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लोकगीत हमारी मिट्टी की स्मृति हैं : डॉ. आद्या प्रसाद
Mon, 03 Aug 2026 02:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Mon, 03 Aug 2026 02:32 AM IST
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पुरवाई कला की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में सम्मानित लोगों के साथ अतिथि।
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गोरखपुर। लोकगीत हमारी मिट्टी की स्मृति हैं। इनमें खेतों की महक, आंगन की खनक, चूल्हे की आंच और लोकजीवन की आत्मा बसती है। यदि लोकगीतों को केवल मनोरंजन की दृष्टि से देखा जाएगा तो उनके व्यापक अर्थ संसार को समझना संभव नहीं होगा।
ये बातें वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के पूर्व कला संकायाध्यक्ष डॉ. आद्या प्रसाद द्विवेदी ने रविवार को विजय चौक स्थित एक निजी होटल में पुरवाई कला की ओर से आयोजित नमन राजीव कार्यक्रम में कही। कार्यक्रम की शुरुआत संस्था के वार्षिक पुरवाई लोक कला सम्मान से हुई। इस वर्ष वरिष्ठ श्रेणी में अंतरराष्ट्रीय लोकगायक एवं आकाशवाणी के प्रथम श्रेणी कलाकार रामदरश शर्मा तथा युवा श्रेणी में अंतरराष्ट्रीय लोकगायक पवन पंछी को भोजपुरी लोकसंगीत के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
संस्था प्रत्येक वर्ष लोककला और लोकसंगीत के क्षेत्र में योगदान देने वाले वरिष्ठ और युवा कलाकारों को यह सम्मान प्रदान करती है। इसके बाद लोकगीतों में स्त्री अस्मिता और आत्मसम्मान का स्वर विषय पर संगोष्ठी हुई। मुख्य वक्ता डॉ. दुर्गेश उपाध्याय ने कहा कि लोकगीतों को केवल कानों से नहीं, बल्कि लोकमन से सुनना चाहिए। अध्यक्षता करते हुए प्रो. अनुभूति दुबे ने कहा कि लोकगीत समाज की आत्मा हैं, जिनमें स्त्री के जीवन, संघर्ष और संवेदनाओं का सजीव चित्रण मिलता है।
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विशिष्ट अतिथि सुधा मोदी ने भी लोकगीतों को स्त्री अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बताया। कार्यक्रम में दिवंगत डॉ. राजीव केतन को भावांजलि अर्पित की गई। महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव सहित कई वक्ताओं ने उनके योगदान को याद किया। अंत में रामदरश शर्मा, पवन पंछी, डॉ. दुर्गेश उपाध्याय, राकेश श्रीवास्तव और पूजा मौर्या सहित कलाकारों ने पारंपरिक लोकगीतों की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
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ये बातें वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के पूर्व कला संकायाध्यक्ष डॉ. आद्या प्रसाद द्विवेदी ने रविवार को विजय चौक स्थित एक निजी होटल में पुरवाई कला की ओर से आयोजित नमन राजीव कार्यक्रम में कही। कार्यक्रम की शुरुआत संस्था के वार्षिक पुरवाई लोक कला सम्मान से हुई। इस वर्ष वरिष्ठ श्रेणी में अंतरराष्ट्रीय लोकगायक एवं आकाशवाणी के प्रथम श्रेणी कलाकार रामदरश शर्मा तथा युवा श्रेणी में अंतरराष्ट्रीय लोकगायक पवन पंछी को भोजपुरी लोकसंगीत के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
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संस्था प्रत्येक वर्ष लोककला और लोकसंगीत के क्षेत्र में योगदान देने वाले वरिष्ठ और युवा कलाकारों को यह सम्मान प्रदान करती है। इसके बाद लोकगीतों में स्त्री अस्मिता और आत्मसम्मान का स्वर विषय पर संगोष्ठी हुई। मुख्य वक्ता डॉ. दुर्गेश उपाध्याय ने कहा कि लोकगीतों को केवल कानों से नहीं, बल्कि लोकमन से सुनना चाहिए। अध्यक्षता करते हुए प्रो. अनुभूति दुबे ने कहा कि लोकगीत समाज की आत्मा हैं, जिनमें स्त्री के जीवन, संघर्ष और संवेदनाओं का सजीव चित्रण मिलता है।
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विशिष्ट अतिथि सुधा मोदी ने भी लोकगीतों को स्त्री अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बताया। कार्यक्रम में दिवंगत डॉ. राजीव केतन को भावांजलि अर्पित की गई। महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव सहित कई वक्ताओं ने उनके योगदान को याद किया। अंत में रामदरश शर्मा, पवन पंछी, डॉ. दुर्गेश उपाध्याय, राकेश श्रीवास्तव और पूजा मौर्या सहित कलाकारों ने पारंपरिक लोकगीतों की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को यादगार बना दिया।