Ground Report: यूपी का पहला गांव जहां महिलाएं खुद जांचती हैं पानी की गुणवत्ता, जांच के लिए बना है जलसखी समूह
यूपी का पहला ऐसे गांव हैं, जहां महिलाएं खुद पानी की गुणवत्ता जांचती हैं। कभी इस गांव के लोग पहचान के मोहताज थे। आज हर सुविधाएं मुहैया हैं। समूह की एक सदस्य को दिल्ली में 11 मार्च 2026 को जलसखी समूह की ज्योति को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने सम्मानित किया।
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गोरखपुर शहर से तकरीबन 12 किमी दूर जंगलों के बीच एक गांव है वनटांगिया, जंगल तिनकोनिया नंबर तीन। दो दशक पहले तक गांव के लोग पहचान के मोहताज थे। शिक्षा कोसों दूर थी और कमाई का सिर्फ एक जरिया मजदूरी। अब गांव के स्कूल में ही स्मार्ट क्लास हैं, जहां बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं।
लड़कियां टीचर और पुलिस में भर्ती होना चाहती हैं। महिलाएं अब मजदूरी और पत्तल के पुश्तैनी काम की जगह खुद का रोजगार करने लगी हैं। यह यूपी का पहला गांव भी है जहां हर घर में पानी की गुणवत्ता की जांच खुद महिलाओं की टीम करती है, जिसका नाम दिया गया है जलसखी।
स्मार्ट क्लास में पढ़ते हैं बच्चे...कोई टीचर तो कोई बनना चाहता है दरोगा
पहले गांव में साक्षरता की दर बहुत ही कम थी। ज्यादातर लोग कक्षा पांचवीं से लेकर आठवीं तक पढ़े हैं। अब बच्चे पढ़कर भविष्य संवारने में जुटे हैं। कोई टीचर तो किसी का सपना दरोगा बनने का है। ममता गोंड ने बताया कि वह बीए तृतीय वर्ष की छात्रा हैं, उनका सपना दरोगा बनने का है क्योंकि वर्दी उन्हें बचपन से अच्छी लगती है।
हमारे गांव में एक भी पक्का मकान नहीं था, झोपड़ी ही थी। घर के बाहर जलभराव रहता था। अब स्वच्छ पानी की आपूर्ति हर घर में है। महिलाएं किट लेकर आती हैं और पानी की जांच करती हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चलते मेरा गांव चमक गया और लोगों की तकदीर बदल गई।-शिवधारी
गांव में हर साल मुख्यमंत्री आते हैं और कुछ दूर तक जाकर देखते हैं। फिर हम लोगों के साथ दिवाली मनाते हैं। अब गांव के बच्चे पढ़ने जाते हैं और महिलाएं पशुपालन, सब्जियों की खेती करती हैं। सभी लोगों का आयुष्मान कार्ड भी बन गया है। राजस्व ग्राम तो हो गया है अब खतौनी में अलग-अलग नाम चढ़ना बाकी है, जिसकी प्रक्रिया चल रही है।-पतिराजी देवी
100 साल उपेक्षा का दंश झेलने के बाद अब चमकने लगा गांव
सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2007 में बतौर सांसद रहते इस गांव के लोगों के दयनीय हालात को सुधारने के लिए संघर्ष किया। वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री बने तो वनटांगिया गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा देकर उन्हें शासन प्रदत्त सभी सुविधाओं का हकदार बना दिया। करीब 100 साल तक उपेक्षा का दंश झेलने वाले वनटांगिया गांव की तकदीर अब बदल चुकी है। दिसंबर 2026 में वनटांगिया गांव जंगल तिनकोनिया नंबर तीन प्रदेश का पहला और देश का दूसरा 'जल अर्पण गांव' बन गया।