Success Mindset: हर बार सफलता मिलना जरूरी नहीं, संतुलित अपेक्षाएं रखें और असफलताओं से सीखते हुए आगे बढ़ें
Realistic Expectations: सफलता हमेशा नहीं मिलती, इसलिए हमें संतुलित उम्मीदें रखनी चाहिए। असफलता जीवन का हिस्सा है और इससे निराश होने की बजाय हमें सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Success Mindset: वन में हर व्यक्ति कभी न कभी निराशा का अनुभव करता है, जैसे नौकरी न मिलना, परीक्षा में अच्छा परिणाम न आना या मेहनत के बावजूद सफलता न मिलना। ऐसे समय में मन दुखी और हताश हो जाता है, लेकिन अधिकतर लोग इस भावना से जल्दी बाहर निकलने की कोशिश करते हैं, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार निराशा को दबाने या नजरअंदाज करने के बजाय उसे समझना और स्वीकार करना अधिक सही तरीका है, क्योंकि जब हम अपनी भावनाओं को स्वीकार करते हैं, तो मन हल्का होता है और धीरे-धीरे हम उस स्थिति से बेहतर तरीके से उबर पाते हैं।
ज्यादा उम्मीद बांधने से बचें
निराशा अक्सर हमारी उम्मीदों और वास्तविकता के बीच की दूरी से पैदा होती है। जब हम किसी परिणाम की कल्पना पहले से कर लेते हैं, तो उससे भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं। यदि परिणाम उम्मीद के अनुसार नहीं आता, तो हमें केवल अवसर का नुकसान नहीं होता, बल्कि उस भविष्य को लेकर भी दुख होता है, जिसे हमने अपने मन में पहले ही जी लिया था। इसलिए किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय या परिणाम का इंतजार करते समय अत्यधिक उम्मीदें बांधने से बचें।
सफलता के दबाव को करें संतुलित
जब कोई व्यक्ति लगातार अच्छा काम करता है या सफल होता है, तो लोग उससे और ज्यादा उम्मीदें करने लगते हैं। ऐसे में अगर वह व्यक्ति कभी छोटी-सी गलती भी कर दे या थोड़ा असफल हो जाए, तो लोग उसे बहुत बड़ा मानकर निराश हो जाते हैं। इसलिए यह समझना जरूरी है कि हर व्यक्ति से कभी न कभी गलती हो सकती है और हर समय एक जैसा प्रदर्शन करना संभव नहीं होता। संतुलित अपेक्षाएं रखने से हम दूसरों को भी बेहतर समझ पाते हैं और खुद भी अनावश्यक तनाव से बच सकते हैं।
कारणों को समझें
निराश होने पर लोग अक्सर या तो खुद को दोषी मानने लगते हैं या फिर दूसरों को जिम्मेदार ठहराते हैं। लेकिन दोनों ही प्रतिक्रियाएं समस्या का समाधान नहीं हैं। कई बार हमारी अपेक्षाएं ही अवास्तविक होती हैं या फिर हम परिस्थितियों का सही आकलन नहीं कर पाते। ऐसे में स्वयं को कोसने या दूसरों पर नाराज होने के बजाय यह समझना अधिक महत्वपूर्ण है कि निराशा की जड़ वास्तव में कहां है।
- निराशा अक्सर हमारी उम्मीदों और वास्तविकता के बीच की दूरी से पैदा होती है।
- सफलता के साथ संतुलित दृष्टिकोण बनाए रखना जरूरी है।
- निराशा को दबाने या उससे भागने के बजाय उसे स्वीकार करें।
- निराशा के बारे में खुलकर सोचें, ताकि उसका प्रभाव कम होने लगे।
- निराशा जीवन की एक स्वाभाविक भावना है।
निराशा को स्वीकार करें
निराशा इसलिए होती है, क्योंकि यह हमें हमारी सीमाओं का एहसास कराती है-जैसे हम क्या कर सकते हैं या दूसरे लोग क्या कर सकते हैं। आमतौर पर हम ऐसे अनुभव को जल्दी भूलकर आगे बढ़ना चाहते हैं। लेकिन बेहतर तरीका यह है कि हम सोचें कि हमारी उम्मीदें कहां से आईं और क्या वे सही और वास्तविक थीं। जब हमें समझ आ जाता है कि हमारी उम्मीदें और सच्चाई में फर्क है, तो हम निराशा को बेहतर तरीके से समझते हैं और उससे सीखकर आगे मजबूत बन सकते हैं।