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एसआईआर : 2.32 लाख बनेंगे नए मतदाता...अब मैपिंग बनी चुनौती
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गोरखपुर। विशेष प्रगाढ पुनरीक्षण-2026 (एसआईआर) के तहत अब जिले में 2.32 लाख नए मतदाता बनेंगे। सत्यापन के बाद 7404 लोग अपात्र पाए गए, जिनका नाम सूची से हटाया जाएगा। बिना मैपिंग एवं तार्किक विसंगतियों वाले मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए 27 मार्च तक सुनवाई होगी। हालांकि, अब वर्ष 2003 के नाम से मैपिंग कराना बड़ी चुनौती है।
छह मार्च की रात 12 बजे तक ऑनलाइन भरे गए फॉर्म-6 स्वीकार किए गए। नए मतदाता बनने के लिए फार्म-6 भरने वालों की संख्या 2,32,336 हो गई है, जबकि अपात्र मतदाताओं के नाम काटने के लिए 7404 लोगों ने फाॅर्म-7 भरा है। इसी प्रकार नाम, पता एवं अन्य संशोधन के लिए 43,469 लोगों ने फाॅर्म-8 भरा है।
उप जिला निर्वाचन अधिकारी व एडीएम विनीत कुमार सिंह ने बताया कि अंतिम दिन अधिक संख्या में लोगों ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया। बिना मैपिंग एवं तार्किक विसंगतियों वाले मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए 27 मार्च तक सुनवाई होगी। दोनों श्रेणी के मतदाताओं की संख्या 99,584 है, जिसमें करीब 80 प्रतिशत मतदाताओं की सुनवाई होगी। अब सुनवाई में आधार कार्ड भी दस्तावेज के रूप में मान्य है। आधार कार्ड सभी लोगों के पास उपलब्ध है, इससे मतदाताओं को सुविधा हो रही है।
वर्ष 2003 की सूची में नाम की मैपिंग ने उलझाया..लोग परेशान
गोरखपुर। एसआईआर के तहत वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नाम की मैपिंग ने लोगों को उलझा दिया है। एसआईआर फॉर्म में लोगों ने नए दस्तावेज लगाए और फिर उन्हें नोटिस दी गई। सुनवाई के समय दस्तावेज दिए और अब फिर कुछ लोगों से दस्तावेज मांगा जा रहा है। बार-बार दौड़-दौड़कर परेशान ज्यादातर लोग बीएलओ का फोन ही नहीं उठा रहे हैं। उनका कहना है कि अब परेशान किया जा रहा है। इससे बहुत उलझन हो गई है।
बड़गो की ममता देवी ने बताया कि 2003 की सूची में पिता का नाम रामकेश था इसलिए वही भर दी, जबकि उनका नाम रामकिशोर है। अब पुराने रिकॉर्ड के आधार पर मिसमैच बता रहा है। दो बार बीएलओ से मिलकर दस्तावेज दे चुकी हूं। इसी तरह एक परिवार में अगर पांच से ज्यादा नाम है तो भी मैपिंग में आवेदन रिजक्ट हो जा रहा है। दुर्गा चौक के पास रहने वाले सूफियान का कहना है कि परिवार में छह भाई-बहन हैं। सारे दस्तावेज सही हैं लेकिन छह नाम के चलते रिजक्ट हो गए। संजय ने बताया कि 2003 और वर्तमान में पिता की उम्र में अंतर है, आधार कार्ड दिया तो मैपिंग नहीं हो पा रही है।
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छह मार्च की रात 12 बजे तक ऑनलाइन भरे गए फॉर्म-6 स्वीकार किए गए। नए मतदाता बनने के लिए फार्म-6 भरने वालों की संख्या 2,32,336 हो गई है, जबकि अपात्र मतदाताओं के नाम काटने के लिए 7404 लोगों ने फाॅर्म-7 भरा है। इसी प्रकार नाम, पता एवं अन्य संशोधन के लिए 43,469 लोगों ने फाॅर्म-8 भरा है।
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उप जिला निर्वाचन अधिकारी व एडीएम विनीत कुमार सिंह ने बताया कि अंतिम दिन अधिक संख्या में लोगों ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया। बिना मैपिंग एवं तार्किक विसंगतियों वाले मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए 27 मार्च तक सुनवाई होगी। दोनों श्रेणी के मतदाताओं की संख्या 99,584 है, जिसमें करीब 80 प्रतिशत मतदाताओं की सुनवाई होगी। अब सुनवाई में आधार कार्ड भी दस्तावेज के रूप में मान्य है। आधार कार्ड सभी लोगों के पास उपलब्ध है, इससे मतदाताओं को सुविधा हो रही है।
वर्ष 2003 की सूची में नाम की मैपिंग ने उलझाया..लोग परेशान
गोरखपुर। एसआईआर के तहत वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नाम की मैपिंग ने लोगों को उलझा दिया है। एसआईआर फॉर्म में लोगों ने नए दस्तावेज लगाए और फिर उन्हें नोटिस दी गई। सुनवाई के समय दस्तावेज दिए और अब फिर कुछ लोगों से दस्तावेज मांगा जा रहा है। बार-बार दौड़-दौड़कर परेशान ज्यादातर लोग बीएलओ का फोन ही नहीं उठा रहे हैं। उनका कहना है कि अब परेशान किया जा रहा है। इससे बहुत उलझन हो गई है।
बड़गो की ममता देवी ने बताया कि 2003 की सूची में पिता का नाम रामकेश था इसलिए वही भर दी, जबकि उनका नाम रामकिशोर है। अब पुराने रिकॉर्ड के आधार पर मिसमैच बता रहा है। दो बार बीएलओ से मिलकर दस्तावेज दे चुकी हूं। इसी तरह एक परिवार में अगर पांच से ज्यादा नाम है तो भी मैपिंग में आवेदन रिजक्ट हो जा रहा है। दुर्गा चौक के पास रहने वाले सूफियान का कहना है कि परिवार में छह भाई-बहन हैं। सारे दस्तावेज सही हैं लेकिन छह नाम के चलते रिजक्ट हो गए। संजय ने बताया कि 2003 और वर्तमान में पिता की उम्र में अंतर है, आधार कार्ड दिया तो मैपिंग नहीं हो पा रही है।
