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इंश्योरेंस ठगी प्रकरण : विद्यावती हॉस्पिटल के संचालक समेत तीन आरोपी गिरफ्तार
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रामगढ़ताल थाना क्षेत्र स्थित डिसेंट हॉस्पिटल से जुड़े मामले में मिला कनेक्शन
मरीजों के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार कर इंश्योरेंस कंपनी से लेते थे बीमा क्लेम
गोरखपुर। रामगढ़ताल थाना क्षेत्र स्थित डिसेंट हॉस्पिटल से जुड़े इंश्योरेंस ठगी के मामले में पुलिस ने रविवार को एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए विद्यावती हॉस्पिटल के संचालक समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए आरोपी डिसेंट अस्पताल के संचालकों के साथ मिलकर फर्जी मरीजों के नाम पर दस्तावेज तैयार कर बीमा कंपनियों से क्लेम लेते थे।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान उरुवा बाजार के पचोहां गांव निवासी इंद्रेश यादव, शाहपुर थाना क्षेत्र के मोहनापुर गांव के सोनवा टोला निवासी अमन यादव उर्फ गौरव यादव और सरस्वतीपुरम लेन नंबर तीन निवासी अभिषेक शर्मा उर्फ हनी शर्मा के रूप में हुई है। इस मामले में पुलिस पहले ही डिसेंट अस्पताल के संचालक, डॉक्टर समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
मामले की विवेचना कर रहे रामगढ़ताल थाना प्रभारी नितिन रघुनाथ श्रीवास्तव ने बताया कि आरोपी इंद्रेश यादव खोराबार बाईपास पर विद्यावती हॉस्पिटल का संचालन कर रहा था। वह अपने सहयोगियों अमन यादव उर्फ गौरव यादव और अभिषेक शर्मा उर्फ हनी शर्मा के साथ डिसेंट अस्पताल के संचालकों से संपर्क में था और उनके साथ मिलकर ठगी का नेटवर्क चला रहा था।
जांच में सामने आया कि आरोपी अस्पताल में भर्ती दिखाए गए फर्जी मरीजों की फाइलें तैयार करते थे। इन फाइलों पर डिसेंट अस्पताल की तरह ही फर्जी हस्ताक्षर किए जाते थे ताकि दस्तावेज असली लगें। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर बीमा कंपनियों से इलाज का क्लेम पास कराया जाता था।
पुलिस के अनुसार, इंद्रेश यादव लंबे समय से इस फर्जीवाड़े में सक्रिय था। वह बीमा एजेंटों और अस्पताल प्रबंधन से मिलीभगत कर लाखों रुपये का बीमा क्लेम हड़प चुका था। जांच में यह भी सामने आया है कि मरीजों को वास्तविक रूप से अस्पताल में भर्ती किए बिना ही कागजों में इलाज दिखाया जाता था। पुलिस का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क में और भी अस्पताल, बीमा एजेंट और अन्य लोग शामिल हो सकते हैं। उनके खातों और लेन-देन की जांच की जा रही है।
मामले की विवेचना जारी है और ठगी से जुड़े अन्य आरोपियों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है। जरूरत पड़ने पर आगे और गिरफ्तारियां की जाएंगी।
-अभिनव त्यागी, एसपी सिटी
यह है मामला
नौ सितंबर 2025 को बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारियों ने गोरखपुर पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि डिसेंट और एपेक्स हॉस्पिटल में फर्जी मरीज भर्ती कराकर क्लेम की रकम निकाली जा रही है। जांच में सामने आया कि बीमाधारकों के फर्जी दस्तावेज बनाए गए। फिर उनके बैंक खाते खुलवाकर क्लेम के एक करोड़ 80 लाख 672 रुपये निकाल लिए गए। बीमा कंपनी के अधिकारियों की जांच में पता चला कि जिस एपेक्स हॉस्पिटल में मरीजों को भर्ती दिखाया गया था, वह अस्तित्व में ही नहीं है। वहीं डिसेंट हॉस्पिटल के रिकाॅर्ड में भी कई संदिग्ध फाइलें मिली थीं। इसकी जांच में गोरखपुर, संतकबीरनगर और बस्ती के कई अस्पतालों के नाम सामने आए थे।
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मरीजों के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार कर इंश्योरेंस कंपनी से लेते थे बीमा क्लेम
गोरखपुर। रामगढ़ताल थाना क्षेत्र स्थित डिसेंट हॉस्पिटल से जुड़े इंश्योरेंस ठगी के मामले में पुलिस ने रविवार को एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए विद्यावती हॉस्पिटल के संचालक समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए आरोपी डिसेंट अस्पताल के संचालकों के साथ मिलकर फर्जी मरीजों के नाम पर दस्तावेज तैयार कर बीमा कंपनियों से क्लेम लेते थे।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान उरुवा बाजार के पचोहां गांव निवासी इंद्रेश यादव, शाहपुर थाना क्षेत्र के मोहनापुर गांव के सोनवा टोला निवासी अमन यादव उर्फ गौरव यादव और सरस्वतीपुरम लेन नंबर तीन निवासी अभिषेक शर्मा उर्फ हनी शर्मा के रूप में हुई है। इस मामले में पुलिस पहले ही डिसेंट अस्पताल के संचालक, डॉक्टर समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
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मामले की विवेचना कर रहे रामगढ़ताल थाना प्रभारी नितिन रघुनाथ श्रीवास्तव ने बताया कि आरोपी इंद्रेश यादव खोराबार बाईपास पर विद्यावती हॉस्पिटल का संचालन कर रहा था। वह अपने सहयोगियों अमन यादव उर्फ गौरव यादव और अभिषेक शर्मा उर्फ हनी शर्मा के साथ डिसेंट अस्पताल के संचालकों से संपर्क में था और उनके साथ मिलकर ठगी का नेटवर्क चला रहा था।
जांच में सामने आया कि आरोपी अस्पताल में भर्ती दिखाए गए फर्जी मरीजों की फाइलें तैयार करते थे। इन फाइलों पर डिसेंट अस्पताल की तरह ही फर्जी हस्ताक्षर किए जाते थे ताकि दस्तावेज असली लगें। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर बीमा कंपनियों से इलाज का क्लेम पास कराया जाता था।
पुलिस के अनुसार, इंद्रेश यादव लंबे समय से इस फर्जीवाड़े में सक्रिय था। वह बीमा एजेंटों और अस्पताल प्रबंधन से मिलीभगत कर लाखों रुपये का बीमा क्लेम हड़प चुका था। जांच में यह भी सामने आया है कि मरीजों को वास्तविक रूप से अस्पताल में भर्ती किए बिना ही कागजों में इलाज दिखाया जाता था। पुलिस का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क में और भी अस्पताल, बीमा एजेंट और अन्य लोग शामिल हो सकते हैं। उनके खातों और लेन-देन की जांच की जा रही है।
मामले की विवेचना जारी है और ठगी से जुड़े अन्य आरोपियों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है। जरूरत पड़ने पर आगे और गिरफ्तारियां की जाएंगी।
-अभिनव त्यागी, एसपी सिटी
यह है मामला
नौ सितंबर 2025 को बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारियों ने गोरखपुर पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि डिसेंट और एपेक्स हॉस्पिटल में फर्जी मरीज भर्ती कराकर क्लेम की रकम निकाली जा रही है। जांच में सामने आया कि बीमाधारकों के फर्जी दस्तावेज बनाए गए। फिर उनके बैंक खाते खुलवाकर क्लेम के एक करोड़ 80 लाख 672 रुपये निकाल लिए गए। बीमा कंपनी के अधिकारियों की जांच में पता चला कि जिस एपेक्स हॉस्पिटल में मरीजों को भर्ती दिखाया गया था, वह अस्तित्व में ही नहीं है। वहीं डिसेंट हॉस्पिटल के रिकाॅर्ड में भी कई संदिग्ध फाइलें मिली थीं। इसकी जांच में गोरखपुर, संतकबीरनगर और बस्ती के कई अस्पतालों के नाम सामने आए थे।