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UP: सात साल बाद नेपाल से मिली ये रिपोर्ट, फिर खुली फाइल; राखी हत्याकांड की पूरी कहानी
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 01 Feb 2026 03:32 PM IST
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सार
गोरखपुर की राखी हत्याकांड में सात साल बाद नेपाल से पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली है। फिर विवेचना शुरू हो गई है। नेपाल के सारंगकोट में राखी का अपहरण करके हत्या की गई थी।
gorakhpur murder
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
नेपाल में साल 2018 में हुई गोरखपुर के शाहपुर इलाके की राजेश्वरी उर्फ राखी श्रीवास्तव की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की फाइल सात साल बाद फिर से खुल गई है। इस मामले में हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर एक डॉक्टर और दो कर्मचारियों को आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया गया था।
सात साल बाद अब नेपाल से पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली है। इसे पुलिस ने केस डायरी में शामिल किया है। अब आगे की विवेचना शुरू कर दी गई है। इससे आरोपियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
शाहपुर क्षेत्र की रहने वाली राखी अपने पति मनीष सिन्हा के साथ वर्ष 2018 में नेपाल भ्रमण पर गई थीं। इसी दौरान नेपाल के कास्की जिले के सारंगकोट क्षेत्र में राखी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। राखी के भाई अमर प्रकाश श्रीवास्तव ने हत्या को दुर्घटना का रूप देने के लिए पहाड़ से धक्का देने की साजिश का आरोप लगाया।
एसटीएफ ने दिसंबर 2018 में इस बहुचर्चित हत्याकांड का पर्दाफाश करते हुए शहर के एक चिकित्सक डॉ. डीपी सिंह और उनके दो कर्मचारियों संतोष कुमार और देशदीपक को गिरफ्तार किया था। आरोपियों से पूछताछ में यह सामने आया कि चिकित्सक का राखी से वर्षों पुराना संपर्क था।
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सात साल बाद अब नेपाल से पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली है। इसे पुलिस ने केस डायरी में शामिल किया है। अब आगे की विवेचना शुरू कर दी गई है। इससे आरोपियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
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शाहपुर क्षेत्र की रहने वाली राखी अपने पति मनीष सिन्हा के साथ वर्ष 2018 में नेपाल भ्रमण पर गई थीं। इसी दौरान नेपाल के कास्की जिले के सारंगकोट क्षेत्र में राखी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। राखी के भाई अमर प्रकाश श्रीवास्तव ने हत्या को दुर्घटना का रूप देने के लिए पहाड़ से धक्का देने की साजिश का आरोप लगाया।
एसटीएफ ने दिसंबर 2018 में इस बहुचर्चित हत्याकांड का पर्दाफाश करते हुए शहर के एक चिकित्सक डॉ. डीपी सिंह और उनके दो कर्मचारियों संतोष कुमार और देशदीपक को गिरफ्तार किया था। आरोपियों से पूछताछ में यह सामने आया कि चिकित्सक का राखी से वर्षों पुराना संपर्क था।
जांच में यह भी पता चला कि घटना के बाद आरोपी, परिवार और पुलिस को गुमराह करने के लिए यह दिखाने की कोशिश कर रहे थे कि राखी जीवित है। करीब छह महीने तक उसकी फेसबुक आईडी को सक्रिय रखा गया और नियमित पोस्ट व गतिविधियों के जरिये सभी को भटका कर रखा गया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सात साल बाद प्राप्त पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि होने के बाद अब मामले में आगे की कार्रवाई तेज कर दी गई है। केस डायरी में पोस्टमार्टम रिपोर्ट को शामिल कर पुलिस ने आगे के साक्ष्य इकट्ठा करने और आरोपियों के खिलाफ गंभीर कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
राजेश्वरी के बड़े भाई अमर प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि एसपी सिटी से तीन दिन पहले ही मिला था और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को विवेचना में शामिल करने का अनुरोध किया था। इस संबंध में डॉक्टर डीपी सिंह से उनका पक्ष लेने की कोशिश की गई लेकिन बात नहीं हो सकी। जब भी उनका पक्ष मिलेगा, उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
23 अप्रैल 2019 को आरोपियों के खिलाफ दाखिल की गई थी चार्जशीट
राखी की हत्या में आरोपी डॉ. डीपी सिंह और उनके दोनों कर्मचारियों संतोष कुमार और देशदीपक के खिलाफ पुलिस ने 23 अप्रैल 2019 को चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद तत्कालीन एसएसपी ने राखी का पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल मंगवाने के लिए नेपाल पुलिस को पत्र लिखा था।
राखी की हत्या में आरोपी डॉ. डीपी सिंह और उनके दोनों कर्मचारियों संतोष कुमार और देशदीपक के खिलाफ पुलिस ने 23 अप्रैल 2019 को चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद तत्कालीन एसएसपी ने राखी का पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल मंगवाने के लिए नेपाल पुलिस को पत्र लिखा था।
पत्नी से विवाद के बाद राखी से बढ़ी थी डॉक्टर की नजदीकी
पुलिस के मुताबिक, डॉ. डीपी सिंह से संपर्क खत्म होने के बाद राखी ने साल 2018 के फरवरी में बिहार के रहने वाले मनीष सिन्हा से दूसरी शादी कर ली। उधर डॉक्टर और उनकी पत्नी में विवाद शुरू हो गया। इसके बाद डॉक्टर ने राखी से एक बार फिर नजदीकी बढ़ा ली।
पुलिस के मुताबिक, डॉ. डीपी सिंह से संपर्क खत्म होने के बाद राखी ने साल 2018 के फरवरी में बिहार के रहने वाले मनीष सिन्हा से दूसरी शादी कर ली। उधर डॉक्टर और उनकी पत्नी में विवाद शुरू हो गया। इसके बाद डॉक्टर ने राखी से एक बार फिर नजदीकी बढ़ा ली।
आरोप है कि राखी डॉक्टर को ब्लैकमेल भी करने लगी थी। तब डॉ. डीपी सिंह ने राखी को रास्ते से हटाकर इस मामले को खत्म करने की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने इसके लिए अपने ड्राइवर प्रमोद कुमार सिंह और कर्मचारी देशदीपक को तैयार किया। कर्मचारी पांच हजार रुपये वेतन वृद्धि की लालच में तैयार हो गए थे। जब राखी अपने पति के साथ नेपाल पहुंची, तब डॉक्टर को जानकारी हो गई।
उसने मिलने के लिए कहा तो राखी ने पति को यह कहते हुए घर भेज दिया कि वह अभी यहां रुकेंगी, क्योंकि उसे कुछ और काम है। आरोप है कि पति के जाने के बाद डॉ. डीपी सिंह अपने कर्मचारियों के साथ पहुंच गए और फिर वारदात को अंजाम दिया।
पिता की खराब तबीयत के दौरान डॉक्टर के संपर्क में आई राखी
2006-07 में राखी के पिता हरेराम श्रीवास्तव की तबीयत खराब हो गई थी। उन्हें डॉ. डीपी सिंह के हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। तीमारदार के रूप में राखी पिता के साथ रही, इस बीच डॉक्टर से उनकी नजदीकी बढ़ी।
2006-07 में राखी के पिता हरेराम श्रीवास्तव की तबीयत खराब हो गई थी। उन्हें डॉ. डीपी सिंह के हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। तीमारदार के रूप में राखी पिता के साथ रही, इस बीच डॉक्टर से उनकी नजदीकी बढ़ी।
राखी ने पत्नी का दर्जा देने का दबाव बनाना शुरू किया तो आरोप है कि फरवरी 2011 में गोंडा में डॉ. डीपी सिंह ने राखी से शादी कर ली। इस शादी के बारे में उस समय डॉ. डीपी सिंह की पहली पत्नी ऊषा सिंह को जानकारी नहीं थी। राखी को डॉक्टर ने सरस्वतीपुरम, बिछिया, थाना शाहपुर गोरखपुर में एक मकान खरीद कर दिया था।
वहीं, जब डॉ. डीपी सिंह की पहली पत्नी को इस शादी की जानकारी हुई तो वह स्तब्ध रह गईं। विवाद बढ़ने पर डॉक्टर ने राखी से किनारा कर लिया, जिसके बाद राखी ने डॉक्टर के खिलाफ कैंट थाने में दुष्कर्म की प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
मामले की विवेचना में नेपाल में हुई घटनाओं के सबूत, आरोपी चिकित्सक और उसके कर्मचारियों के संपर्क और सोशल मीडिया गतिविधियों का विश्लेषण अहम भूमिका निभाएगा। मामले की जांच कर आरोपियों को कानून के कटघरे में लाया जाएगा।- रवि सिंह, सीओ कैंट
