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प्रतिभावान हैं युवा, पिछली सरकारें उन्हें नहीं दे सकीं उचित प्लेटफॉर्म : सीएम
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- युवा शक्ति के दम पर अर्थव्यवस्था का इंजन बना पूर्वी उत्तर प्रदेश, तीन गुना से अधिक बढ़ी प्रति व्यक्ति आय
- 1947 के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश की उपेक्षा क्यों हुई, शिक्षा-स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करने से किसने रोका
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक टीवी चैनल के कॉन्क्लेव में साझा की पूर्वी उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा
गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश अपनी युवा शक्ति के बल पर तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है। यहां के युवाओं में कभी प्रतिभा और परिश्रम की कमी नहीं रही। युवाओं पर किसी तरह का लांछन लगाना उचित नहीं है। यहां कभी प्रतिभा की कमी नहीं थी, बल्कि पूर्ववर्ती सरकारें उचित प्लेटफॉर्म नहीं दे सकीं। जब युवाओं को प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने वाली सरकार आई तो हर क्षेत्र में उनके लिए अवसर तैयार किए गए। इसका परिणाम है कि आज प्रदेश का युवा हर जगह अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहा है।
मुख्यमंत्री मंगलवार को गोरखपुर में एक टीवी चैनल के ‘बदलता पूर्वी उत्तर प्रदेश’ कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यदि पहले प्रदेश के युवाओं की प्रतिभा और क्षमता का योगदान विकास में नहीं लिया जा सका तो इसमें युवाओं की कमी नहीं थी, बल्कि यह उस सिस्टम की कमी थी। इस क्षेत्र को कभी अपेक्षित प्रोत्साहन नहीं मिला। गुलामी के दौरान उपेक्षा का दंश झेलना समझा जा सकता है। लेकिन, आजादी के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश के विकास को लेकर ऐसी कोई मजबूरी नहीं थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय पूर्वी उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में लोग रजिस्टर्ड श्रमिक के रूप में मॉरीशस, फिजी समेत विभिन्न देशों में गए। आज उन्हीं लोगों के वंशज कई देशों में नेतृत्वकारी भूमिकाओं में हैं। पिछले नौ वर्षों में अकेले गोरखपुर में हुए निवेश से 50 हजार युवाओं को रोजगार मिला है।
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प्रति व्यक्ति आय तीन गुना से अधिक हुई
पिछले नौ वर्षों में प्रदेश अपनी अर्थव्यवस्था को तीन गुना करने में सफल रहा है। इस दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय तीन गुना से अधिक हुई है। पूरा विश्वास है कि अगले तीन वर्षों के भीतर उत्तर प्रदेश वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
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अब युवा बाहर नहीं जाते, उद्योग यहां आते हैं
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत राज्य के युवाओं का रोजगार के लिए बाहर जाना कम होने का असर दूसरे राज्यों के उद्योगों पर पड़ा है। अब महाराष्ट्र, पंजाब, गुजरात, कर्नाटक व तमिलनाडु के उद्यमी उनके पास आते हैं और उत्तर प्रदेश में निवेश करने की इच्छा जताते हैं। कारण पूछने पर उनका जवाब होता है कि पहले यूपी से मैनपावर आ जाता था, अब यहां के लोगों ने बाहर जाना बंद कर दिया है। इसलिए उन्हें वहां उद्योग चलाने में मुश्किल हो रही है। वे अब यूपी में ही उद्योग लगाना चाहते हैं।
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पूर्वी उत्तर प्रदेश से शुरू होती थी ‘माफिया’ शब्द की चर्चा
पूर्वी उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की पुरानी स्थिति का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा कि एक समय ''''''''''''''''माफिया'''''''''''''''' शब्द की चर्चा पूर्वी उत्तर प्रदेश से ही शुरू होती थी। माफिया और मच्छर इस क्षेत्र की त्रासदी बन चुके थे। माफिया जनता का खून चूसता था और मच्छर बीमारियां पैदा करता था। पूर्वी उत्तर प्रदेश में सक्रिय दुर्दांत माफिया केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं थे, बल्कि उनके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी थे। ये माफिया राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन चुके थे। बीमारी और बेगारी के कारण यहां से बड़े पैमाने पर लोगों को पलायन करना पड़ा। उन्होंने सवाल किया कि 1947 के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश की उपेक्षा क्यों हुई? शिक्षा-स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करने से तत्कालीन सरकारों को किसने रोका?
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- 1947 के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश की उपेक्षा क्यों हुई, शिक्षा-स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करने से किसने रोका
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक टीवी चैनल के कॉन्क्लेव में साझा की पूर्वी उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा
गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश अपनी युवा शक्ति के बल पर तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है। यहां के युवाओं में कभी प्रतिभा और परिश्रम की कमी नहीं रही। युवाओं पर किसी तरह का लांछन लगाना उचित नहीं है। यहां कभी प्रतिभा की कमी नहीं थी, बल्कि पूर्ववर्ती सरकारें उचित प्लेटफॉर्म नहीं दे सकीं। जब युवाओं को प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने वाली सरकार आई तो हर क्षेत्र में उनके लिए अवसर तैयार किए गए। इसका परिणाम है कि आज प्रदेश का युवा हर जगह अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहा है।
मुख्यमंत्री मंगलवार को गोरखपुर में एक टीवी चैनल के ‘बदलता पूर्वी उत्तर प्रदेश’ कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यदि पहले प्रदेश के युवाओं की प्रतिभा और क्षमता का योगदान विकास में नहीं लिया जा सका तो इसमें युवाओं की कमी नहीं थी, बल्कि यह उस सिस्टम की कमी थी। इस क्षेत्र को कभी अपेक्षित प्रोत्साहन नहीं मिला। गुलामी के दौरान उपेक्षा का दंश झेलना समझा जा सकता है। लेकिन, आजादी के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश के विकास को लेकर ऐसी कोई मजबूरी नहीं थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय पूर्वी उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में लोग रजिस्टर्ड श्रमिक के रूप में मॉरीशस, फिजी समेत विभिन्न देशों में गए। आज उन्हीं लोगों के वंशज कई देशों में नेतृत्वकारी भूमिकाओं में हैं। पिछले नौ वर्षों में अकेले गोरखपुर में हुए निवेश से 50 हजार युवाओं को रोजगार मिला है।
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प्रति व्यक्ति आय तीन गुना से अधिक हुई
पिछले नौ वर्षों में प्रदेश अपनी अर्थव्यवस्था को तीन गुना करने में सफल रहा है। इस दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय तीन गुना से अधिक हुई है। पूरा विश्वास है कि अगले तीन वर्षों के भीतर उत्तर प्रदेश वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
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अब युवा बाहर नहीं जाते, उद्योग यहां आते हैं
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत राज्य के युवाओं का रोजगार के लिए बाहर जाना कम होने का असर दूसरे राज्यों के उद्योगों पर पड़ा है। अब महाराष्ट्र, पंजाब, गुजरात, कर्नाटक व तमिलनाडु के उद्यमी उनके पास आते हैं और उत्तर प्रदेश में निवेश करने की इच्छा जताते हैं। कारण पूछने पर उनका जवाब होता है कि पहले यूपी से मैनपावर आ जाता था, अब यहां के लोगों ने बाहर जाना बंद कर दिया है। इसलिए उन्हें वहां उद्योग चलाने में मुश्किल हो रही है। वे अब यूपी में ही उद्योग लगाना चाहते हैं।
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पूर्वी उत्तर प्रदेश से शुरू होती थी ‘माफिया’ शब्द की चर्चा
पूर्वी उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की पुरानी स्थिति का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा कि एक समय ''''''''''''''''माफिया'''''''''''''''' शब्द की चर्चा पूर्वी उत्तर प्रदेश से ही शुरू होती थी। माफिया और मच्छर इस क्षेत्र की त्रासदी बन चुके थे। माफिया जनता का खून चूसता था और मच्छर बीमारियां पैदा करता था। पूर्वी उत्तर प्रदेश में सक्रिय दुर्दांत माफिया केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं थे, बल्कि उनके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी थे। ये माफिया राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन चुके थे। बीमारी और बेगारी के कारण यहां से बड़े पैमाने पर लोगों को पलायन करना पड़ा। उन्होंने सवाल किया कि 1947 के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश की उपेक्षा क्यों हुई? शिक्षा-स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करने से तत्कालीन सरकारों को किसने रोका?