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बीआरडी : प्रदूषण से फैल रहा टीबी का वायरस, हो रहे भर्ती
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- सांस फूलने वाले मरीजों की इम्युनिटी पावर हो रही कमजोर, बढ़ानी पड़ रही दवा की डोज
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज के टीबी वार्ड में प्रदूषण से सांस फूलने वाले मरीजों में टीबी वायरस का इंफेक्शन तेजी से बढ़ने लगा है। जिन मरीजों को पहले इनहेलर लगाकर ही राहत मिल जाती थी, अब उन्हें भर्ती करना पड़ रहा है।
बुधवार को बीआरडी मेडिकल कॉलेज के टीबी वार्ड में इनहेलर के पांच मरीजों को भर्ती किया गया। डॉ. अश्वनी मिश्र ने बताया कि बढ़ती ठंड के मौसम में जो सांस के मरीज पहले से दमा व सीओडीपी से पीड़ित हैं, उन्हें सांस लेने में बहुत तकलीफ हो रही है। वातावरण में प्रदूषण के बढ़ने की वजह से टीबी वायरल के इंफेक्शंस बढ़ने लगे हैं। कई मरीजों में यह रोग बिना इनहेलर के नियंत्रण में थे। अब इन मरीजों को इनहेलर शुरू हो गया है। कई मरीज इनहेलर की वजह से बीमारी को नियंत्रित किए हुए थे, उन्हें अब मरीजों को भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है। गंभीर सांस के मरीजों की संख्या पहले पूरी ओपीडी की 10 प्रतिशत होती थी। यह अब बढ़कर 50 प्रतिशत तक हो गई है।
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गोरखपुर। बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज के टीबी वार्ड में प्रदूषण से सांस फूलने वाले मरीजों में टीबी वायरस का इंफेक्शन तेजी से बढ़ने लगा है। जिन मरीजों को पहले इनहेलर लगाकर ही राहत मिल जाती थी, अब उन्हें भर्ती करना पड़ रहा है।
बुधवार को बीआरडी मेडिकल कॉलेज के टीबी वार्ड में इनहेलर के पांच मरीजों को भर्ती किया गया। डॉ. अश्वनी मिश्र ने बताया कि बढ़ती ठंड के मौसम में जो सांस के मरीज पहले से दमा व सीओडीपी से पीड़ित हैं, उन्हें सांस लेने में बहुत तकलीफ हो रही है। वातावरण में प्रदूषण के बढ़ने की वजह से टीबी वायरल के इंफेक्शंस बढ़ने लगे हैं। कई मरीजों में यह रोग बिना इनहेलर के नियंत्रण में थे। अब इन मरीजों को इनहेलर शुरू हो गया है। कई मरीज इनहेलर की वजह से बीमारी को नियंत्रित किए हुए थे, उन्हें अब मरीजों को भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है। गंभीर सांस के मरीजों की संख्या पहले पूरी ओपीडी की 10 प्रतिशत होती थी। यह अब बढ़कर 50 प्रतिशत तक हो गई है।
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