{"_id":"6a52b215dfcbcb71a903e6d6","slug":"experts-from-india-and-abroad-explained-the-correct-investigation-procedure-using-case-based-learning-gorakhpur-news-c-7-gkp1062-1382993-2026-07-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: हड्डी रोगों का इलाज सिर्फ आधुनिक जांचों पर नहीं, डॉक्टर की सही समझ पर निर्भर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: हड्डी रोगों का इलाज सिर्फ आधुनिक जांचों पर नहीं, डॉक्टर की सही समझ पर निर्भर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोरखपुर। हड्डी से जुड़ी बीमारियों का सही इलाज सिर्फ आधुनिक जांचों पर नहीं बल्कि डॉक्टरों की सही समझ पर भी निर्भर करता है। यह बात बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में शनिवार से शुरू हुए पीजीआईसीएल-2026 के पहले दिन सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्थोपेडिक्स, सफदरजंग अस्पताल, दिल्ली के निदेशक डॉ. सुमित सुराल ने कही।
कार्यक्रम में देश-विदेश के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने पीजी छात्रों, सीनियर रेजीडेंट्स और युवा हड्डी रोग विशेषज्ञों को मरीज की जांच और बीमारी की सही पहचान के व्यावहारिक तरीके बताए। पूरे दिन चले सत्रों में इस बात पर जोर दिया गया कि किसी भी मरीज का इलाज शुरू करने से पहले उसकी सही जांच और मूल्यांकन बेहद जरूरी है।
उत्तर प्रदेश ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के तत्वावधान में इस कार्यक्रम का आयोजन गोरखपुर ऑर्थोपेडिक क्लब और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग की ओर से किया जा रहा है। उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि मेयर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव रहे। आयोजन अध्यक्ष प्रो. डॉ. अमित मिश्रा और आयोजन सचिव डॉ. अतिल के. लाल ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया।
विज्ञापन
वैज्ञानिक सत्र की शुरुआत डॉ. सुनील कुमार के व्याख्यान से हुई। उन्होंने कहा कि किसी भी बीमारी की सही पहचान मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री जानने से शुरू होती है। इसके बाद डॉ. विपुल अग्रवाल ने कूल्हे की जांच का आसान और चरणबद्ध तरीका समझाया। आयोजन अध्यक्ष डॉ. अमित मिश्रा ने घुटने की बीमारियों और चोटों की पहचान के लिए जरूरी जांचों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि एक अच्छे हड्डी रोग विशेषज्ञ की पहचान उसकी चिकित्सकीय जांच की क्षमता से होती है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य युवा डॉक्टरों को इतना सक्षम बनाना है कि वे केवल जांच रिपोर्टों पर निर्भर न रहें बल्कि अपने ज्ञान, अनुभव और मरीज की जांच के आधार पर सही निदान कर सकें।
विज्ञापन
कार्यक्रम में देश-विदेश के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने पीजी छात्रों, सीनियर रेजीडेंट्स और युवा हड्डी रोग विशेषज्ञों को मरीज की जांच और बीमारी की सही पहचान के व्यावहारिक तरीके बताए। पूरे दिन चले सत्रों में इस बात पर जोर दिया गया कि किसी भी मरीज का इलाज शुरू करने से पहले उसकी सही जांच और मूल्यांकन बेहद जरूरी है।
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के तत्वावधान में इस कार्यक्रम का आयोजन गोरखपुर ऑर्थोपेडिक क्लब और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग की ओर से किया जा रहा है। उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि मेयर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव रहे। आयोजन अध्यक्ष प्रो. डॉ. अमित मिश्रा और आयोजन सचिव डॉ. अतिल के. लाल ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया।
विज्ञापन
वैज्ञानिक सत्र की शुरुआत डॉ. सुनील कुमार के व्याख्यान से हुई। उन्होंने कहा कि किसी भी बीमारी की सही पहचान मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री जानने से शुरू होती है। इसके बाद डॉ. विपुल अग्रवाल ने कूल्हे की जांच का आसान और चरणबद्ध तरीका समझाया। आयोजन अध्यक्ष डॉ. अमित मिश्रा ने घुटने की बीमारियों और चोटों की पहचान के लिए जरूरी जांचों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि एक अच्छे हड्डी रोग विशेषज्ञ की पहचान उसकी चिकित्सकीय जांच की क्षमता से होती है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य युवा डॉक्टरों को इतना सक्षम बनाना है कि वे केवल जांच रिपोर्टों पर निर्भर न रहें बल्कि अपने ज्ञान, अनुभव और मरीज की जांच के आधार पर सही निदान कर सकें।