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रहें होशियार: खोआ की मिठाई में मिला रहे अन्न अरारोट...टूट जाएगा व्रत

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 23 Mar 2026 02:42 AM IST
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In pursuit of profit, traders are also mixing flour and milk powder in khoya.
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मुनाफे के चक्कर में धंधेबाज खोआ में मिला मैदा और मिल्क पाउडर भी मिला रहे
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बार-बार प्रयोग किया गया व खराब रिफाइंड तेल से तैयार कर रहे व्रत की खाद्य सामग्री
नवरात्र में जिले में लगभग 15 क्विंटल बर्फी व खोआ खपत होने का अनुमान



गोरखपुर। चैत्र नवरात्र व्रत के फलाहारों में भी धंधेबाजी शुरू हो गई है। मुनाफे के चक्कर में धंधेबाज खोआ की मिठाई में अन्न अरारोट, मैदा और मिल्क पाउडर की मिलावट कर रहे हैं। यह भी खबर है कि धंधेबाज खराब रिफाइंड तेल का इस्तेमाल कर बर्फी व खोआ तैयार कर रहे हैं। ऐसे में विश्वसनीय दुकान से ही बर्फी-खोआ की खरीदारी करें वरना व्रत टूट जाएगा।

शुद्ध खोआ के व्यापारियों के मुताबिक, चैत्र नवरात्र में जिले में लगभग 15 क्विंटल बर्फी व खोआ की खपत का अनुमान लगाया जा रहा है, जिसे लोग व्रत में प्रयोग करने के लिए खरीदते हैं। बाजार में खोआ से तैयार बर्फी 400 रुपये किलो तक मिल जा रही है। वहीं खोआ कानपुरी 280 रुपये किलो व लोकल 200 रुपये किलो खोआ मंडी में बिक रहा है।
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सूत्रों के मुताबिक, कुछ धंधेबाज अधिक मुनाफा कमाने के लिए बर्फी और खोआ में अरारोट, मैदा और मिल्क पाउडर की मिलावट कर रहे हैं। इतना ही नहीं, व्रत के लिए बनने वाले खाद्य पदार्थों को बार-बार प्रयोग किए गए व खराब रिफाइंड तेल में तैयार किया जा रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है। दो दिन पहले खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने एक मिठाई की दुकान पर छापा मारकर खोआ से तैयार मिठाई का नमूना लिया था और मिलावट का संदेह होने पर जांच के लिए लैब भेजा है।
आजाद चौक स्थित मिठाई की दुकान पर काम करने वाले हलवाई हनुमान गुप्ता बताते हैं-मिठाई खरीदते समय उसकी गुणवत्ता, रंग और गंध पर विशेष ध्यान दें, जिससे उनका व्रत पूर्ण हो सके। शुद्ध खोआ की मिठाई को उसके दानेदार बनावट, हल्की दूधिया खुशबू और हथेली पर मसलने पर निकलने वाले प्राकृतिक घी से पहचाना जा सकता है। असली खोआ चिकना होता है और रगड़ने पर टूटता नहीं, जबकि नकली खोआ रबर जैसा या बहुत चिपचिपा होता है।
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शुद्धता पर दें ध्यान वरना हो सकती है पेट की बीमारी

जिला अस्पताल के डॉ. प्रशांत सिंह ने बताया कि चैत्र नवरात्र में व्रत रहने के दौरान शुद्ध खाद्य पदार्थों का चयन कर ही ग्रहण करें। व्रत में अनाज पेट में नहीं जाता है, ऐसे में फलाहार अगर शुद्ध नहीं हैं तो यह तत्काल नुकसान पहुंचाते हैं। इससे व्रत रह रहे लोगों का पाचन तंत्र खराब हो सकता है। पेट की बीमारी भी हो सकती है।
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आस्था के साथ नहीं होना चाहिए खिलवाड़
गोरखनाथ संस्कृत विद्यापीठ स्नातकोत्तर महाविद्यालय के वेद विभागाध्यक्ष डॉ. रंगनाथ त्रिपाठी ने बताया कि व्रत में कोशिश करें कि बाहर का बना हुआ कुछ न खाएं। व्रत के दौरान अगर खाना ही है तो फल खरीदें और इसे अच्छे से धोकर खाएं। बाजार में बिक रही फलाहार खाद्य सामग्री में मिलावट की दिक्कत हो सकती है। उन्होंने कहा कि बाजार में बिकने वाली फलाहार सामग्री को शुद्ध बनाना व परोसना दुकानदार की जिम्मेदारी है। अगर ऐसा नहीं है तो यह सरासर गलत है। व्रत रखने वालों की आस्था के साथ खिलवाड़ है।
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वर्जनचैत्र नवरात्र में व्रतियों को शुद्ध फलाहार की सामग्री मिले, इसके लिए जांच कर नमूने लिए जा रहे हैं। पूरे नवरात्र यह अभियान चलता रहेगा, जिससे लोगों को व्रत की सामग्री शुद्ध मिल सके।
- डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा
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