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Gorakhpur News: डीडीयू के पूर्व छात्र प्रो. दुर्गेश को मिला हंबोल्ट रिसर्च अवार्ड
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जर्मनी के अलेकजेंडर वोन हंबोल्ट फाउंडेशन की ओर से दिया गया सम्मान
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के पुरातन छात्र एवं सौर भौतिक विज्ञानी प्रो. दुर्गेश कुमार त्रिपाठी को जर्मनी के अलेकजेंडर वोन हंबोल्ट फाउंडेशन की ओर से वर्ष 2026 का हम्बोल्ट रिसर्च अवार्ड दिया गया है।प्रो. दुर्गेश कुमार त्रिपाठी ने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग से स्नातक एवं परास्नातक स्तर पर शिक्षा प्राप्त की है।
उन्होंने जर्मनी के मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर सोलर सिस्टम रिसर्च से इंटरनेशनल मैक्स प्लांक रिसर्च स्कूल के अंतर्गत सौर कोरोना एवं कोरोनल मास इंजेक्शन पर पीएचडी पूरी की। प्रो. त्रिपाठी इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स, पुणे में प्रोफेसर हैं। भारत के प्रथम सौर मिशन आदित्य-एल1 के लिए उन्होंने अपनी शोध टीम के साथ सोलर अल्ट्रावॉयलेट इमेजिंग टेलिस्कोप के विकास और निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रो. दुर्गेश कुमार त्रिपाठी की यह उपलब्धि गोरखपुर विश्वविद्यालय के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। उन्होंने हमारे विश्वविद्यालय से प्राप्त मजबूत शैक्षणिक आधार को वैश्विक स्तर की वैज्ञानिक उपलब्धियों में परिवर्तित किया है।
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-प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, डीडीयू
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के पुरातन छात्र एवं सौर भौतिक विज्ञानी प्रो. दुर्गेश कुमार त्रिपाठी को जर्मनी के अलेकजेंडर वोन हंबोल्ट फाउंडेशन की ओर से वर्ष 2026 का हम्बोल्ट रिसर्च अवार्ड दिया गया है।प्रो. दुर्गेश कुमार त्रिपाठी ने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग से स्नातक एवं परास्नातक स्तर पर शिक्षा प्राप्त की है।
उन्होंने जर्मनी के मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर सोलर सिस्टम रिसर्च से इंटरनेशनल मैक्स प्लांक रिसर्च स्कूल के अंतर्गत सौर कोरोना एवं कोरोनल मास इंजेक्शन पर पीएचडी पूरी की। प्रो. त्रिपाठी इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स, पुणे में प्रोफेसर हैं। भारत के प्रथम सौर मिशन आदित्य-एल1 के लिए उन्होंने अपनी शोध टीम के साथ सोलर अल्ट्रावॉयलेट इमेजिंग टेलिस्कोप के विकास और निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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प्रो. दुर्गेश कुमार त्रिपाठी की यह उपलब्धि गोरखपुर विश्वविद्यालय के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। उन्होंने हमारे विश्वविद्यालय से प्राप्त मजबूत शैक्षणिक आधार को वैश्विक स्तर की वैज्ञानिक उपलब्धियों में परिवर्तित किया है।
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-प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, डीडीयू