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Gorakhpur News: धुम्रपान शौक नहीं, कैंसर और फेफड़ों की बीमारी का है घर
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- धूम्रपान निषेध दिवस पर विशेष
- मार्च के दूसरे बुधवार को मनाया जाता है धूम्रपान निषेध दिवस
गोरखपुर। कोई सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करता है तो उसे 200 रुपये जुर्माना का प्रावधान है लेकिन इसका पालन कोई नहीं करता। शौकीन दूसरों के स्वास्थ्य की परवाह नहीं करते। धूम्रपान के शौकीन सिगरेट और बीड़ी के धुएं से लोगों को बीमारी बांट रहे हैं। इसके सेवन से अधिकतर लोग ब्लड प्रेशर समेत कई बीमारियों से जूझ रहे हैं।
धूम्रपान निषेध दिवस हर वर्ष मार्च के दूसरे बुधवार को मनाया जाता है। इस वर्ष 11 मार्च को मनाया जा रहा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज चेस्ट रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अश्वनी मिश्र ने बताया कि धूम्रपान का सीधा असर फेफड़ों पर पड़ता है। इससे रक्त संचार, ब्लड प्रेशर और सांस फूलने की बीमारी होती है। धूम्रपान से होने वाली प्रमुख बीमारियों में ब्रांकाइटिस, एसिडिटी, टीबी, हार्ट अटैक, फालिज, नपुंसकता, माइग्रेन, बालों की सफेदी, असमय बालों का गिरना आदि समस्याएं शामिल हैं। शौक के चलते सिगरेट का धुआं उड़ाना युवाओं को ज्यादा भारी पड़ रहा है। तंबाकू की वजह से लोगों में बीपी की समस्या बढ़ गई है।
डॉ. अश्वनी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना ब्लड प्रेशर की समस्या लेकर मरीज आते हैं। इनमें युवा भी शामिल हैं। यदि महिलाएं गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करती हैं या अपरोक्ष रूप से इससे प्रभावित होती हैं तो इसका असर होने वाले नवजात पर पड़ सकता है। इसके कारण शिशु का वजन कम हो सकता है या गर्भाशय में मौत हो सकती है। कई बार जन्म के समय से ही शिशु कई तरह की बीमारियों से ग्रसित होता है। इसका कारण धूम्रपान होता है। यही नहीं, गर्भवती महिला के पास सिगरेट पीकर जाना या धुएं के संपर्क में आना (परोक्ष धूम्रपान) गर्भ में पल रहे शिशु के लिए बेहद खतरनाक है। इससे गर्भपात, समय से पहले जन्म, कम वजन, स्टिलबर्थ (मृत जन्म) और अचानक शिशु मृत्यु सिंड्रोम का खतरा काफी बढ़ जाता है। निकोटीन और कार्बन मोनोऑक्साइड गर्भनाल के जरिए शिशु को ऑक्सीजन मिलने में बाधा डालते हैं।
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बदलती जीवनशैली भी एक वजह
बदलती जीवनशैली की वजह से युवा भी इसकी चपेट में आते हैं। शुरुआत में सिर भारी रहना, सिरदर्द होना और बाद में ह्दयघात व किडनी फेल होने का डर रहता है। सिगरेट और बीड़ी का धुआं पीने वाले के साथ ही दूसरे व्यक्तियों को भी प्रभावित करता है। सिगरेट पीने से याददाश्त कम होने, असमय मृत्यु का खतरा बना रहता है।
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धूम्रपान के धुएं से होतें हैं ये नुकसान
- सांस फूलने लगती है, फेफड़े, मुंह व गले का कैंसर होता है।
- सांस की नली व ऑक्सीजन को बदलने वाले कारक नष्ट हो जाते हैं।
- धुएं की वजह से अस्थमा हो सकता है।
- धुएं में मौजूद टार और रसायन फेफड़ों में जमा होकर ब्रोंकाइटिस, वातस्फीति और कैंसर का कारण बनते हैं।
- निकोटीन रक्तचाप बढ़ाता है और धमनियों में प्लाक जमा करता है, जिससे हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
- यह फेफड़ों के अलावा मुंह, गले, अन्नप्रणाली, पेट और अन्य अंगों में भी कैंसर का मुख्य कारण है।
- त्वचा और बालों को नुकसान: धूम्रपान करने वालों की त्वचा पर समय से पहले झुर्रियां पड़ सकती हैं और बाल प्राकृतिक चमक खो देते हैं।
- मार्च के दूसरे बुधवार को मनाया जाता है धूम्रपान निषेध दिवस
गोरखपुर। कोई सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करता है तो उसे 200 रुपये जुर्माना का प्रावधान है लेकिन इसका पालन कोई नहीं करता। शौकीन दूसरों के स्वास्थ्य की परवाह नहीं करते। धूम्रपान के शौकीन सिगरेट और बीड़ी के धुएं से लोगों को बीमारी बांट रहे हैं। इसके सेवन से अधिकतर लोग ब्लड प्रेशर समेत कई बीमारियों से जूझ रहे हैं।
धूम्रपान निषेध दिवस हर वर्ष मार्च के दूसरे बुधवार को मनाया जाता है। इस वर्ष 11 मार्च को मनाया जा रहा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज चेस्ट रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अश्वनी मिश्र ने बताया कि धूम्रपान का सीधा असर फेफड़ों पर पड़ता है। इससे रक्त संचार, ब्लड प्रेशर और सांस फूलने की बीमारी होती है। धूम्रपान से होने वाली प्रमुख बीमारियों में ब्रांकाइटिस, एसिडिटी, टीबी, हार्ट अटैक, फालिज, नपुंसकता, माइग्रेन, बालों की सफेदी, असमय बालों का गिरना आदि समस्याएं शामिल हैं। शौक के चलते सिगरेट का धुआं उड़ाना युवाओं को ज्यादा भारी पड़ रहा है। तंबाकू की वजह से लोगों में बीपी की समस्या बढ़ गई है।
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डॉ. अश्वनी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना ब्लड प्रेशर की समस्या लेकर मरीज आते हैं। इनमें युवा भी शामिल हैं। यदि महिलाएं गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करती हैं या अपरोक्ष रूप से इससे प्रभावित होती हैं तो इसका असर होने वाले नवजात पर पड़ सकता है। इसके कारण शिशु का वजन कम हो सकता है या गर्भाशय में मौत हो सकती है। कई बार जन्म के समय से ही शिशु कई तरह की बीमारियों से ग्रसित होता है। इसका कारण धूम्रपान होता है। यही नहीं, गर्भवती महिला के पास सिगरेट पीकर जाना या धुएं के संपर्क में आना (परोक्ष धूम्रपान) गर्भ में पल रहे शिशु के लिए बेहद खतरनाक है। इससे गर्भपात, समय से पहले जन्म, कम वजन, स्टिलबर्थ (मृत जन्म) और अचानक शिशु मृत्यु सिंड्रोम का खतरा काफी बढ़ जाता है। निकोटीन और कार्बन मोनोऑक्साइड गर्भनाल के जरिए शिशु को ऑक्सीजन मिलने में बाधा डालते हैं।
बदलती जीवनशैली भी एक वजह
बदलती जीवनशैली की वजह से युवा भी इसकी चपेट में आते हैं। शुरुआत में सिर भारी रहना, सिरदर्द होना और बाद में ह्दयघात व किडनी फेल होने का डर रहता है। सिगरेट और बीड़ी का धुआं पीने वाले के साथ ही दूसरे व्यक्तियों को भी प्रभावित करता है। सिगरेट पीने से याददाश्त कम होने, असमय मृत्यु का खतरा बना रहता है।
धूम्रपान के धुएं से होतें हैं ये नुकसान
- सांस फूलने लगती है, फेफड़े, मुंह व गले का कैंसर होता है।
- सांस की नली व ऑक्सीजन को बदलने वाले कारक नष्ट हो जाते हैं।
- धुएं की वजह से अस्थमा हो सकता है।
- धुएं में मौजूद टार और रसायन फेफड़ों में जमा होकर ब्रोंकाइटिस, वातस्फीति और कैंसर का कारण बनते हैं।
- निकोटीन रक्तचाप बढ़ाता है और धमनियों में प्लाक जमा करता है, जिससे हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
- यह फेफड़ों के अलावा मुंह, गले, अन्नप्रणाली, पेट और अन्य अंगों में भी कैंसर का मुख्य कारण है।
- त्वचा और बालों को नुकसान: धूम्रपान करने वालों की त्वचा पर समय से पहले झुर्रियां पड़ सकती हैं और बाल प्राकृतिक चमक खो देते हैं।