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Gorakhpur News: भारत सेवाश्रम संघ में पांच दिवसीय सत्संग समारोह का शुभारंभ
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Fri, 26 Jun 2026 02:51 AM IST
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स्वामी अखिलेश्वरानंद सरस्वती ने रामचरितमानस की नवधा भक्ति का किया प्रेरक वर्णन
गोरखपुर। एकादशी के पावन अवसर पर बृहस्पतिवार को भारत सेवाश्रम संघ गोरखपुर शाखा के प्रांगण में पांच दिवसीय सत्संग समारोह का भव्य शुभारंभ हुआ। आध्यात्मिक वातावरण, भक्तिभाव और वैदिक परंपराओं के मध्य आरंभ हुए इस आयोजन में श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर सत्संग का लाभ प्राप्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत सेवाश्रम संघ, गोरखपुर शाखा के अध्यक्ष स्वामी निश्रेयसानंद ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।दीप प्रज्ज्वलन के साथ ही पूरे परिसर में भक्ति, श्रद्धा और सनातन संस्कृति के संरक्षण का संदेश गूंज उठा।
सत्संग समारोह के प्रथम दिन कथा-वाचक के रूप में पधारे स्वामी अखिलेश्वरानंद सरस्वती, अध्यक्ष, शाश्वत सनातन अभ्यागत साधु समिति, हरिद्वार ने भक्तजनों को रामचरितमानस में वर्णित नवधा भक्ति का सुंदर, सरल और प्रेरणादायी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन को अनुशासन, सेवा, समर्पण और सदाचार से जोड़ने का माध्यम है। अखिलेश्वरानंद सरस्वती ने अपने प्रवचन में सनातन संस्कृति की एकता, संगठन और जागरण पर विशेष बल दिया।
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कार्यक्रम में अचिंत लहरी, आनंद मुखर्जी, स्वाति मुखर्जी, वीरू पाल, दिवाकर यादव, डॉ. हरि शरण, पूर्वा मुखर्जी, आदित्य मुखर्जी, गणेश थापा, हीरेन मुखर्जी सहित कई श्रद्धालु व भक्तजन शामिल रहे।
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गोरखपुर। एकादशी के पावन अवसर पर बृहस्पतिवार को भारत सेवाश्रम संघ गोरखपुर शाखा के प्रांगण में पांच दिवसीय सत्संग समारोह का भव्य शुभारंभ हुआ। आध्यात्मिक वातावरण, भक्तिभाव और वैदिक परंपराओं के मध्य आरंभ हुए इस आयोजन में श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर सत्संग का लाभ प्राप्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत सेवाश्रम संघ, गोरखपुर शाखा के अध्यक्ष स्वामी निश्रेयसानंद ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।दीप प्रज्ज्वलन के साथ ही पूरे परिसर में भक्ति, श्रद्धा और सनातन संस्कृति के संरक्षण का संदेश गूंज उठा।
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सत्संग समारोह के प्रथम दिन कथा-वाचक के रूप में पधारे स्वामी अखिलेश्वरानंद सरस्वती, अध्यक्ष, शाश्वत सनातन अभ्यागत साधु समिति, हरिद्वार ने भक्तजनों को रामचरितमानस में वर्णित नवधा भक्ति का सुंदर, सरल और प्रेरणादायी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन को अनुशासन, सेवा, समर्पण और सदाचार से जोड़ने का माध्यम है। अखिलेश्वरानंद सरस्वती ने अपने प्रवचन में सनातन संस्कृति की एकता, संगठन और जागरण पर विशेष बल दिया।
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कार्यक्रम में अचिंत लहरी, आनंद मुखर्जी, स्वाति मुखर्जी, वीरू पाल, दिवाकर यादव, डॉ. हरि शरण, पूर्वा मुखर्जी, आदित्य मुखर्जी, गणेश थापा, हीरेन मुखर्जी सहित कई श्रद्धालु व भक्तजन शामिल रहे।