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एम्स : मरीज-केंद्रित और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी मजबूती
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Tue, 03 Mar 2026 10:38 PM IST
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- सेवा संकल्प प्रस्ताव के क्रियान्वयन को लेकर एम्स गोरखपुर में बैठक
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में “सेवा संकल्प प्रस्ताव” के प्रभावी क्रियान्वयन को बैठक आयोजित की गई। अध्यक्षता कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता ने की। उन्होंने मरीज-केंद्रित और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए।
बैठक की शुरुआत मंत्रालय की अधिसूचना एवं सेवा संकल्प प्रस्ताव के पूर्ण पाठ के वाचन से हुई। इसके बाद प्रस्ताव को संस्थान में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विस्तृत चर्चा की गई। उपस्थित सदस्यों ने पारदर्शी, जवाबदेह और जन-सेवा उन्मुख कार्य प्रणाली को और सशक्त बनाने पर जोर दिया। बैठक में डीन, चिकित्सा अधीक्षक, विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने “नागरिक देवो भवः” की भावना को आत्मसात करते हुए “रोगी देवो भवः” को अपनी सेवा का मूल मंत्र बनाने का संकल्प लिया। चर्चा के दौरान मरीज-केंद्रित और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, नई सुपर-स्पेशियलिटी सुविधाओं की जानकारी जनसामान्य तक पहुंचाने, सामुदायिक स्वास्थ्य शिविरों और निवारक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। साथ ही प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण, क्षेत्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं पर आधारित शोध को प्रोत्साहन, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं व टेलीमेडिसिन के विस्तार, शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करने और स्वच्छता एवं संक्रमण नियंत्रण उपायों पर विशेष बल देने का निर्णय लिया गया। अंत में कार्यकारी निदेशक ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से योजनाबद्ध एवं समन्वित प्रयासों के माध्यम से “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
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गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में “सेवा संकल्प प्रस्ताव” के प्रभावी क्रियान्वयन को बैठक आयोजित की गई। अध्यक्षता कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता ने की। उन्होंने मरीज-केंद्रित और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए।
बैठक की शुरुआत मंत्रालय की अधिसूचना एवं सेवा संकल्प प्रस्ताव के पूर्ण पाठ के वाचन से हुई। इसके बाद प्रस्ताव को संस्थान में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विस्तृत चर्चा की गई। उपस्थित सदस्यों ने पारदर्शी, जवाबदेह और जन-सेवा उन्मुख कार्य प्रणाली को और सशक्त बनाने पर जोर दिया। बैठक में डीन, चिकित्सा अधीक्षक, विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने “नागरिक देवो भवः” की भावना को आत्मसात करते हुए “रोगी देवो भवः” को अपनी सेवा का मूल मंत्र बनाने का संकल्प लिया। चर्चा के दौरान मरीज-केंद्रित और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, नई सुपर-स्पेशियलिटी सुविधाओं की जानकारी जनसामान्य तक पहुंचाने, सामुदायिक स्वास्थ्य शिविरों और निवारक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। साथ ही प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण, क्षेत्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं पर आधारित शोध को प्रोत्साहन, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं व टेलीमेडिसिन के विस्तार, शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करने और स्वच्छता एवं संक्रमण नियंत्रण उपायों पर विशेष बल देने का निर्णय लिया गया। अंत में कार्यकारी निदेशक ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से योजनाबद्ध एवं समन्वित प्रयासों के माध्यम से “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
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