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एम्स : चर्बी की गांठ का उपचार एक सुई से, अब सर्जरी हुई आसान
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- स्लिपरी लिपोमा (चर्बी की गांठ) के इलाज की नई तकनीक विकसित की गई
- 21 गेज की स्पाइनल सूई से हाेता है इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में चर्बी की गांठ का सफल ऑपरेशन संभव हो सकेगा। एम्स ने इसके लिए नई तकनीकी का प्रयोग किया है। 21 गेज की स्पाइनल सूई से चर्बी की गांठ (लिपोमा) को जाम कर दिया जाता है, जिसका शरीर पर निशान भी नहीं बनता था। अभी तक, एनेस्थीसिया देकर गांठ वाले स्थान को सुन्न करके सर्जरी की जाती थी। एक छोटा चीरा लगाकर गांठ बाहर निकाल कर टांके लगाकर पट्टी कर दी जाती है।
एम्स के चर्म रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील गुप्ता ने बताया कि शरीर में पनपने वाली चर्बी की गांठ का पता लगाना ही सबसे जटिल है। इसका कारण है कि ये गांठ समय-समय पर इधर-उधर सरकती रहती है। शरीर में चिह्नित न हो पाने से इसके उपचार में दिक्कत होती है। ऐसे में गांठ की सर्जरी कर पाना बेहद मुश्किल भरा होता है।
एम्स ने इस दुश्वारी को देखते हुए उपचार के साथ इसे कम समय में कैसे लोकेट करें, इस पर काम किया। कई शोध के बाद सामने आया कि 21-गेज सूई को पैल्पेबल लिपोमा (स्पर्श करने योग्य गांठ) के केंद्र में लंबवत रूप से डाला जाता है। सूई को तब तक डाला जाता है, जब तक लिपोमा के संपर्क में सीधे सूई का हिस्सा नहीं आता और मरीज को महसूस न हो।
इस विधि से पिछले दिनों एम्स में एक मरीज का उपचार किया गया। मरीज लिपोमा से परेशान था। एम्स में उसका सफल आपरेशन किया गया। मरीज के घाव के चमड़े के नीचे करीब एक से 1.5 सेमी गहराई में सूई को डाला गया, जिससे इंट्राऑपरेटिव तरीके से (छवियों को थ्रीडी में दिखाता है) लिपोमा को सटीक लोकेट कर उसे एक तरह से जाम कर दिया गया। इस तकनीक में मरीज के शरीर पर निशान भी कम पड़ते हैं, और भविष्य में फिर से लिपोमा होने का डर नहीं रहता है।
सामान्य सर्जरी में स्लिपरी लिपोमा के हिस्से कई बार स्लिप करने के दौरान छूट जाते हैं, जिससे दूसरी बार लिपोमा होने का खतरा रहता है। इस तकनीक में सूई के जरिए सटीक लोकेट कर उसे जाम कर दिया जाता है। इसके बाद छोटी सर्जरी कर चर्बी की गांठ निकाल दी जाती है। इस तकनीक में चर्म रोग विभाग की डॉ. शिवांगी राणा, डॉ. दिव्यांशु देशमुख, डॉ. फरखंदा सोफी का अहम योगदान रहा है।
ईडी विभा दत्ता ने बताया कि एक सूई से लिपोमा को खोजकर उसे जाम करने की आधुनिक विधि एम्स ने खोजी है। इस विधि से उपचार सरल हो गया है। ऐसी सर्जरी के लिए राह आसान हुई है।
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- 21 गेज की स्पाइनल सूई से हाेता है इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में चर्बी की गांठ का सफल ऑपरेशन संभव हो सकेगा। एम्स ने इसके लिए नई तकनीकी का प्रयोग किया है। 21 गेज की स्पाइनल सूई से चर्बी की गांठ (लिपोमा) को जाम कर दिया जाता है, जिसका शरीर पर निशान भी नहीं बनता था। अभी तक, एनेस्थीसिया देकर गांठ वाले स्थान को सुन्न करके सर्जरी की जाती थी। एक छोटा चीरा लगाकर गांठ बाहर निकाल कर टांके लगाकर पट्टी कर दी जाती है।
एम्स के चर्म रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील गुप्ता ने बताया कि शरीर में पनपने वाली चर्बी की गांठ का पता लगाना ही सबसे जटिल है। इसका कारण है कि ये गांठ समय-समय पर इधर-उधर सरकती रहती है। शरीर में चिह्नित न हो पाने से इसके उपचार में दिक्कत होती है। ऐसे में गांठ की सर्जरी कर पाना बेहद मुश्किल भरा होता है।
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एम्स ने इस दुश्वारी को देखते हुए उपचार के साथ इसे कम समय में कैसे लोकेट करें, इस पर काम किया। कई शोध के बाद सामने आया कि 21-गेज सूई को पैल्पेबल लिपोमा (स्पर्श करने योग्य गांठ) के केंद्र में लंबवत रूप से डाला जाता है। सूई को तब तक डाला जाता है, जब तक लिपोमा के संपर्क में सीधे सूई का हिस्सा नहीं आता और मरीज को महसूस न हो।
इस विधि से पिछले दिनों एम्स में एक मरीज का उपचार किया गया। मरीज लिपोमा से परेशान था। एम्स में उसका सफल आपरेशन किया गया। मरीज के घाव के चमड़े के नीचे करीब एक से 1.5 सेमी गहराई में सूई को डाला गया, जिससे इंट्राऑपरेटिव तरीके से (छवियों को थ्रीडी में दिखाता है) लिपोमा को सटीक लोकेट कर उसे एक तरह से जाम कर दिया गया। इस तकनीक में मरीज के शरीर पर निशान भी कम पड़ते हैं, और भविष्य में फिर से लिपोमा होने का डर नहीं रहता है।
सामान्य सर्जरी में स्लिपरी लिपोमा के हिस्से कई बार स्लिप करने के दौरान छूट जाते हैं, जिससे दूसरी बार लिपोमा होने का खतरा रहता है। इस तकनीक में सूई के जरिए सटीक लोकेट कर उसे जाम कर दिया जाता है। इसके बाद छोटी सर्जरी कर चर्बी की गांठ निकाल दी जाती है। इस तकनीक में चर्म रोग विभाग की डॉ. शिवांगी राणा, डॉ. दिव्यांशु देशमुख, डॉ. फरखंदा सोफी का अहम योगदान रहा है।
ईडी विभा दत्ता ने बताया कि एक सूई से लिपोमा को खोजकर उसे जाम करने की आधुनिक विधि एम्स ने खोजी है। इस विधि से उपचार सरल हो गया है। ऐसी सर्जरी के लिए राह आसान हुई है।
