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डीडीयू : संविदा शिक्षक भर्ती में अनियमितता का आरोप
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संविदा पर कार्यरत शिक्षकों ने कुलाधिपति, सीएम और कुलपति को पत्र भेजकर जांच की मांग की
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयू) में बीए एलएलबी संविदा शिक्षक भर्ती 2024-25 सवालों के घेरे में आ गई है। विश्वविद्यालय में संविदा पर कार्यरत शिक्षक डॉ. राजेश मणि त्रिपाठी और डॉ. सत्येंद्र कुमार श्रीवास्तव ने चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। दोनों शिक्षकों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री, कुलाधिपति, कुलपति और रजिस्ट्रार को पत्र भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि साक्षात्कार प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही और चयन समिति में शामिल कुछ सदस्यों के आपसी संबंधों ने निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि बिना स्पष्ट मानकों के अभ्यर्थियों का चयन किया गया और पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक नहीं किया गया। यहां तक कि चयनित अभ्यर्थियों की अंतिम सूची भी जारी नहीं की गई।
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि चयन समिति से जुड़े लोगों ने अपने परिचितों और शोधार्थियों को प्राथमिकता दी। साथ ही चयनित अभ्यर्थियों को रात के समय बुलाकर चुपचाप कार्यभार ग्रहण कराने की बात भी सामने आई है, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर और संदेह गहराता है।
दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी आरोपों को खारिज किया है। कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही है और मेरिट, साक्षात्कार सहित सभी निर्धारित मानकों का पालन किया गया है। उन्होंने कहा कि अभी तक चयनित अभ्यर्थियों से संबंधित लिफाफे भी नहीं खोले गए हैं।
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयू) में बीए एलएलबी संविदा शिक्षक भर्ती 2024-25 सवालों के घेरे में आ गई है। विश्वविद्यालय में संविदा पर कार्यरत शिक्षक डॉ. राजेश मणि त्रिपाठी और डॉ. सत्येंद्र कुमार श्रीवास्तव ने चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। दोनों शिक्षकों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री, कुलाधिपति, कुलपति और रजिस्ट्रार को पत्र भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि साक्षात्कार प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही और चयन समिति में शामिल कुछ सदस्यों के आपसी संबंधों ने निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि बिना स्पष्ट मानकों के अभ्यर्थियों का चयन किया गया और पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक नहीं किया गया। यहां तक कि चयनित अभ्यर्थियों की अंतिम सूची भी जारी नहीं की गई।
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पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि चयन समिति से जुड़े लोगों ने अपने परिचितों और शोधार्थियों को प्राथमिकता दी। साथ ही चयनित अभ्यर्थियों को रात के समय बुलाकर चुपचाप कार्यभार ग्रहण कराने की बात भी सामने आई है, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर और संदेह गहराता है।
दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी आरोपों को खारिज किया है। कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही है और मेरिट, साक्षात्कार सहित सभी निर्धारित मानकों का पालन किया गया है। उन्होंने कहा कि अभी तक चयनित अभ्यर्थियों से संबंधित लिफाफे भी नहीं खोले गए हैं।