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Gorakhpur News: कुछ लोग दिगभ्रमित कर सैंथवारों का आरक्षण करना चाह रहे समाप्त
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सैंथवार मल्ल के नाम से पहले मिला था आरक्षण, न्यायालय में रिट दाखिल होने से हो गया वापस
गोरखपुर। सैंथवार मल्ल महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गंगा सिंह सैंथवार ने कहा कि कुछ लोग दिगभ्रमित करके हमारे समाज के आरक्षण को समाप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि उनके समाज को आरक्षण 1989 में नारायण दत तिवारी ने ''''''''सैंथवार मल्ल''''''''के नाम से दिया था। इनके विरुद्ध समाज के कुछ विभीषण, एक विधायक के नाम से इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट दाखिल कर दी, उसमें सरकार को पार्टी बनाया गया था। इसके बाद सरकार ने आरक्षण के लिए जारी अधिसूचना वापस ले ली थी।
उन्होंने कहा कि 1994 में मूल नाम से ही आरक्षण के प्रत्यावेदन दिया, उस समय भी समाज के इन्हीं आरक्षण विरोधियों ने हम क्षत्रिय हैं, के नाम से प्रतिवेदन दिया जिस पर समाज से व्यापक विचारों उपरांत न्यायाधीश ने यह फैसला दिया कि जो सैंथवार-मल्ल समाज कुर्मी की उपजाति है उनको आरक्षण का लाभ मिलेगा और जो सैंथवार-मल्ल क्षत्रिय की उपजाति हैं उनको आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि इन्हीं समाज विरोधी तत्वों के कारण हमारा समाज सिर्फ सैंथवार-मल्ल नाम के आरक्षण से वंचित रह गया। आज फिर यही लोग कुचक्र रच रहे हैं।
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गोरखपुर। सैंथवार मल्ल महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गंगा सिंह सैंथवार ने कहा कि कुछ लोग दिगभ्रमित करके हमारे समाज के आरक्षण को समाप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि उनके समाज को आरक्षण 1989 में नारायण दत तिवारी ने ''''''''सैंथवार मल्ल''''''''के नाम से दिया था। इनके विरुद्ध समाज के कुछ विभीषण, एक विधायक के नाम से इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट दाखिल कर दी, उसमें सरकार को पार्टी बनाया गया था। इसके बाद सरकार ने आरक्षण के लिए जारी अधिसूचना वापस ले ली थी।
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उन्होंने कहा कि 1994 में मूल नाम से ही आरक्षण के प्रत्यावेदन दिया, उस समय भी समाज के इन्हीं आरक्षण विरोधियों ने हम क्षत्रिय हैं, के नाम से प्रतिवेदन दिया जिस पर समाज से व्यापक विचारों उपरांत न्यायाधीश ने यह फैसला दिया कि जो सैंथवार-मल्ल समाज कुर्मी की उपजाति है उनको आरक्षण का लाभ मिलेगा और जो सैंथवार-मल्ल क्षत्रिय की उपजाति हैं उनको आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि इन्हीं समाज विरोधी तत्वों के कारण हमारा समाज सिर्फ सैंथवार-मल्ल नाम के आरक्षण से वंचित रह गया। आज फिर यही लोग कुचक्र रच रहे हैं।
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