्ली पुलिस ने अलग एफआईआर दर्ज कर जांच तेज कर दी है। पुलिस की शुरुआती जांच और खुफिया इनपुट के आधार पर दावा किया गया है कि प्रदर्शन में शामिल कुछ शरारती तत्व संसद भवन तक पहुंचकर भीतर जाने की मंशा रखते थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मौके पर तैनात कर्मियों से बातचीत में कुछ प्रदर्शनकारियों ने संसद के अंदर जाने की बात कही थी, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं।
विशेष पुलिस आयुक्त स्तर के एक अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में बल प्रयोग के निर्देश नहीं थे, लेकिन संसद की सुरक्षा को देखते हुए हालात बिगड़ने पर सीमित बल प्रयोग और आंसू गैस के गोले छोड़कर भीड़ को तितर-बितर किया गया। पुलिस का कहना है कि मार्च के आयोजकों ने संसद भवन तक पहुंचने के बाद प्रदर्शन की स्पष्ट रूपरेखा नहीं बताई थी।
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जांच में यह भी सामने आया है कि प्रदर्शन की आड़ में कुछ आपराधिक प्रवृत्ति के लोग हिंसा फैलाने पहुंचे थे। संदिग्ध और फर्जी सोशल मीडिया हैंडल के जरिए अफवाह फैलाकर माहौल बिगाड़ने की संभावित साजिश की भी जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक छात्रों से जुड़े मामलों में आगे की कार्रवाई अलग से विचाराधीन है, जबकि हिंसा और साजिश में शामिल संदिग्धों के खिलाफ जांच जारी रहेगी।
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नई दिल्ली जिला पुलिस के अनुसार सभी घायल पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों की हालत स्थिर है। विशेष पुलिस आयुक्त अनिल शुक्ला तथा अन्य पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट के मामले में भी रविवार को प्राथमिकी दर्ज कर ली गई।