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Gorakhpur News: नाला खोदाई में गिरे मकान से दहशत में आए पड़ोसी
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- भटहट-बांसस्थान फोरलेन किनारे हो रहा है नाले का निर्माण
- शुक्रवार को गिर गए थे दो मकान, शनिवार को पीडब्ल्यूडी और राजस्व विभाग के अधिकारियों ने किया निरीक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
भटहट (गोरखपुर)। भटहट-बांसस्थान निर्माणाधीन फोरलेन सड़क के किनारे नाला खुदाई के दौरान दो मकानों के अचानक गिर जाने से इलाके में हड़कंप मच गया है। घटना के बाद न सिर्फ पीड़ित परिवारों के सामने छत का संकट खड़ा हो गया है, बल्कि आसपास रहने वाले लोग भी अपने मकानों की सुरक्षा को लेकर दहशत आ गए हैं।
शुक्रवार को बड़हिया गांव के सामने हुई इस घटना के बाद शनिवार को लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और राजस्व विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और जांच शुरू की।
जानकारी के अनुसार, भटहट-बांसस्थान मार्ग पर फोरलेन निर्माण के साथ-साथ नाले की खोदाई का काम चल रहा है। शुक्रवार को जेसीबी मशीन से लुकमान और किताबुल्लाह के मकान के सामने नाला खोदा जा रहा था। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाली नजरुल नामक महिला ने दोनों मकानों के बीच दरार पड़ते देख शोर मचाया और लोगों को सतर्क किया। महिला की सूझबूझ से मकान में रह रहे लोग समय रहते बाहर निकल आए। कुछ ही सेकेंड बाद दोनों मकान भरभराकर गिर गए। यदि समय पर चेतावनी न मिलती तो बड़ा हादसा हो सकता था।
घटना के बाद पीडब्ल्यूडी और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पीड़ितों से कागजी कार्रवाई कराई। दोनों मकानों की रजिस्ट्री कर ली गई है लेकिन मुआवजे को लेकर पीड़ित परिवार संतुष्ट नहीं हैं। किताबुल्लाह ने बताया कि उनके मकान की लागत करीब 22 लाख रुपये थी, जबकि अब तक उन्हें दो किस्तों में कुल साढ़े ग्यारह लाख रुपये ही मिले हैं। आगे कितना मुआवजा मिलेगा, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। पीड़ितों का यह भी कहना है कि मकान गिरने से राशन, घरेलू सामान और जरूरी उपकरण मलबे में दबकर नष्ट हो गए लेकिन इनकी क्षतिपूर्ति को लेकर भी कोई आश्वासन नहीं मिला है।
दीवारों को लकड़ी का सहारा
मकान गिरने की घटना के बाद आसपास के लोग काफी डरे हुए हैं। लालबहादुर निषाद, राजेंद्र निषाद, जलालुद्दीन, शरब खुसरोदीन समेत कई लोगों के मकानों का हिस्सा नाला खुदाई के बाद लटक गया है। कुछ लोगों ने अस्थायी रूप से पत्थर और लकड़ी का सहारा देकर दीवारों को थाम रखा है लेकिन हर वक्त हादसे का डर बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि आवश्यकता से अधिक खोदाई किए जाने के कारण यह हादसा हुआ। एसडीएम कुलदीप कुमार ने बताया कि मकान गिरने की सूचना मिलते ही कर्मचारियों को मौके पर भेजा गया है। पूरे मामले की जांच की जा रही है और नियमानुसार पीड़ितों को उचित मुआवजा दिया जाएगा।
- शुक्रवार को गिर गए थे दो मकान, शनिवार को पीडब्ल्यूडी और राजस्व विभाग के अधिकारियों ने किया निरीक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
भटहट (गोरखपुर)। भटहट-बांसस्थान निर्माणाधीन फोरलेन सड़क के किनारे नाला खुदाई के दौरान दो मकानों के अचानक गिर जाने से इलाके में हड़कंप मच गया है। घटना के बाद न सिर्फ पीड़ित परिवारों के सामने छत का संकट खड़ा हो गया है, बल्कि आसपास रहने वाले लोग भी अपने मकानों की सुरक्षा को लेकर दहशत आ गए हैं।
शुक्रवार को बड़हिया गांव के सामने हुई इस घटना के बाद शनिवार को लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और राजस्व विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और जांच शुरू की।
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जानकारी के अनुसार, भटहट-बांसस्थान मार्ग पर फोरलेन निर्माण के साथ-साथ नाले की खोदाई का काम चल रहा है। शुक्रवार को जेसीबी मशीन से लुकमान और किताबुल्लाह के मकान के सामने नाला खोदा जा रहा था। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाली नजरुल नामक महिला ने दोनों मकानों के बीच दरार पड़ते देख शोर मचाया और लोगों को सतर्क किया। महिला की सूझबूझ से मकान में रह रहे लोग समय रहते बाहर निकल आए। कुछ ही सेकेंड बाद दोनों मकान भरभराकर गिर गए। यदि समय पर चेतावनी न मिलती तो बड़ा हादसा हो सकता था।
घटना के बाद पीडब्ल्यूडी और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पीड़ितों से कागजी कार्रवाई कराई। दोनों मकानों की रजिस्ट्री कर ली गई है लेकिन मुआवजे को लेकर पीड़ित परिवार संतुष्ट नहीं हैं। किताबुल्लाह ने बताया कि उनके मकान की लागत करीब 22 लाख रुपये थी, जबकि अब तक उन्हें दो किस्तों में कुल साढ़े ग्यारह लाख रुपये ही मिले हैं। आगे कितना मुआवजा मिलेगा, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। पीड़ितों का यह भी कहना है कि मकान गिरने से राशन, घरेलू सामान और जरूरी उपकरण मलबे में दबकर नष्ट हो गए लेकिन इनकी क्षतिपूर्ति को लेकर भी कोई आश्वासन नहीं मिला है।
दीवारों को लकड़ी का सहारा
मकान गिरने की घटना के बाद आसपास के लोग काफी डरे हुए हैं। लालबहादुर निषाद, राजेंद्र निषाद, जलालुद्दीन, शरब खुसरोदीन समेत कई लोगों के मकानों का हिस्सा नाला खुदाई के बाद लटक गया है। कुछ लोगों ने अस्थायी रूप से पत्थर और लकड़ी का सहारा देकर दीवारों को थाम रखा है लेकिन हर वक्त हादसे का डर बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि आवश्यकता से अधिक खोदाई किए जाने के कारण यह हादसा हुआ। एसडीएम कुलदीप कुमार ने बताया कि मकान गिरने की सूचना मिलते ही कर्मचारियों को मौके पर भेजा गया है। पूरे मामले की जांच की जा रही है और नियमानुसार पीड़ितों को उचित मुआवजा दिया जाएगा।
