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UP: शिक्षक, लिपिक और चपरासी की नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी, केस दर्ज- 22 लोगों को बनाया शिकार

अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Wed, 08 Apr 2026 03:00 AM IST
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सार

मामले में पीड़ितों ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और जिला विद्यालय निरीक्षक को भी प्रार्थना पत्र दिया और सभी साक्ष्य प्रस्तुत किए। जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से गठित जांच समिति ने एक दिसंबर 2025 को विद्यालय में जांच की थी लेकिन अब तक रिपोर्ट नहीं आई। आरोप है कि प्रबंधक नवारुन चटर्जी जांच में उपस्थित नहीं हुए।

Money was collected in the name of providing jobs as teachers, clerks and peons.
फर्जी दस्तावेज से नौकरी - फोटो : amar ujala
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विस्तार

शाहपुर इलाके में स्थित विवेकानंद शिक्षा निकेतन बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में नौकरी के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस ने प्रबंधक नवारुन चटर्जी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। डीआईओएस के यहां भी मामले की जांच चल रही है, हालांकि रिपोर्ट अभी तक सामने नहीं आई है।

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पुलिस को दी गई तहरीर में पीड़िता अमृता मुखर्जी ने बताया कि विद्यालय में सहायक अध्यापक की नौकरी के लिए 15 लाख रुपये और लिपिक व चपरासी पदों के लिए सात-सात लाख रुपये कीमत तय की गई थी। इसी आधार पर प्रबंधक ने 22 लोगों से रुपये वसूले।

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पीड़ितों के अनुसार, काफी समय बीत जाने के बाद न तो नौकरी दी गई और न ही रुपये वापस किए गए। जब उन्होंने रुपये की मांग की तो प्रबंधक की ओर से धमकी और टालमटोल किया जाने लगा।

मामले में पीड़ितों ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और जिला विद्यालय निरीक्षक को भी प्रार्थना पत्र दिया और सभी साक्ष्य प्रस्तुत किए। जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से गठित जांच समिति ने एक दिसंबर 2025 को विद्यालय में जांच की थी लेकिन अब तक रिपोर्ट नहीं आई। आरोप है कि प्रबंधक नवारुन चटर्जी जांच में उपस्थित नहीं हुए।

अमृता मुखर्जी ने आरोप लगाया कि वे लगातार पुलिस और शिक्षा विभाग के कार्यालयों के चक्कर काट रही हैं लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

शाहपुर थाना प्रभारी चंद्रभान सिंह ने बताया कि उनकी तहरीर पर प्रबंधक नवारुन चटर्जी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, अब आरोपियों के बैंक लेन-देन और दस्तावेजों की जांच के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया और कुल कितने रुपये की वसूली गई।
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