{"_id":"6a7763c910e0102646004de4","slug":"allegation-of-lawyer-being-detained-at-police-station-for-an-hour-and-a-half-faridabad-news-c-26-1-fbd1021-76949-2026-08-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: अधिवक्ता को थाने में डेढ़ घंटे तक रोके जाने का आरोप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: अधिवक्ता को थाने में डेढ़ घंटे तक रोके जाने का आरोप
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
निष्पक्ष जांच की मांग, मानवाधिकार आयोग और पुलिस अधिकारियों को भेजी शिकायत
संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। अधिवक्ता को डीसीपी सेंट्रल कार्यालय से थाना सेंट्रल ले जाकर करीब डेढ़ घंटे तक रोके जाने के मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। इस संबंध में पुलिस आयुक्त फरीदाबाद, थाना सेंट्रल के एसएचओ, हरियाणा राज्य मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को लिखित शिकायत भेजी गई है।
डॉ. मोहन तिवारी ने शिकायत में बताया कि अधिवक्ता कुणालकांत शर्मा 5 अगस्त 2026 को अपनी शिकायत के संबंध में दोपहर 12:30 बजे डीसीपी सेंट्रल कार्यालय पहुंचे थे। शिकायत के अनुसार, करीब एक बजे के बाद उन्हें कार्यालय में रोका गया और बाद में थाना सेंट्रल ले जाया गया, जहां उन्हें लगभग डेढ़ घंटे तक बैठाकर रखा गया। आरोप है कि इस दौरान उन्हें यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि उन्हें किस एफआईआर, डीडी/जीडी एंट्री अथवा अन्य वैधानिक आधार पर रोका गया है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि घटना की जानकारी मिलने पर कुछ साथी अधिवक्ता थाना सेंट्रल पहुंचे और पुलिस अधिकारियों से मामले की जानकारी ली। डॉ. तिवारी ने कहा कि घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए डीसीपी सेंट्रल कार्यालय और थाना सेंट्रल की सीसीटीवी फुटेज, डीडी/जीडी रोजनामचा, विजिटर रजिस्टर और अन्य सरकारी रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। उन्होंने इन सभी रिकॉर्ड को तत्काल सुरक्षित रखने की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि अधिवक्ता को किस अधिकारी के निर्देश पर, किस समय और किस वैधानिक आधार पर थाने ले जाया गया तथा उन्हें वहां रोके जाने का वास्तविक कारण क्या था। साथ ही घटना के समय मौजूद पुलिस अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शी अधिवक्ताओं के बयान दर्ज करने तथा उपलब्ध फोटो और वीडियो को भी जांच में शामिल करने की मांग की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। अधिवक्ता को डीसीपी सेंट्रल कार्यालय से थाना सेंट्रल ले जाकर करीब डेढ़ घंटे तक रोके जाने के मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। इस संबंध में पुलिस आयुक्त फरीदाबाद, थाना सेंट्रल के एसएचओ, हरियाणा राज्य मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को लिखित शिकायत भेजी गई है।
डॉ. मोहन तिवारी ने शिकायत में बताया कि अधिवक्ता कुणालकांत शर्मा 5 अगस्त 2026 को अपनी शिकायत के संबंध में दोपहर 12:30 बजे डीसीपी सेंट्रल कार्यालय पहुंचे थे। शिकायत के अनुसार, करीब एक बजे के बाद उन्हें कार्यालय में रोका गया और बाद में थाना सेंट्रल ले जाया गया, जहां उन्हें लगभग डेढ़ घंटे तक बैठाकर रखा गया। आरोप है कि इस दौरान उन्हें यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि उन्हें किस एफआईआर, डीडी/जीडी एंट्री अथवा अन्य वैधानिक आधार पर रोका गया है।
विज्ञापन
शिकायत में यह भी कहा गया है कि घटना की जानकारी मिलने पर कुछ साथी अधिवक्ता थाना सेंट्रल पहुंचे और पुलिस अधिकारियों से मामले की जानकारी ली। डॉ. तिवारी ने कहा कि घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए डीसीपी सेंट्रल कार्यालय और थाना सेंट्रल की सीसीटीवी फुटेज, डीडी/जीडी रोजनामचा, विजिटर रजिस्टर और अन्य सरकारी रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। उन्होंने इन सभी रिकॉर्ड को तत्काल सुरक्षित रखने की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि अधिवक्ता को किस अधिकारी के निर्देश पर, किस समय और किस वैधानिक आधार पर थाने ले जाया गया तथा उन्हें वहां रोके जाने का वास्तविक कारण क्या था। साथ ही घटना के समय मौजूद पुलिस अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शी अधिवक्ताओं के बयान दर्ज करने तथा उपलब्ध फोटो और वीडियो को भी जांच में शामिल करने की मांग की गई है।
विज्ञापन