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Nuh News: सूंध गांव में बंदरों का आतंक, निजात दिलाने की मांग
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एक साल में दो दर्जन से अधिक बच्चे व महिलाएं घायल, एक किशोर की हुई मौत
संवाद न्यूज एजेंसी
तावड़ू। खंड के गांव सूंध में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि पिछले एक वर्ष के दौरान बंदरों के हमलों में दो दर्जन से अधिक बच्चे और महिलाएं घायल हो चुके हैं, जबकि 17 वर्षीय किशोर विक्रम उर्फ विक्की की दर्दनाक मौत भी हो चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों को शिकायत देने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, जिससे गांववासियों में भारी रोष है।
सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं एसडीएम कार्यालय पहुंचीं और बंदरों के बढ़ते आतंक से निजात दिलाने की मांग की। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में करीब 150 से 200 बंदरों का झुंड सुबह से शाम तक गलियों, मकानों की छतों और खेतों में घूमता रहता है। स्कूल जाने वाले बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर अचानक हमला कर देना अब आम बात हो गई है। बंदरों के भय से लोग घरों की छतों पर जाने और अकेले बाहर निकलने से भी कतराने लगे हैं। बंदर घरों में घुसकर खाने-पीने का सामान उठा ले जाते हैं, तोड़फोड़ करते हैं और खेतों में फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि रविवार को भी बंदरों के हमले में कई लोग घायल हुए, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। इसके बावजूद वन विभाग की ओर से केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही बंदरों को पकड़कर अन्य स्थानों पर नहीं छोड़ा गया तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
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सूंध निवासी संगीता ने बताया कि उनके पति सुबह काम पर चले जाते हैं और वह घर में अकेली रहती हैं। बंदर अक्सर उनके घर में घुसकर तोड़फोड़ करते हैं। वहीं लक्ष्मी ने कहा कि उनके पति दिव्यांग हैं और उन्होंने गांव में छोटी परचून की दुकान चला रखी है, लेकिन बंदर दुकान में घुसकर सामान उठा ले जाते हैं और नुकसान पहुंचाते हैं। सुनेहरा देवी ने कहा कि सूंध बड़ा गांव है और यहां बड़ी संख्या में बंदर पूरे दिन आतंक मचाते हैं, ऐसे में प्रशासन को आमजन की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। समस्या से परेशान ग्रामीणों ने सरपंच प्रतिनिधि बीर सिंह के प्रति भी नाराजगी जताई। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से विशेष अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ने और गांव को इस समस्या से राहत दिलाने की मांग की है। इस संबंध में एसडीएम तावड़ू जितेंद्र गर्ग ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आ चुका है। उन्होंने बीडीपीओ, सरपंच और संबंधित विभागों के अधिकारियों को बुलाया है तथा बंदरों को पकड़ने के लिए जल्द टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
तावड़ू। खंड के गांव सूंध में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि पिछले एक वर्ष के दौरान बंदरों के हमलों में दो दर्जन से अधिक बच्चे और महिलाएं घायल हो चुके हैं, जबकि 17 वर्षीय किशोर विक्रम उर्फ विक्की की दर्दनाक मौत भी हो चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों को शिकायत देने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, जिससे गांववासियों में भारी रोष है।
सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं एसडीएम कार्यालय पहुंचीं और बंदरों के बढ़ते आतंक से निजात दिलाने की मांग की। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में करीब 150 से 200 बंदरों का झुंड सुबह से शाम तक गलियों, मकानों की छतों और खेतों में घूमता रहता है। स्कूल जाने वाले बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर अचानक हमला कर देना अब आम बात हो गई है। बंदरों के भय से लोग घरों की छतों पर जाने और अकेले बाहर निकलने से भी कतराने लगे हैं। बंदर घरों में घुसकर खाने-पीने का सामान उठा ले जाते हैं, तोड़फोड़ करते हैं और खेतों में फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
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ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि रविवार को भी बंदरों के हमले में कई लोग घायल हुए, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। इसके बावजूद वन विभाग की ओर से केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही बंदरों को पकड़कर अन्य स्थानों पर नहीं छोड़ा गया तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
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सूंध निवासी संगीता ने बताया कि उनके पति सुबह काम पर चले जाते हैं और वह घर में अकेली रहती हैं। बंदर अक्सर उनके घर में घुसकर तोड़फोड़ करते हैं। वहीं लक्ष्मी ने कहा कि उनके पति दिव्यांग हैं और उन्होंने गांव में छोटी परचून की दुकान चला रखी है, लेकिन बंदर दुकान में घुसकर सामान उठा ले जाते हैं और नुकसान पहुंचाते हैं। सुनेहरा देवी ने कहा कि सूंध बड़ा गांव है और यहां बड़ी संख्या में बंदर पूरे दिन आतंक मचाते हैं, ऐसे में प्रशासन को आमजन की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। समस्या से परेशान ग्रामीणों ने सरपंच प्रतिनिधि बीर सिंह के प्रति भी नाराजगी जताई। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से विशेष अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ने और गांव को इस समस्या से राहत दिलाने की मांग की है। इस संबंध में एसडीएम तावड़ू जितेंद्र गर्ग ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आ चुका है। उन्होंने बीडीपीओ, सरपंच और संबंधित विभागों के अधिकारियों को बुलाया है तथा बंदरों को पकड़ने के लिए जल्द टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।