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Gorakhpur News: 29 गार्ड, 20 कैमरे...फिर भी नहीं बची बच्ची
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अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। जिला अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल में सुरक्षा के लिए दिन और रात की पाली मिलाकर 29 महिला एवं पुरुष सुरक्षा गार्ड तैनात किए जाते हैं। इसके अलावा परिसर की निगरानी के लिए 20 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं लेकिन इसके बावजूद मासूम के अपहरण और हत्या की वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, रात के समय अस्पताल में आने-जाने वाले लोगों का विवरण सुरक्षा गार्ड रजिस्टर में दर्ज करते हैं। एंबुलेंस और निजी वाहनों से आने वाले लोगों की भी एंट्री की जाती है। इसके बावजूद अस्पताल परिसर में संदिग्ध गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी नहीं होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है। अस्पताल परिसर में पुलिस चौकी स्थापित करने की योजना भी वर्षों पहले बनाई गई थी।
कोलकाता की चर्चित घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से संक्रामक रोग विभाग के पास पुलिस चौकी के लिए स्थान भी चिह्नित किया गया था लेकिन योजना आगे नहीं बढ़ सकी और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। लोगों का कहना है कि अस्पताल परिसर में किसी भी व्यक्ति के आने-जाने पर प्रभावी रोक-टोक नहीं होती। बाहरी लोग बिना किसी विशेष जांच के परिसर में घूमते रहते हैं। ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है, जब जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं।
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गोरखपुर। जिला अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल में सुरक्षा के लिए दिन और रात की पाली मिलाकर 29 महिला एवं पुरुष सुरक्षा गार्ड तैनात किए जाते हैं। इसके अलावा परिसर की निगरानी के लिए 20 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं लेकिन इसके बावजूद मासूम के अपहरण और हत्या की वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, रात के समय अस्पताल में आने-जाने वाले लोगों का विवरण सुरक्षा गार्ड रजिस्टर में दर्ज करते हैं। एंबुलेंस और निजी वाहनों से आने वाले लोगों की भी एंट्री की जाती है। इसके बावजूद अस्पताल परिसर में संदिग्ध गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी नहीं होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है। अस्पताल परिसर में पुलिस चौकी स्थापित करने की योजना भी वर्षों पहले बनाई गई थी।
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कोलकाता की चर्चित घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से संक्रामक रोग विभाग के पास पुलिस चौकी के लिए स्थान भी चिह्नित किया गया था लेकिन योजना आगे नहीं बढ़ सकी और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। लोगों का कहना है कि अस्पताल परिसर में किसी भी व्यक्ति के आने-जाने पर प्रभावी रोक-टोक नहीं होती। बाहरी लोग बिना किसी विशेष जांच के परिसर में घूमते रहते हैं। ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है, जब जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं।