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UP: ब्राह्मण ही नहीं, अब जाट-गुर्जर और राजपूत भी सीख रहे वेद मंत्रों का पाठ, संस्कृत में करिअर बनाने को पढ़ाई

राहुल सिंह, अमर उजाला, गाजियाबाद Published by: Akash Dubey Updated Thu, 30 Apr 2026 05:52 AM IST
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सार

संस्कृत अब केवल ऋृषि-मुनियों की भाषा नहीं रही। छात्र इसे रोजगार के रूप में देख रहे हैं। महर्षि दयानंद गुरुकुल में 60 फीसदी गैर-ब्राह्मण छात्र हैं। कई छात्र शिक्षक और प्राध्यापक बन चुके हैं।

Not only Brahmins now Jats Gurjars and Rajputs are also learning to recite Vedic mantras
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik
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विस्तार

संस्कृत के बारे में पहले कहा जाता था कि यह केवल ऋषि-मुनियों और ब्राह्मणों की भाषा है, लेकिन अब आज के दौर में ऐसा नहीं है। परिस्थितियां बदल चुकी हैं। अब छात्र वेद विद्या के साथ संस्कृत को कॅरिअर के तौर पर देख रहे हैं। गाजियाबाद के संस्कृत बोर्ड के कई छात्र यहां से पढ़कर दिल्ली समेत देश के अलग-अलग स्कूलों में संस्कृत के प्रोफेसर व शिक्षक बन चुके हैं। इसके अलावा दूधेश्वर नाथ मंदिर के गुरुकुल में पढ़ने वाले छात्र अमेरिका समेत अन्य देशों में नौकरी कर रहे हैं। वहीं, अधिकतर छात्र प्रोफेसर व शिक्षक बने हैं, जिनमें से एक छात्र जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय सहायक प्रोफेसर के पद पर तैनात होकर देश के होनहार छात्रों को पढ़ा रहे हैं।

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महर्षि दयानंद संस्कृत गुरुकुल में 60 फीसदी हैं गैर ब्राह्मण छात्र
महर्षि दयानंद संस्कृत गुरुकुल महाविद्यालय के प्रधानाचार्य आचार्य दिनेश कुमार शुक्ल ने बताया कि विद्यालय में करीब 120 छात्र पढ़ते हैं, जिनमें से 60 फीसदी ऐसे छात्र हैं जो जाट, गुर्जर, राजपूत समेत अन्य जातियों से हैं। यह सभी बच्चे इस समय स्कूल में वेदों की पढ़ाई करते हैं। कई बच्चे ऐसे हैं, जो बहुत ही अच्छे तरीके से मंत्रों का शुद्ध उच्चारण करते हैं। इसके अलावा संस्कृत, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान समेत अन्य विषयों की पढ़ाई करते हैं। दिनेश कुमार शुक्ल का कहना है कि यह भी छात्र कॅरिअर के तौर पर इन विषयों की पढ़ाई कर रहे हैं, जिसका फलस्वरूप है कि इस वर्ष हुई बोर्ड परीक्षा में विद्यालय का एक भी छात्र फेल नहीं हुआ है।
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दूधेश्वरनाथ गुरुकुल के छात्र अमेरिका समेत पूरे विश्व लहरा चुके परचम
दूधेश्वर वेद विद्यालय संस्थान के प्रधानाचार्य तयोराज उपाध्याय ने बताया कि गुरुकुल के 20 से अधिक छात्र हैं जो संस्कृत में अपना कॅरिअर बना चुके हैं। तीन छात्र हरीओम द्विवेदी, प्रकाश पांडेय और पूजन आचार्य अब अमेरिका में संस्कृत के बल पर ही नौकरी कर रहे हैं, जो वहां बच्चों को पढ़ा रहे हैं। इसके अलावा विनय शुक्ला जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के पद पर तैनात हैं। वहीं, बिहार के गया में शिवम शुक्ला, नवादा में अमन झा और पटना में गौरव मिश्रा सरकारी नौकरी पाकर संस्कृत के अध्यापक बन गए हैं। वहीं, हरियाणा के अंबाला स्थित श्री विद्या वेद गुरुकुल में अर्जुन आचार्य यजुर्वेद व लोकराज भट्ट सामवेद के अध्यापक हैं।

जिस स्कूल में पढ़े, आज उसी के बन गए प्रधानाचार्य
मूल रूप से नेपाल के रहने वाले दूधेश्वर वेद विद्यालय संस्थान के प्रधानाचार्य तयोराज उपाध्याय ने बताया कि वह खुद ही इस विद्यालय के छात्र थे और आज इसी विद्यालय के प्रधानाचार्य बन गए हैं। उन्होंने बताया कि वह वर्ष 2001 में छठी कक्षा में प्रवेश लिया था, जिसके बाद 2008 तक 12वीं कक्षा तक यहीं पढ़ाई की। ग्रेजुएशन व पोस्ट ग्रेजुएशन करने के लिए वह त्रिरूपति के श्री वेंकेटेश्वर वैदिक विश्वविद्यालय में चले गए थे। वहां से 2015 में वापस लौटे और पहले स्कूल में अध्यापक बने और बाद में प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी मिली।

- इस साल 12वीं की पढ़ाई करने के बाद संस्कृत में ही बीए व एमए करूंगा और आगे चलकर संस्कृत का अध्यापक बनूंगा। - प्रिंस राजपूत, छात्र

- संस्कृत और वेद अब सबके लिए जरूरी पढ़ाई है। इसमें बेहतर कॅरिअर का मौका है। मैं भी आगे चलकर प्रोफेसर बनना चाहूंगा। - मुकेश चौधरी, छात्र

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