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Gorakhpur News: डॉ. कुमार सर्वोत्तम का नवाचार बना मिसाल, भारतीय पेटेंट से बढ़ा एम्स का गौरव
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Fri, 26 Jun 2026 02:52 AM IST
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- कम लागत वाले पोर्टेबल डिवाइस से जैव-चिकित्सकीय अनुसंधान को मिलेगी नई दिशा
- एम्स गोरखपुर के वैज्ञानिक को बड़ी सफलता, स्वदेशी शोध उपकरण को मिला भारतीय पेटेंट
गोरखपुर। वैज्ञानिक अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में एम्स को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। संस्थान के प्रोफेसर डॉ. कुमार सर्वोत्तम की ओर से विकसित कम लागत वाले स्वदेशी शोध उपकरण को भारतीय पेटेंट प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि न केवल एम्स गोरखपुर बल्कि देश में स्वदेशी अनुसंधान को भी नई पहचान देने वाली मानी जा रही है।
“ए लो-कॉस्ट एंड पोर्टेबल, स्माल एनिमल्स डिवाइस फॉर सिमुलेशन ऑफ डिफरिंग एन्वायरनमेंटल कंडीशंस” शीर्षक से विकसित यह उपकरण छोटे प्रयोगात्मक पशुओं के लिए विभिन्न कृत्रिम पर्यावरणीय परिस्थितियों का निर्माण और नियंत्रण करने में सक्षम है। इसकी सहायता से वैज्ञानिक एक ही मंच पर ऑक्सीजन की मात्रा, तापमान, वायुदाब, आर्द्रता, वायु गुणवत्ता और प्रकाश जैसी अनेक परिस्थितियों का अध्ययन कर सकते हैं।
डॉ. कुमार सर्वोत्तम ने इस उपकरण का विकास अपने बीएचयू के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में कार्यकाल के दौरान किया था। इस शोध कार्य में उनके शोधार्थी अनिल कुमार यादव ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। दोनों शोधकर्ताओं के संयुक्त प्रयास से तैयार यह उपकरण कम लागत में बहुआयामी अनुसंधान की सुविधा उपलब्ध कराएगा। यह स्वदेशी तकनीक सीमित संसाधनों वाले शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी। इससे जैव-चिकित्सकीय अनुसंधान के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलने की उम्मीद है।
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यह संस्थान के लिए गर्व का विषय है। ऐसे नवाचार ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना को मजबूत करते हैं। युवा वैज्ञानिकों को अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
- डॉ. विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक, एम्स
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- एम्स गोरखपुर के वैज्ञानिक को बड़ी सफलता, स्वदेशी शोध उपकरण को मिला भारतीय पेटेंट
गोरखपुर। वैज्ञानिक अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में एम्स को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। संस्थान के प्रोफेसर डॉ. कुमार सर्वोत्तम की ओर से विकसित कम लागत वाले स्वदेशी शोध उपकरण को भारतीय पेटेंट प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि न केवल एम्स गोरखपुर बल्कि देश में स्वदेशी अनुसंधान को भी नई पहचान देने वाली मानी जा रही है।
“ए लो-कॉस्ट एंड पोर्टेबल, स्माल एनिमल्स डिवाइस फॉर सिमुलेशन ऑफ डिफरिंग एन्वायरनमेंटल कंडीशंस” शीर्षक से विकसित यह उपकरण छोटे प्रयोगात्मक पशुओं के लिए विभिन्न कृत्रिम पर्यावरणीय परिस्थितियों का निर्माण और नियंत्रण करने में सक्षम है। इसकी सहायता से वैज्ञानिक एक ही मंच पर ऑक्सीजन की मात्रा, तापमान, वायुदाब, आर्द्रता, वायु गुणवत्ता और प्रकाश जैसी अनेक परिस्थितियों का अध्ययन कर सकते हैं।
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डॉ. कुमार सर्वोत्तम ने इस उपकरण का विकास अपने बीएचयू के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में कार्यकाल के दौरान किया था। इस शोध कार्य में उनके शोधार्थी अनिल कुमार यादव ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। दोनों शोधकर्ताओं के संयुक्त प्रयास से तैयार यह उपकरण कम लागत में बहुआयामी अनुसंधान की सुविधा उपलब्ध कराएगा। यह स्वदेशी तकनीक सीमित संसाधनों वाले शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी। इससे जैव-चिकित्सकीय अनुसंधान के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलने की उम्मीद है।
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यह संस्थान के लिए गर्व का विषय है। ऐसे नवाचार ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना को मजबूत करते हैं। युवा वैज्ञानिकों को अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
- डॉ. विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक, एम्स