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Faridabad News: हरित विकास की ओर कदम...ग्रेफ में पर्यावरण अनुकूल विकसित होंगी सड़कें

Sun, 12 Jul 2026 12:26 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jul 2026 12:26 AM IST
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Steps towards green development... Environment-friendly roads to be developed under GRIP.
क्षेत्र की मास्टर सड़कों के डिवाइडर और किनारों के सौंदर्यीकरण के लिए एफएमडीए तैयार कर रहा है डीपीआर
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। ग्रेटर फरीदाबाद के तेजी से फैलते शहरी क्षेत्र को पर्यावरण के अनुकूल विकसित करने की दिशा में फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) ने नई पहल शुरू की है। फरीदाबाद विधानसभा क्षेत्र की मास्टर सड़कों के डिवाइडर और सड़क किनारों के सौंदर्यीकरण तथा हरित विकास के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराई जा रही है।
योजना में पहली बार बायो-स्वेल्स जैसी जल-संवेदनशील शहरी तकनीक को शामिल किया जा रहा है जिससे वर्षा जल का बेहतर प्रबंधन, भूजल रिचार्ज, धूल प्रदूषण में कमी और सड़कों की सौंदर्यात्मक गुणवत्ता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। यह पहल ऐसे समय में शुरू हुई है जब ग्रेटर फरीदाबाद में आबादी और निर्माण गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं तथा हर मानसून में जलभराव और गर्मियों में धूल की समस्या सामने आती है।
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ग्रेटर फरीदाबाद पिछले एक दशक में शहर का सबसे तेजी से विकसित होने वाला इलाका बनकर उभरा है। सेक्टर-75 से 89 तक बड़ी संख्या में समूह आवासीय सोसाइटियां, बिल्डर फ्लोर, व्यावसायिक परिसर और संस्थान विकसित हुए हैं। मास्टर प्लान के तहत यह क्षेत्र भविष्य के शहरी विस्तार का प्रमुख केंद्र माना गया है। स्थानीय स्तर पर अनुमान है कि यहां वर्तमान में तीन से चार लाख लोग रह रहे हैं जबकि आने वाले वर्षों में यह संख्या और बढ़ेगी। बढ़ती आबादी के साथ सड़क, पेयजल, सीवर और ड्रेनेज जैसी आधारभूत सुविधाओं पर दबाव भी बढ़ा है। ऐसे में केवल सड़क निर्माण नहीं बल्कि टिकाऊ और पर्यावरण आधारित अधोसंरचना विकसित करना भी जरूरी माना जा रहा है।
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खाली डिवाइडर अब बनेंगे ग्रीन कॉरिडोर

अभी तक क्षेत्र की अधिकांश मास्टर सड़कों के बीच के डिवाइडर और किनारों पर खाली मिट्टी, झाड़ियां और धूल दिखाई देती हैं। तेज हवा चलने पर यही धूल आसपास की सोसाइटियों और सड़कों तक पहुंचती है। बरसात में कई स्थानों पर पानी जमा होने से यातायात भी प्रभावित होता है। नई योजना के तहत सड़कों के डिवाइडर और वर्जेस को वैज्ञानिक लैंडस्केपिंग के साथ विकसित किया जाएगा। स्थानीय जलवायु के अनुरूप पौधों का चयन, सिंचाई व्यवस्था, रखरखाव और सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखकर डिजाइन तैयार किया जाएगा। इससे सड़कों की दृश्य गुणवत्ता बेहतर होने के साथ पर्यावरणीय लाभ भी मिलने की उम्मीद है।

बायो-स्वेल्स तकनीक है काफी महत्वपूर्ण
इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बायो-स्वेल्स तकनीक है। यह सड़क किनारे बनाई जाने वाली हरित जल निकासी प्रणाली होती है, जिसमें वर्षा का पानी पाइपों से सीधे नालों में भेजने के बजाय मिट्टी और पौधों की परतों से होकर जमीन में रिसता है। इससे जलभराव कम होता है, भूजल रिचार्ज बढ़ता है और प्रदूषक तत्वों का प्राकृतिक फिल्टर भी हो जाता है।



सिर्फ सुंदरता नहीं, जलवायु अनुकूल शहर बनाने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क किनारे हरित पट्टियां केवल सौंदर्यीकरण का माध्यम नहीं होतीं। इनसे धूल नियंत्रण, तापमान में कमी, वर्षा जल प्रबंधन और पैदल यात्रियों के लिए बेहतर वातावरण तैयार होता है। हालांकि ऐसी परियोजनाओं की सफलता पौधों के चयन, नियमित रखरखाव और विभिन्न एजेंसियों के समन्वय पर निर्भर करती है। फरीदाबाद में पहले भी सड़कों के साथ साइकिल ट्रैक और हरित विकास की योजनाओं के दौरान पेड़ों के संरक्षण और डिजाइन को लेकर सवाल उठ चुके हैं। ऐसे में इस परियोजना में पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा।


इस परियोजना के लिए डीपीआर पर काम हो रहा है। इसके बाद जमीनी स्तर पर काम शुरू करवा दिया जाएगा।
- देवेंद्र कुमार, कार्यकारी अभियंता, एफएमडीए
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