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फर्जी IPS की कहानी: पैतृक संपत्ति बेची, नेपाल के कसीनो में हारा करोड़ों रुपये...बन गया कर्जदार; अब करता ये काम

अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 21 Jan 2026 03:37 PM IST
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सार

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के चपरासी शनि शर्मा पर हर रोज नए तथ्य सामने आ रहे हैं। जिस विश्वविद्यालय में वह कर्मचारी था, वहां भी शिक्षकों, कर्मचारियों से लेकर आउटसोर्सिंग कर्मचारियों तक से ठगी की। एक शिक्षक से तो उनकी पत्नी के ट्रांसफर के नाम पर 40 हजार रुपये ऐंठ लिए।

Fake IPS Story: Sold Ancestral Property Lost Crores in Nepal Casino, Now Trapped in Debt
Fake IPS - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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गोरखपुर में खुद को आईपीएस अधिकारी बता लोगों को डराने-धमकाने और ठगी करने वाले शनि शर्मा ने पैतृक संपत्ति बेचकर नेपाल के कसीनो में करोड़ों रुपये गंवा दिए। आर्थिक तंगी बढ़ने पर उसने किराना दुकानदारों, कपड़ा व्यापारियों से लेकर शिक्षण संस्थानों तक से लाखों रुपये कर्ज लिए थे। रुपये मांगने पर दूसरी पत्नी के जरिए फर्जी केस में फंसाने की धमकी देता था।
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शनि की पहली पत्नी पूजा ने बताया कि शनि शर्मा ने बगही नगरी में स्थित करीब 55 लाख रुपये की संपत्ति के अलावा भरोहिया क्षेत्र के खेत और बाग तक बेच डाले। पूरी रकम वह नेपाल में जुए में हार गया। कर्ज बढ़ने के साथ उसकी गतिविधियां भी आपराधिक होती चलीं गईं। 
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पूजा ने बताया कि शनि लगातार धमकियों के कारण वह अपने बच्चों को लेकर डर के साए में जी रही है। बड़ी बहन धर्मशाला में बच्चों के साथ रह रही है जबकि वह बुजुर्ग माता-पिता के साथ गुमनाम जिंदगी जीने को मजबूर है। उसे आशंका है कि शनि कभी भी बच्चों या माता पिता को नुकसान पहुंचा सकता है। 

पीपीगंज स्थित एक शॉपिंग मार्ट के मैनेजर विजय अग्रहरी ने बताया कि शनि और उसकी पत्नी अमृता एक वर्ष से लगभग 20 हजार रुपये का किराने का सामान ले चुके हैं लेकिन भुगतान मांगने पर वह खुद को अधिकारी बताकर रौब दिखाता था। उसकी दूसरी पत्नी भी धमकी देती थी।

दूसरी पत्नी के नाम पर लोगों पर बनाता था दबाव
शनि की दूसरी पत्नी वाराणसी के बड़हलगंज क्षेत्र की रहने वाली बताई जा रही है। उसकी मां लहसड़ी स्थित एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षिका है। वहीं उसकी दूसरी पत्नी के मुंहबोले भाई अमित दुबे ने भी शनि पर ठगी का आरोप लगाया है। उसने बताया कि नौकरी दिलाने के नाम पर उसे भी ठगा गया। अमित का कहना है कि उसे पहले से शनि की गतिविधियों पर संदेह था लेकिन जब धोखा अपनों से मिला तो वह पूरी तरह टूट गया। वर्तमान में उसका अपनी बहन से भी कोई संबंध नहीं है।

 

वर्तमान मकान पर ले रखा है स्टे
पूजा ने बताया कि सारी संपत्ति बेचने के बाद शनि वर्तमान में लिए पीपीगंज में कई लोगों से उसने रुपये ले रखे थे। जानकारी के बाद पूजा ने एक अधिवक्ता के जरिए उस पर स्टे ले लिया। इसके बाद से वह और खुन्नस रखने लगा और आए दिन कॉल कर धमकी दे रहा था।

अस्पताल संचालक और स्कूल प्रबंधक से भी लिए थे रुपये
पीपीगंज के मुख्य मार्ग पर स्थित एक अस्पताल के चिकित्सक डॉ. परमात्मा मद्धेशिया से शनि ने खुद को आईपीएस बताकर संपर्क किया था। शनि ने पुलिस की वर्दी में अपना फोटो व्हाट्सएप पर भेजा था और अस्पताल बंद कराने की धमकी दी थी। रुपये की मांग करने के साथ ही मुफ्त दवाएं देने का भी दबाव बनाता था। 
 

शिकायत पर लगातार फोन कर धमकियां दे रहा था। डॉ. मद्धेशिया ने पुलिस को यह भी बताया कि शनि के भाई ने उनसे 30 हजार रुपये बिजली बिल जमा करने के नाम पर लिए थे और हड़प लिया। इधर, पीपीगंज के एक निजी स्कूल के प्रबंधक राजन पाठक से भी गोरखपुर यूनिवर्सिटी में दाखिला कराने के लिए रुपये दिए थे। न तो एडमिशन हुआ और न ही शनि ने रुपये लौटाए। शिकायत पर दूसरी पत्नी के जरिए फर्जी मुकदमा दर्ज कराने की धमकी देने लगा था।

 

दबाव बनाने के लिए साली के बेटे को किया था अगवा
शनि की पत्नी पूजा ने बताया कि पति की करतूतों से तंग आकर उसने घरेलू हिंसा और भरण-पोषण से जुड़े मामले दर्ज कराए थे। दूसरी पत्नी खुशबू के शैक्षिक प्रमाणपत्र भी उसने अपने पास रख लिए थे जिसे वापस लेने का दबाव बनाने के लिए शनि ने उसकी सगी बहन के बेटे का अपहरण कर लिया था। वह जिस खुशबू के साथ वर्तमान में रह रहा है उसके शैक्षणिक प्रमाण पत्र, जेवरात वापस करने और केस खत्म करने का दबाव बना रहा था। पूजा ने यह भी आरोप लगाया कि शनि ने यूनिवर्सिटी में उसके नाम का दुरुपयोग कर दूसरी पत्नी के माध्यम से झूठी शिकायत दर्ज कराई थी, हालांकि बाद में उसने स्वयं यूनिवर्सिटी पहुंचकर अपना पक्ष रखा जिसके बाद मामले की जांच शुरू कराई गई। पुलिस ने सर्विलांस की मदद से शनि को गिरफ्तार किया था, लेकिन वह महज 16 दिन जेल में रहने के बाद जमानत पर बाहर आ गया। उसके बाद से लगातार धमकियां देता रहा है।
 

शिक्षक, कर्मचारी से लेकर आउटसोर्सिंग कर्मियों तक से की ठगी
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के चपरासी शनि शर्मा पर हर रोज नए तथ्य सामने आ रहे हैं। जिस विश्वविद्यालय में वह कर्मचारी था, वहां भी शिक्षकों, कर्मचारियों से लेकर आउटसोर्सिंग कर्मचारियों तक से ठगी की। एक शिक्षक से तो उनकी पत्नी के ट्रांसफर के नाम पर 40 हजार रुपये ऐंठ लिए। 

थक-हारकर शिक्षक ने पैसे मांगने ही छोड़ दिए। विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय के शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि करीब दो वर्ष पहले उनसे पैसे लिए थे। कई बार कहने के बाद भी उसने पैसे वापस नहीं किए। शनि ने उनका फोन भी उठाना बंद कर दिया। 
 


बताया जा रहा है कि संबंधित शिक्षक की पत्नी तब दूसरे जिले में सरकारी सेवा में नियुक्त थीं। शनि शर्मा ने आश्वासन दिया था कि अपनी पहुंच के बल पर वह कुछ ही दिनों में ट्रांसफर करा देगा। इसके बाद शिक्षक ने पैसे दिए थे। 

कई महीने बीतने के बाद शिक्षक को ठगी का पता चला। विश्वविद्यालय में तैनात एक आउटसोर्सिंग कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उसे नौकरी से निकलवाने की धमकी देकर खर्च के लिए अक्सर पैसे लेता था। 
 

उसके खिलाफ शिकायत की कभी हिम्मत नहीं कर पाया। कई कर्मचारियों को उसने इमोशनली ब्लैकमेल कर 500 से 2000 रुपये तक लिए। चपरासी के कारनामों को लेकर विश्वविद्यालय में इस समय खूब चर्चाएं हो रही हैं।
 

फर्जी आईपीएस बनकर ठगी और धमकी देने से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और पीड़ितों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।-अनुराग सिंह, सीओ कैंपियरगंज
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