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आयुष विश्वविद्यालय : नियुक्ति नहीं होने से प्रभावित हो रही व्यवस्था
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गोरखपुर। महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय में नियुक्ति प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है। इसका असर स्पष्ट रूप से व्यवस्था पर पड़ रहा है। पढ़ाई से लेकर इलाज तक की गुणवत्ता पर इसका असर दिख रहा है।
बताया जा रहा है कि विश्वविद्यालय में शिक्षकों, चिकित्सकों और कर्मचारियों के कुल 133 पदों पर नियुक्ति होनी है। इसमें शिक्षकों की नियुक्ति विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से की जानी है, जबकि अन्य नियुक्तियां उप्र लोक सेवा आयोग की तरफ से होनी हैं। जून 2025 में विश्वविद्यालय के लोकार्पण के बाद उम्मीद जगी थी कि जल्द ही सभी पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकालकर भर्ती प्रक्रिया शुरू हो जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
सूत्रों के मुताबिक, विश्वविद्यालय में शिक्षकों के कुल 42 पद रिक्त हैं, जिनमें प्रोफेसर, एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसर के 14-14 पद शामिल हैं। आयुर्वेद संकाय में तकनीकी के 38 और आयुर्वेद चिकित्सालय में 53 पद सृजित हैं। स्थायी नियुक्ति नहीं होेने के कारण कुछ चिकित्सकों को दूसरे संस्थानों से विश्वविद्यालय में संबद्ध किया गया है तो कई पदों पर संविदा आधार पर नियुक्ति हुई है।
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इस संबंध में कुलसचिव अजीत जायसवाल ने बताया कि आगामी कार्य परिषद की बैठक में शिक्षकों की नियुक्ति का प्रस्ताव रखे जाने की योजना है। व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए संविदा पर शिक्षकों नियुक्त किए गए हैं।
बताया जा रहा है कि विश्वविद्यालय में शिक्षकों, चिकित्सकों और कर्मचारियों के कुल 133 पदों पर नियुक्ति होनी है। इसमें शिक्षकों की नियुक्ति विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से की जानी है, जबकि अन्य नियुक्तियां उप्र लोक सेवा आयोग की तरफ से होनी हैं। जून 2025 में विश्वविद्यालय के लोकार्पण के बाद उम्मीद जगी थी कि जल्द ही सभी पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकालकर भर्ती प्रक्रिया शुरू हो जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
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सूत्रों के मुताबिक, विश्वविद्यालय में शिक्षकों के कुल 42 पद रिक्त हैं, जिनमें प्रोफेसर, एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसर के 14-14 पद शामिल हैं। आयुर्वेद संकाय में तकनीकी के 38 और आयुर्वेद चिकित्सालय में 53 पद सृजित हैं। स्थायी नियुक्ति नहीं होेने के कारण कुछ चिकित्सकों को दूसरे संस्थानों से विश्वविद्यालय में संबद्ध किया गया है तो कई पदों पर संविदा आधार पर नियुक्ति हुई है।
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