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Faridabad News: नियमों की अनदेखी पर 70 निजी स्कूलों का एमआईएस पोर्टल बंद
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नए दाखिलों पर भी लगी रोक, निजी विद्यालयों की मनमानी और लापरवाही पर कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिले के निजी विद्यालयों की मनमानी और लापरवाही पर शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। मान्यता के नियमों, बुनियादी ढांचे की कमियों और शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून का पालन न करने वाले जिले के 70 निजी स्कूलों का एमआईएस पोर्टल (स्कूल प्रबंधन सूचना प्रणाली) विभाग ने बंद कर दिया है।
पोर्टल बंद होने के कारण अब विद्यालय किसी भी नए छात्र का दाखिला नहीं कर पाएंगे। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले अन्य स्कूलों के खिलाफ भी यह अभियान आगे जारी रहेगा। शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में इस समय एक हजार से अधिक निजी विद्यालय चल रहे हैं, जिनमें से करीब 30 प्रतिशत स्कूलों के पास स्थायी मान्यता ही नहीं है। इसके अलावा कुछ स्कूल संचालक तो बच्चों का कागजी दाखिला किसी मान्यता प्राप्त स्कूल में कराकर उनकी कक्षाएं आवासीय इमारतों में चला रहे थे।
आरटीई के तहत नहीं दी सीटों की जानकारी
शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी की गई 70 स्कूलों की इस सूची में शहर के कई बड़े और नामचीन स्कूल भी शामिल हैं। इन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई का मुख्य कारण जमीन और भवन के नियमों को पूरा न करना है। कई स्कूल बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के छोटे-छोटे रिहायशी मकानों में अवैध रूप से चलाए जा रहे थे जो कि पूरी तरह गैर-कानूनी है। इसके अलावा कार्रवाई का एक बड़ा आधार यह भी है कि इन स्कूलों ने शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून के तहत आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों का विवरण भी विभाग को उपलब्ध नहीं कराया था।
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जिन स्कूलों के खिलाफ यह सख्त कार्रवाई हुई है, वे अब किसी भी नए छात्र का एडमिशन नहीं ले सकेंगे। वहीं जिन छात्रों ने इन स्कूलों में पहले ही दाखिला ले लिया है, उनके भविष्य और पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए आगे का फैसला सीधे शिक्षा निदेशालय द्वारा किया जाएगा। -बसंत कुमार, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिले के निजी विद्यालयों की मनमानी और लापरवाही पर शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। मान्यता के नियमों, बुनियादी ढांचे की कमियों और शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून का पालन न करने वाले जिले के 70 निजी स्कूलों का एमआईएस पोर्टल (स्कूल प्रबंधन सूचना प्रणाली) विभाग ने बंद कर दिया है।
पोर्टल बंद होने के कारण अब विद्यालय किसी भी नए छात्र का दाखिला नहीं कर पाएंगे। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले अन्य स्कूलों के खिलाफ भी यह अभियान आगे जारी रहेगा। शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में इस समय एक हजार से अधिक निजी विद्यालय चल रहे हैं, जिनमें से करीब 30 प्रतिशत स्कूलों के पास स्थायी मान्यता ही नहीं है। इसके अलावा कुछ स्कूल संचालक तो बच्चों का कागजी दाखिला किसी मान्यता प्राप्त स्कूल में कराकर उनकी कक्षाएं आवासीय इमारतों में चला रहे थे।
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आरटीई के तहत नहीं दी सीटों की जानकारी
शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी की गई 70 स्कूलों की इस सूची में शहर के कई बड़े और नामचीन स्कूल भी शामिल हैं। इन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई का मुख्य कारण जमीन और भवन के नियमों को पूरा न करना है। कई स्कूल बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के छोटे-छोटे रिहायशी मकानों में अवैध रूप से चलाए जा रहे थे जो कि पूरी तरह गैर-कानूनी है। इसके अलावा कार्रवाई का एक बड़ा आधार यह भी है कि इन स्कूलों ने शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून के तहत आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों का विवरण भी विभाग को उपलब्ध नहीं कराया था।
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जिन स्कूलों के खिलाफ यह सख्त कार्रवाई हुई है, वे अब किसी भी नए छात्र का एडमिशन नहीं ले सकेंगे। वहीं जिन छात्रों ने इन स्कूलों में पहले ही दाखिला ले लिया है, उनके भविष्य और पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए आगे का फैसला सीधे शिक्षा निदेशालय द्वारा किया जाएगा। -बसंत कुमार, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी