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शोध : बच्चों में कोविड का गंभीर खतरा कम, उच्च जोखिम को टीका जरूरी

Wed, 12 Aug 2026 02:40 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 12 Aug 2026 02:40 AM IST
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Study: Low risk of severe COVID in children; vaccination essential for high-risk group.
- सीरो सर्वे में 6-9 साल के 57.2 और 10-17 साल के 61.6 प्रतिशत बच्चों में मिली थी एंटीबॉडी
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- एम्स गोरखपुर के शोध में सामने आया, ओमिक्रॉन में छोटे बच्चों में बढ़े संक्रमण के मामले


गोरखपुर। कोविड संक्रमण का बच्चों पर असर आमतौर पर गंभीर नहीं रहा लेकिन उच्च जोखिम वाले के बच्चों में बीमारी गंभीर होने का खतरा अधिक हो सकता है। मोटापा, डायबिटीज, हृदय रोग, पुरानी फेफड़ों की बीमारी और कमजोर प्रतिरक्षा वाले बच्चों के साथ समय से पहले जन्मे बच्चों को संक्रमण से बचाव के लिए टीकाकरण में प्राथमिकता देने की जरूरत है। एम्स गोरखपुर के डॉक्टरों के शोध में यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है।
‘कोविड-19 वैक्सीनेशन इन चिल्ड्रन : ए ग्लोबल पर्सपेक्टिव’ शीर्षक से किए गए इस अध्ययन में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बच्चों में कोविड संक्रमण, बीमारी की गंभीरता, टीकों की सुरक्षा और उनकी उपलब्धता का अध्ययन किया गया है। शोध जर्नल ऑफ हेल्थ मैनेजमेंट में प्रकाशित हुआ है।
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शोध में भारत के चौथे राष्ट्रीय सीरो सर्वे के आंकड़ों को भी शामिल किया गया है। जून-जुलाई 2021 में हुए सर्वे में छह से नौ वर्ष की उम्र के 57.2 प्रतिशत और 10 से 17 वर्ष के 61.6 प्रतिशत बच्चों में कोविड के खिलाफ एंटीबॉडी मिली थी। खास बात यह थी कि उस समय इस आयु वर्ग के बच्चों का टीकाकरण शुरू नहीं हुआ था। शोधकर्ताओं के अनुसार संक्रमण के बाद बच्चों में विकसित हुई प्राकृतिक प्रतिरक्षा का संकेत देता है।
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नए वैरिएंट के आने से बदला संक्रमण का स्वरूप
अध्ययन के मुताबिक, 0 से 4 और 5 से 17 वर्ष के बच्चों में कोविड के कारण अस्पताल में भर्ती होने और मौत का जोखिम 18 से 29 वर्ष के लोगों की तुलना में कम रहा। हालांकि, नए वैरिएंट के आने के साथ संक्रमण का स्वरूप बदलता गया। ओमिक्रॉन के दौरान छोटे बच्चों में संक्रमण के मामले पहले की तुलना में अधिक मिले लेकिन गंभीर बीमारी का खतरा पुराने वैरिएंट की अपेक्षा कम रहा। शोधकर्ताओं के मुताबिक कोविड वैक्सीन संक्रमण को पूरी तरह रोक नहीं सकती लेकिन गंभीर बीमारी से बचाव में मदद करती है। ऐसे में हाई रिस्क बच्चों की पहचान कर उन्हें टीकाकरण में प्राथमिकता देना जरूरी है। यह रणनीति सीमित संसाधनों की स्थिति में भी अधिक प्रभावी हो सकती है।


टीके की उपलब्धता में भी बड़ी असमानता
शोधकर्ताओं के मुताबिक वैश्विक स्तर पर कोविड टीकों की उपलब्धता में असमानता पर भी चिंता जताई गई है। उच्च और मध्यम आय वाले देशों में कम से कम एक खुराक लेने वाली आबादी 74.3 प्रतिशत थी। निम्न-मध्यम आय वाले देशों में यह आंकड़ा 56.3 प्रतिशत और कम आय वाले देशों में केवल 18.2 प्रतिशत रहा। शोधकर्ताओं ने संसाधनों की सीमित उपलब्धता वाले क्षेत्रों में हाई रिस्क आबादी को प्राथमिकता देने पर जोर दिया है।



हाई रिस्क बच्चों में कौन शामिल
मोटापा, डायबिटीज, हृदय रोग, पुरानी फेफड़ों की बीमारी और कमजोर प्रतिरक्षा वाले बच्चों में कोविड संक्रमण गंभीर होने का खतरा अधिक हो सकता है। इसके अलावा समय से पहले जन्मे बच्चों को भी हाई रिस्क श्रेणी में रखा गया है। ऐसे बच्चों के लिए संक्रमण से बचाव, समय पर चिकित्सकीय सलाह और टीकाकरण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। अध्ययन में आरएमआरसी के निदेशक डॉ. हरि शंकर जोशी, एम्स गोरखपुर के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के डॉ. आनंद मोहन दीक्षित, डॉ. अनिल रमेश कोपरकर, डॉ. प्रदीप खरया, डॉ. रामाशंकर रथ, माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉ. अरूप मोहंती और बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. महिमा मित्तल शामिल रहीं।
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